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मार्च में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार सुस्त होने के संकेत, IIP ग्रोथ 2% तक सिमटने का अनुमान

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मार्च 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार घटने का अनुमान है। यूनियन बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में कमजोरी के चलते IIP ग्रोथ 2% तक सिमट सकती है।

पटना/आलम की खबर:देश के औद्योगिक क्षेत्र में मार्च 2026 के दौरान रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की वृद्धि दर घटकर लगभग 2 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। यह गिरावट फरवरी 2026 के 5.2 प्रतिशत की तुलना में काफी बड़ी मानी जा रही है। वहीं पिछले वर्ष मार्च 2025 में यह वृद्धि 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जिससे स्पष्ट है कि औद्योगिक गतिविधियों में अस्थिरता बनी हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सुस्ती के पीछे सबसे बड़ा कारण विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में आई कमजोरी है। लगातार बढ़ती उत्पादन लागत, सप्लाई चेन में बाधाएं और कमजोर मांग ने उद्योगों की रफ्तार पर असर डाला है। हालांकि कुछ सेक्टरों में हल्की मजबूती देखने को मिली है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति मिश्रित बनी हुई है।

विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट, PMI भी फिसला

मार्च महीने में विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति कमजोर रही। मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 53.9 पर आ गया, जो जून 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन गतिविधियों में धीमापन आया है और नए ऑर्डर में भी गिरावट देखी गई है।

बुनियादी ढांचा सेक्टर पर भी दबाव

आईआईपी में करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों में मार्च के दौरान 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 19 महीनों में सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। यह औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक सुस्ती का संकेत देता है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों जैसे प्राकृतिक गैस, इस्पात, सीमेंट और रिफाइनरी उत्पादों में बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन कोयला, कच्चा तेल, उर्वरक और बिजली उत्पादन में गिरावट ने कुल प्रदर्शन को प्रभावित किया।

ई-वे बिल और जीएसटी में मिला-जुला रुझान

उच्च-आवृत्ति संकेतकों में भी मिश्रित तस्वीर सामने आई है। मार्च में ई-वे बिल ग्रोथ 12.9 प्रतिशत रही, जो फरवरी के मुकाबले थोड़ी कम है। वहीं जीएसटी संग्रह में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, जो 8.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह खपत और अनुपालन में सुधार का संकेत माना जा रहा है।

वाहन बिक्री में मजबूती, ग्रामीण मांग का असर

ऑटो सेक्टर में राहत भरे संकेत देखने को मिले हैं। दोपहिया वाहनों की बिक्री में 28.7 प्रतिशत और ट्रैक्टर बिक्री में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल मिलाकर वाहन बिक्री 25.3 प्रतिशत तक मजबूत रही। हालांकि यात्री वाहनों की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।

ईंधन खपत और बिजली मांग का रुझान

पेट्रोल और डीजल की खपत में क्रमशः 7.6 और 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों की कुल खपत में गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण विमान ईंधन की मांग में कमी बताई जा रही है। बिजली की मांग स्थिर रही क्योंकि मार्च में बारिश अधिक होने से कूलिंग की जरूरत कम रही।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर औद्योगिक उत्पादन की तस्वीर अभी कमजोर और अस्थिर बनी हुई है। कुछ क्षेत्रों में सुधार के बावजूद विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र की सुस्ती ने समग्र ग्रोथ पर दबाव बनाए रखा है। आने वाले महीनों में मांग और वैश्विक स्थिति में सुधार ही इस रफ्तार को फिर से गति दे सकता है।

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