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Stock Market Today: सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट, IT शेयरों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी

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घरेलू शेयर बाजार बुधवार को गिरावट के साथ खुला। आईटी शेयरों में बिकवाली, रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।

हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने कमजोर शुरुआत की, जिससे पिछले तीन सत्रों की तेजी पर ब्रेक लग गया। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की धारणा बदलती नजर आई और बाजार लाल निशान में फिसल गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली और वैश्विक संकेतों से बना दबाव रहा।

मंगलवार को जहां बाजार ने मजबूती दिखाई थी और सेंसेक्स 700 से ज्यादा अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ था, वहीं बुधवार को तस्वीर पूरी तरह उलट गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 494 अंक गिरकर 78,700 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी भी 140 अंकों से ज्यादा टूटकर 24,400 के करीब पहुंच गया। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

आईटी सेक्टर बना गिरावट की बड़ी वजह

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी कंपनियों के शेयरों में आई तेज गिरावट रही। खासकर HCL Technologies के शेयरों में लगभग 9 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। कंपनी के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं रहे, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया।

हालांकि कंपनी ने मार्च तिमाही में मुनाफे में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन आने वाले वित्त वर्ष के लिए जो ग्रोथ अनुमान दिया गया, वह बाजार की उम्मीदों से कम रहा। प्रबंधन ने मांग में अनिश्चितता और खर्चों में कमी की आशंका जताई, जिसने निवेशकों को सतर्क कर दिया।

इसके अलावा Infosys, Tata Consultancy Services और Tech Mahindra जैसे दिग्गज आईटी शेयर भी दबाव में रहे, जिससे पूरे सेक्टर पर असर पड़ा।

अन्य शेयरों का हाल

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। ICICI Bank और Asian Paints भी नुकसान में रहे। हालांकि कुछ शेयरों ने इस गिरावट के बीच मजबूती दिखाई। NTPC, Hindustan Unilever और Tata Steel जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई, जिसने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।

रुपये पर भी दबाव

शेयर बाजार की गिरावट के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव देखने को मिला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 31 पैसे कमजोर होकर 93.75 के स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा सत्र है जब रुपया कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक अनिश्चितताएं रुपये पर दबाव बढ़ा रही हैं। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से मुद्रा पर सीधा असर पड़ता है।

कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। हालांकि इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह स्तर अभी भी ऊंचा माना जा रहा है।

तेल की कीमतों में यह तेजी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से जुड़ी मानी जा रही है। Donald Trump द्वारा ईरान को लेकर दिए गए सख्त बयान ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ेगा।

एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख

बुधवार को एशियाई बाजारों का रुख भी मिला-जुला रहा। जहां दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजार दबाव में रहे, वहीं जापान और चीन के कुछ सूचकांकों में हल्की बढ़त देखने को मिली। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर भी निवेशक सतर्क हैं और बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं।

अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आईटी सेक्टर में कमजोरी, वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की गिरावट—ये सभी कारक बाजार की दिशा तय कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट के दौरान अच्छे शेयरों में निवेश के अवसर बन सकते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म में जोखिम बना रहेगा।

आगे क्या रहेगा नजरिया?

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी—वैश्विक घटनाक्रम, कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें प्रमुख हैं। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कंपनियों के नतीजे बेहतर आते हैं, तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।

फिलहाल, बाजार एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां हर छोटी खबर भी बड़ा असर डाल सकती है। इसलिए निवेशकों को हर कदम सोच-समझकर उठाने की सलाह दी जा रही है।

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