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Tata Motors-Iveco Deal: 4.4 अरब डॉलर के अधिग्रहण में देरी, अब सितंबर तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद

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टाटा मोटर्स द्वारा इटली की कमर्शियल वाहन कंपनी इवेको के 4.4 अरब डॉलर अधिग्रहण में देरी हो गई है। रेगुलेटरी मंजूरियों के कारण अब यह डील सितंबर तिमाही तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की सबसे चर्चित वैश्विक डील्स में शामिल टाटा मोटर्स और इटली की कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी Tata Motors⁠� तथा Iveco Group⁠� के बीच प्रस्तावित 4.4 अरब डॉलर के अधिग्रहण सौदे में देरी हो गई है। अब यह बहुचर्चित डील जून तिमाही के बजाय सितंबर तिमाही तक पूरी होने की संभावना जताई जा रही है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि अधिग्रहण प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण रेगुलेटरी मंजूरियां अभी बाकी हैं, जिसके कारण समय-सीमा आगे बढ़ानी पड़ी है।

इतालवी कमर्शियल वाहन निर्माता इवेको ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि अधिग्रहण से जुड़ी लगभग सभी औपचारिक मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं, लेकिन मुंबई स्थित टाटा मोटर्स को अभी कुछ तकनीकी और नियामकीय स्वीकृतियों का इंतजार है। खासतौर पर यूरोपीय सेंट्रल बैंक और यूरोपीय प्रतिस्पर्धा आयोग से संबंधित प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हो पाई हैं। इन्हीं कारणों से यह डील निर्धारित समय से आगे खिसक गई है।

जानकारी के मुताबिक इवेको समूह के पास एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी भी संचालित होती है, जिसके चलते यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मंजूरी इस अधिग्रहण के लिए अनिवार्य हो गई है। इसी प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लगने के कारण अधिग्रहण में देरी सामने आई है। हालांकि दोनों कंपनियों की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सौदे को लेकर प्रतिबद्धता बरकरार है और मंजूरियां मिलते ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

यह डील टाटा मोटर्स के इतिहास के सबसे बड़े अधिग्रहणों में गिनी जा रही है। जुलाई 2025 में घोषित इस समझौते का उद्देश्य टाटा मोटर्स की वैश्विक कमर्शियल वाहन बाजार में मजबूत उपस्थिति स्थापित करना है। इवेको यूरोप की बड़ी कमर्शियल वाहन कंपनियों में गिनी जाती है और पहले यह फिएट समूह का हिस्सा रह चुकी है। इस अधिग्रहण के बाद टाटा मोटर्स को यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ी पहुंच मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह डील पूरी हो जाती है तो संयुक्त रूप से दोनों कंपनियों की वार्षिक बिक्री 5.4 लाख यूनिट से अधिक हो जाएगी, जबकि संयुक्त राजस्व 25 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। इसे भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए वैश्विक स्तर पर एक बड़े विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

ऑटो सेक्टर के जानकार इस सौदे की तुलना टाटा समूह के पुराने बड़े अधिग्रहणों से भी कर रहे हैं। वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स ने जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण किया था, जिसे उस समय भारतीय कॉरपोरेट इतिहास की सबसे बड़ी डील्स में माना गया था। अब इवेको अधिग्रहण को उसी श्रृंखला का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

हालांकि इस डील में हो रही देरी के बीच इवेको के हालिया वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार में चिंता भी बढ़ा दी है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की एक तिमाही में लगभग 75 मिलियन यूरो के घाटे की जानकारी दी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी को मुनाफा हुआ था। कंपनी के अनुसार बस सेगमेंट में सुधार कार्य, तकनीकी अपग्रेडेशन और गुणवत्ता सुधार से जुड़ी लागतों के कारण लाभप्रदता पर असर पड़ा है।

हालांकि राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने हल्की बढ़त दर्ज की है। इवेको का नेट रेवेन्यू करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 2.83 अरब यूरो तक पहुंच गया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Olof Persson ने कहा है कि कार्यक्षमता सुधार कार्यक्रमों और लागत नियंत्रण के जरिए 2026 की दूसरी छमाही में प्रदर्शन बेहतर होने की उम्मीद है।

उधर शेयर बाजार में इस खबर का मिला-जुला असर देखने को मिला। गुरुवार को टाटा मोटर्स के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि ऑटो सेक्टर इंडेक्स में भी मजबूती दिखाई दी। निवेशकों को उम्मीद है कि लंबी अवधि में यह डील टाटा मोटर्स को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों ने इस सौदे को लेकर सतर्कता भी जताई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप और लैटिन अमेरिका के बाजारों में मांग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में इवेको के कमजोर वित्तीय प्रदर्शन का असर भविष्य में टाटा मोटर्स की रेटिंग और मुनाफे पर पड़ सकता है। कई ब्रोकरेज फर्मों ने भी कहा है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ऑटो सेक्टर की धीमी मांग को देखते हुए आने वाले महीनों में यह डील चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

इसके बावजूद टाटा मोटर्स फिलहाल लंबित मंजूरियां जल्द हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी को भरोसा है कि सितंबर तिमाही तक अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यदि ऐसा होता है तो यह न केवल टाटा मोटर्स बल्कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाएगी।

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