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शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी, सेंसेक्स 355 अंक चढ़ा, निफ्टी ने भी लगाई छलांग; रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

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भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 355 अंक और निफ्टी 121 अंक चढ़ा। हालांकि रुपये में गिरावट जारी रही और यह अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। पूरे दिन बाजार में सकारात्मक रुख बना रहा और अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि दूसरी ओर विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर दबाव देखने को मिला और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे आर्थिक मोर्चे पर चिंता भी बढ़ी है।

बाजार की मजबूत शुरुआत और पूरे दिन का रुझान

सोमवार को शुरुआती कारोबार से ही बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निवेशकों ने चुनिंदा लार्जकैप और बैंकिंग शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांक लगातार ऊपर की ओर बढ़ते गए। दिन के अंत तक 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 355.90 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,269.40 अंक पर बंद हुआ। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 121.75 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,119.30 अंक पर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों का भरोसा घरेलू आर्थिक संकेतकों और चुनावी परिणामों से जुड़े राजनीतिक स्थिरता के संकेतों से मजबूत हुआ है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में भी मिली-जुली स्थिति के बावजूद भारतीय बाजार ने बेहतर प्रदर्शन किया।

बैंकिंग और आईटी शेयरों में दिखी खरीदारी

सोमवार के कारोबार में बैंकिंग और आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखी गई। बड़े बैंकिंग स्टॉक्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जबकि आईटी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद ने भी बाजार को सपोर्ट दिया। ऑटो और मेटल सेक्टर में भी हल्की खरीदारी देखने को मिली, हालांकि कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली भी दर्ज की गई।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक बना हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की भागीदारी भी बाजार की मजबूती का एक अहम कारण माना जा रहा है।

रुपये में बड़ी गिरावट, चिंता बढ़ी

जहां एक ओर शेयर बाजार में तेजी का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर भारी दबाव देखने को मिला। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे गिरकर 95.08 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट आयात लागत बढ़ने और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती के कारण मानी जा रही है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, रुपये में लगातार कमजोरी महंगाई पर असर डाल सकती है, खासकर पेट्रोलियम और आयातित वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि रिजर्व बैंक की नीतिगत हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश जारी है।

निवेशकों की रणनीति और बाजार का मूड

बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए निवेशक सतर्क लेकिन आशावादी नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ इक्विटी मार्केट में तेजी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, वहीं मुद्रा बाजार की कमजोरी ने जोखिम भी बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक आर्थिक संकेतक बाजार की दिशा तय करेंगे। साथ ही कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर इंडेक्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

आगे की संभावनाएं

बाजार जानकारों के अनुसार, अगर विदेशी निवेश का प्रवाह इसी तरह जारी रहता है तो भारतीय शेयर बाजार नए रिकॉर्ड स्तरों को छू सकता है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताएं और रुपये की कमजोरी निवेशकों के लिए चुनौती बनी रह सकती हैं।

फिलहाल बाजार का रुझान सकारात्मक बना हुआ है और निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले सत्रों में यह तेजी जारी रहेगी।

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