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शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी फिसले, रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दबाव

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शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट दर्ज हुई, रुपया कमजोर हुआ और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

पटना/आलम की खबर:हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बाजार की शुरुआत ही लाल निशान पर हुई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया। पिछले कारोबारी सत्र यानी गुरुवार को भी बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 852.49 अंकों की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 205.05 अंक फिसलकर 24,173.05 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन गिरावट ने बाजार की कमजोरी को और स्पष्ट कर दिया है।

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भी दबाव जारी रहा और 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक BSE Sensex लगभग 330 अंक गिरकर 77,334 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर Nifty 50 भी करीब 93 अंक गिरकर 24,079 के आसपास कारोबार करता नजर आया। लगातार बिकवाली के चलते बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भारतीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

विदेशी मुद्रा बाजार में भी स्थिति कमजोर नजर आई, जहां भारतीय रुपया लगातार पांचवें दिन गिरावट के साथ 94.25 के स्तर तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे कमजोर हुआ। रुपये में इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 105.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता को दर्शाता है। तेल कीमतों में यह बढ़ोतरी भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगाई और वित्तीय दबाव दोनों बढ़ा सकती है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी तेल टैंकर को जब्त किए जाने के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है।

इसके साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए सख्त आदेशों ने भी बाजार की चिंता को बढ़ाया है, जिसमें उन्होंने उन छोटी नावों पर कार्रवाई की बात कही है जो समुद्री मार्गों को प्रभावित कर सकती हैं। इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और निवेश धारणा पर देखा जा रहा है।

घरेलू बाजार की बात करें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। गुरुवार को ही करीब 3,254 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। लगातार विदेशी फंड्स की निकासी ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है।

शुरुआती कारोबार में भी बाजार पर दबाव जारी रहा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

कुल मिलाकर, यह पूरा कारोबारी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर साबित हो रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव ने मिलकर बाजार को दबाव में डाल दिया है।

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