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होर्मुज तनाव से हिला शेयर बाजार: सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट, तेल 100 डॉलर पार, सोना-चांदी में उछाल

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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में हलचल, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट, कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर पार, सोना-चांदी और रुपये पर दबाव का पूरा विश्लेषण।

पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच फिर से गहराते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इस संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थिति का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला, जहां सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में निवेशकों ने भारी बिकवाली की। वैश्विक जोखिम बढ़ने और युद्ध जैसे हालात की आशंका के चलते बाजार में ‘रिस्क-ऑफ’ का माहौल बन गया, जिससे घरेलू इक्विटी सूचकांक दबाव में आ गए।

शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में कमजोरी का रुझान दिखा और पूरे दिन उतार-चढ़ाव के बीच बिकवाली हावी रही। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हुए मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

शुक्रवार को प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक Bombay Stock Exchange सेंसेक्स 516.33 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,328.19 पर बंद हुआ। वहीं National Stock Exchange of India निफ्टी 50 भी 150.50 अंक यानी 0.62 प्रतिशत टूटकर 24,176.15 के स्तर पर आ गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का परिणाम है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में से एक है, वहां किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करती है।

सेक्टोरल प्रदर्शन: आईटी चमका, बैंकिंग टूटा

बाजार के सेक्टोरल इंडेक्स में मिला-जुला रुख देखने को मिला। आईटी सेक्टर ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को राहत दी, जबकि बैंकिंग और मेटल सेक्टर पर भारी दबाव रहा।

आईटी इंडेक्स 1.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा। निर्यात आधारित मांग और डॉलर की मजबूती से आईटी कंपनियों को सहारा मिला। एफएमसीजी सेक्टर में भी 0.19 प्रतिशत और मीडिया सेक्टर में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई।

इसके विपरीत, पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई और यह 3 प्रतिशत से अधिक टूट गया। मेटल सेक्टर 0.87 प्रतिशत, ऑटो सेक्टर 0.29 प्रतिशत और फार्मा सेक्टर 0.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बैंकिंग और मेटल सेक्टर पर वैश्विक अनिश्चितता का सीधा असर देखने को मिला।

कमोडिटी मार्केट में हलचल: तेल 100 डॉलर पार, सोना-चांदी में उछाल

कमोडिटी बाजार में इस भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।

सोने और चांदी में भी सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना 0.25 प्रतिशत बढ़कर 1,52,645 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 2,61,252 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के समय में निवेशक सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर तेजी से रुख करते हैं, जिससे इनकी कीमतों में उछाल देखने को मिलता है।

वैश्विक बाजारों में भी गिरावट का दबाव

एशियाई बाजारों में भी तनाव का असर साफ दिखाई दिया। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.35 प्रतिशत गिरा, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.41 प्रतिशत फिसला, हांगकांग का हैंग सेंग 0.92 प्रतिशत टूटा और ताइवान का इंडेक्स 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

केवल दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मामूली 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ सकारात्मक रुख दिखा सका। यह संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक अभी भी बेहद सतर्क स्थिति में हैं और किसी भी बड़े निवेश से बच रहे हैं।

रुपया भी दबाव में, डॉलर मजबूत

भारतीय मुद्रा पर भी इस तनाव का असर पड़ा। डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे कमजोर होकर 94.47 (अस्थायी) पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ने से रुपये पर दबाव बना रहा।

विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। हालांकि कच्चे तेल की स्थिरता और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नरमी कुछ हद तक भारतीय मुद्रा को सहारा दे रही है।

बाजार विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, अगर कूटनीतिक स्तर पर कोई सकारात्मक समाधान निकलता है तो बाजार में तेजी लौट सकती है। साथ ही, मजबूत कॉर्पोरेट आय और मिड-कैप एवं स्मॉल-कैप शेयरों में आकर्षक मूल्यांकन निवेशकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है।

निष्कर्ष

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह अब वैश्विक वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक बन चुका है। भारतीय शेयर बाजार से लेकर कमोडिटी और मुद्रा बाजार तक इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल की कीमतों पर बनी रहेगी।

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