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अमेरिका-ईरान तनाव कम होते ही शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स 736 अंक चढ़ा, निफ्टी ने भी भरी उड़ान

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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम की खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 736 अंक और निफ्टी 231 अंक की बढ़त के साथ बंद हुए। रुपये में भी मजबूती दर्ज की गई।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच संघर्ष विराम की खबर ने सोमवार को दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना दिया। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता कम होने की उम्मीद के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी निवेशकों का भरोसा लौटा और घरेलू बाजार शानदार बढ़त के साथ बंद हुआ। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ।

बाजार बंद होने के बाद बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 736.38 अंक यानी करीब 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान बाजार में खरीदारी का उत्साह इतना मजबूत रहा कि सेंसेक्स एक समय 1,293 अंक से ज्यादा उछलकर 76,821 के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं एनएसई का निफ्टी भी 231 अंक यानी लगभग 0.98 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,853.90 अंक पर बंद हुआ।

शेयर बाजार में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने की खबरों से निवेशकों को राहत मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव घटा है, जिसका फायदा भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। तेल की कीमतों में कमी भारत के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। कच्चे तेल के सस्ता होने से महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और उद्योगों की लागत में भी राहत आ सकती है।

बाजार खुलते ही दिखा तेजी का असर

दिन की शुरुआत से ही भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1000 अंकों की मजबूती के साथ खुला, जबकि निफ्टी में भी तेज बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों ने बैंकिंग, ऑटो, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर के कई प्रमुख शेयरों में खरीदारी की।

बाजार की तेजी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब पांच प्रतिशत तक चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। चीन और हांगकांग के बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला।

इन कंपनियों के शेयरों ने दिया शानदार प्रदर्शन

सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल और मारुति जैसे शेयरों ने बाजार को ऊपर उठाने में अहम भूमिका निभाई।

एविएशन सेक्टर के शेयरों में तेजी की वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को माना जा रहा है, क्योंकि विमानन कंपनियों के लिए ईंधन लागत एक बड़ा खर्च होता है। तेल कीमतों में कमी से इस सेक्टर को फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

हालांकि बाजार में सभी कंपनियां फायदे में नहीं रहीं। एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे कुछ शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

रुपये को भी मिली मजबूती

शेयर बाजार की तेजी के साथ मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये को मजबूती मिली। सोमवार के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 47 पैसे मजबूत हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार से रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की नजर बनी हुई है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार से करीब 1,082 करोड़ रुपये की निकासी की थी। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी।

वेदांता समूह की नई कंपनियों की लिस्टिंग

सोमवार को वेदांता समूह से अलग होकर बनी चार कंपनियों ने शेयर बाजार में शुरुआत की। इनमें वेदांता एल्युमीनियम मेटल, वेदांता पावर, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता आयरन एंड स्टील शामिल हैं।

कंपनी के पुनर्गठन का उद्देश्य अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र पहचान देना और संचालन को आसान बनाना है। हालांकि शुरुआती कारोबार में वेदांता पावर को छोड़कर अन्य कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।

विशेषज्ञों ने बताया बाजार का आगे का रुख

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो वैश्विक बाजारों में स्थिरता बढ़ सकती है। भारत के लिए कम तेल कीमतें आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक संकेत हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रमों, कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन और विदेशी निवेश के रुख पर रहेगी। बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

कुल मिलाकर सोमवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत लेकर आया। अमेरिका-ईरान तनाव में कमी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है।

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वैश्विक राजनीति का असर शेयर बाजार पर हमेशा दिखाई देता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाएं निवेशकों की सोच और बाजार की दिशा को तेजी से प्रभावित करती हैं।

भारत के लिए सबसे बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। तेल आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था में कीमतों की कमी से महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास को समर्थन मिल सकता है।

हालांकि बाजार में आई तेजी को स्थायी मानने से पहले निवेशकों को सावधानी बरतनी होगी। वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। मजबूत कंपनियों में निवेश और लंबी अवधि की रणनीति बाजार में बेहतर परिणाम दे सकती है।

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