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ट्राई का बड़ा फैसला: बिना डेटा वाले सस्ते मोबाइल प्लान पर सुझाव की समयसीमा बढ़ी, टेलीकॉम कंपनियों पर नए नियमों की तैयारी

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ट्राई ने डेटा रहित मोबाइल टैरिफ प्लान पर सुझाव देने की अंतिम तिथि 5 मई 2026 तक बढ़ा दी है। प्रस्ताव में केवल कॉलिंग और एसएमएस वाले सस्ते प्लान लाने की बात है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

देश के दूरसंचार क्षेत्र में एक अहम नीतिगत बदलाव की दिशा में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मोबाइल टैरिफ प्लान को लेकर जारी किए गए प्रस्तावों पर आम जनता, विशेषज्ञों और टेलीकॉम कंपनियों से सुझाव देने की अंतिम तिथि अब बढ़ाकर 5 मई 2026 कर दी गई है। पहले यह समय सीमा 28 अप्रैल 2026 निर्धारित थी, लेकिन विभिन्न हितधारकों की मांग के बाद ट्राई ने इसे एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे अब सभी पक्षों को अपनी राय देने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

ट्राई की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन प्रस्तावों पर प्राप्त सुझावों के जवाब में टिप्पणियां यानी काउंटर कमेंट्स 12 मई 2026 तक भेजी जा सकेंगी। यह पूरी प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मोबाइल टैरिफ सिस्टम में अधिक पारदर्शिता और संतुलन लाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।

ट्राई का मुख्य प्रस्ताव यह है कि टेलीकॉम कंपनियां ऐसे मोबाइल रिचार्ज प्लान भी बाजार में उपलब्ध कराएं जिनमें केवल कॉलिंग और एसएमएस की सुविधा हो और उनमें इंटरनेट डेटा शामिल न हो। इन प्लानों की कीमत मौजूदा डेटा वाले पैकेजों की तुलना में स्पष्ट रूप से कम होनी चाहिए, ताकि उन उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिल सके जो इंटरनेट का उपयोग कम या बिल्कुल नहीं करते।ट्राई ने अपनी समीक्षा में यह पाया है कि पहले जब बिना डेटा वाले प्लान बाजार में पेश किए गए थे, तो उनकी कीमतों में उतनी कमी नहीं की गई जितनी अपेक्षित थी। डेटा हटाए जाने के बावजूद उन प्लानों की कीमत लगभग समान ही बनी रही, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। इसी कारण अब नियामक संस्था यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नए नियमों के तहत कंपनियां वास्तव में सस्ते और केवल कॉलिंग-एसएमएस आधारित प्लान उपलब्ध कराएं।

इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा उद्देश्य देश के उन उपभोक्ताओं को राहत देना है जो स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग, बुजुर्ग नागरिक और बेसिक फीचर फोन उपयोगकर्ता इस योजना से सबसे अधिक लाभान्वित हो सकते हैं। ट्राई का मानना है कि हर ग्राहक को उसकी जरूरत के अनुसार भुगतान करने का विकल्प मिलना चाहिए, न कि ऐसी सेवाओं के लिए भी पैसा देना पड़े जिनका वह उपयोग ही नहीं करता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय टेलीकॉम बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कंपनियों को अपने टैरिफ ढांचे को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना होगा और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है, जिससे लंबे समय में ग्राहकों को और भी सस्ते प्लान मिल सकते हैं।

हालांकि, इस प्रस्ताव से टेलीकॉम कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। कंपनियों को अपने मौजूदा रेवेन्यू मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है क्योंकि वर्तमान में डेटा आधारित प्लान उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा हैं। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बाजार को अधिक संतुलित और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।

कुल मिलाकर ट्राई का यह कदम मोबाइल टैरिफ सिस्टम में एक महत्वपूर्ण सुधार की दिशा में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर 5 मई 2026 की नई समयसीमा पर है, जब यह तय होगा कि इस प्रस्ताव पर कितनी सहमति बनती है और भविष्य में मोबाइल रिचार्ज सिस्टम में किस तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं।

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