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Business News: प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा दांव, नासिक से दौड़ेगी 'कांदा एक्सप्रेस'; इन शहरों में पहुंचेगा सस्ता प्याज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक बाजार में उतारने की तैयारी की है। नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी के लिए कांदा एक्सप्रेस चलाई जाएगी।

डेस्क, नई दिल्ली, 24 अगस्त। रसोई का बजट बिगाड़ रहे प्याज के दाम पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने बाजार में अपना बफर स्टॉक उतारने की तैयारी तेज कर दी है। सोमवार से प्याज की आपूर्ति बढ़ाने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए नासिक से देश के उन बड़े शहरों की ओर प्याज भेजा जाएगा, जहां इसकी कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर चल रही है।

सरकार की इस पहल में सबसे ज्यादा चर्चा 'कांदा एक्सप्रेस' की है। प्याज से लदी विशेष ट्रेनें नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी तक भेजी जाएंगी। इन शहरों में प्याज की कीमतों पर दबाव ज्यादा है, इसलिए बफर स्टॉक को सीधे इन बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है।

शनिवार को प्याज का देशव्यापी औसत खुदरा भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो पहुंच गया था। यह कीमत पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 45 प्रतिशत और पिछले महीने के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत ज्यादा बताई जा रही है।

दिल्ली में 65 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज

राजधानी दिल्ली में प्याज की कीमत ने आम उपभोक्ता की चिंता बढ़ा दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक शनिवार को दिल्ली में प्याज करीब 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा था। पिछले साल इसी अवधि में यह लगभग 35 रुपये किलो था।

चेन्नई में भी प्याज का भाव 58 रुपये किलो से ऊपर पहुंच गया। पिछले साल यहां प्याज करीब 33 रुपये किलो के आसपास था।

यानी देश के बड़े शहरों में प्याज की कीमतों में इस बार तेजी सिर्फ स्थानीय बाजार की समस्या नहीं है। कई राज्यों में खुदरा कीमत बढ़ने से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।

छोटे शहरों में भी राहत नहीं

प्याज की महंगाई का असर सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के कई छोटे शहरों में भी प्याज की कीमत 50 से 55 रुपये किलो के आसपास बताई जा रही है।

कुशीनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, बस्ती और सिद्धार्थनगर जैसे शहरों में बढ़े दामों ने घरेलू रसोई का खर्च बढ़ा दिया है।

प्याज ऐसी सब्जी है जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है। यही वजह है कि इसकी कीमत में कुछ रुपये की बढ़ोतरी भी सीधे परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करती है।

महाराष्ट्र में उत्पादन घटने की खबर

बाजार में प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे महाराष्ट्र की खरीफ फसल को भी एक वजह माना जा रहा है। महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और वहां खरीफ प्याज की पैदावार में करीब 5 से 7 प्रतिशत तक कमी की खबरें सामने आई हैं।

उत्पादन में कमी और बाजार में मांग के बीच संतुलन बिगड़ने से कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

हालांकि सरकार का कहना है कि उसके पास पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और जरूरत के मुताबिक प्याज बाजार में उतारा जाएगा।

सरकार के पास कितना प्याज है?

सरकार की ओर से प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक तैयार किया जाता है। इस वित्त वर्ष में किसान सहकारी संस्थाओं NAFED और NCCF ने करीब 1.2 लाख टन प्याज की खरीद बफर स्टॉक के लिए की है।

मई में दोनों एजेंसियों के लिए खरीद मूल्य करीब 1,270 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। बाद में खरीद को तेज करने के लिए पिछले सप्ताह इसे बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया।

इसका मकसद किसानों से अधिक मात्रा में प्याज खरीदना और बाजार में जरूरत पड़ने पर सरकारी स्टॉक उपलब्ध कराना है।

कम कीमत पर बाजार में उतरेगा प्याज

सरकार की रणनीति सिर्फ प्याज को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने की नहीं है। बफर स्टॉक से प्याज को नियंत्रित कीमतों पर बाजार में उतारने की योजना है।

अधिकारियों के मुताबिक इसकी आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जाएगी, ताकि बाजार में अचानक भारी मात्रा में स्टॉक आने से दूसरी तरह की समस्या पैदा न हो।

सरकार का मानना है कि आने वाले महीनों की मांग को पूरा करने के लिए उसके पास पर्याप्त स्टॉक है। किसानों के पास मौजूद उत्पादन को भी इसके साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

व्यापारियों की भूमिका पर भी नजर

प्याज की कीमतों में तेजी के बीच सरकार की नजर बाजार की गतिविधियों पर भी है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ कारोबारी कृत्रिम रूप से कीमत बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।

ऐसे में सरकारी स्टॉक को रणनीतिक तरीके से बाजार में उतारने का फैसला लिया गया है। सरकार चाहती है कि बफर स्टॉक का फायदा वास्तविक रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचे और बीच में अनावश्यक मुनाफाखोरी से कीमत फिर ऊपर न जाए।

पहले भी चली थी कांदा एक्सप्रेस

प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नासिक से दूसरे राज्यों तक विशेष ट्रेन के जरिए प्याज पहुंचाने का प्रयोग पहले भी किया जा चुका है।

अक्टूबर 2024 में भी सरकार ने नासिक से दिल्ली और दूसरे राज्यों के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' चलाई थी। अब एक बार फिर रेलवे के माध्यम से बड़ी मात्रा में प्याज भेजने की तैयारी की जा रही है।

रेल परिवहन का इस्तेमाल करने से बड़ी मात्रा में प्याज को एक साथ लंबी दूरी तक पहुंचाना संभव होगा। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

चार शहरों को क्यों चुना गया?

दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी उन बाजारों में शामिल हैं जहां प्याज की खुदरा कीमत राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर बनी हुई है।

नासिक से सीधे इन शहरों तक प्याज पहुंचाने का उद्देश्य वहां आपूर्ति बढ़ाना और स्थानीय बाजार में कीमतों का दबाव कम करना है।

अगर सरकारी स्टॉक की पर्याप्त मात्रा इन बाजारों में पहुंचती है तो आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में कुछ नरमी आने की उम्मीद की जा सकती है।

आम आदमी को कब मिलेगी राहत?

सरकार की पहल से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसका वास्तविक असर बाजार में प्याज की उपलब्धता और खुदरा विक्रेताओं तक पहुंचने वाली कीमत पर निर्भर करेगा।

किसान से मंडी और मंडी से खुदरा बाजार तक प्याज पहुंचने के दौरान कई स्तर होते हैं। इसलिए सरकारी बफर स्टॉक का फायदा तभी पूरी तरह दिखाई देगा जब आपूर्ति श्रृंखला में कीमतों पर निगरानी भी मजबूत रहे।

फिलहाल महंगे प्याज से परेशान परिवारों की नजर इस बात पर है कि 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए पहुंचने वाला सरकारी प्याज बाजार में कितनी जल्दी और कितने दाम पर उपलब्ध होता है।

चीनी के दाम पर भी सरकार की नजर

प्याज के साथ चीनी की कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। खाद्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

सरकार का प्रयास है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।

प्याज के मामले में बफर स्टॉक को बाजार में उतारना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

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प्याज की कीमत घटाने की चुनौती सिर्फ स्टॉक जारी करने से पूरी नहीं होगी

प्याज की कीमत बढ़ने पर सरकार के पास सबसे तत्काल विकल्प बफर स्टॉक बाजार में उतारना होता है। मौजूदा स्थिति में यही कदम उठाया गया है। लेकिन लंबे समय में प्याज की कीमत को स्थिर रखने के लिए उत्पादन, भंडारण और वितरण तीनों स्तर पर मजबूत व्यवस्था जरूरी है।

महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्य में फसल का उत्पादन घटता है तो उसका असर देश के कई हिस्सों में दिखाई देता है। यही कारण है कि प्याज जैसी रोजमर्रा की वस्तु के लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

सरकार के पास 1.2 लाख टन का बफर स्टॉक होना राहत की बात है, लेकिन इसका इस्तेमाल कितनी तेजी और पारदर्शिता से किया जाता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। यदि सरकारी प्याज बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों तक भी उचित कीमत पर पहुंचता है, तो इसका वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा।

दूसरी तरफ किसानों को भी बेहतर कीमत मिलना जरूरी है। उपभोक्ता को सस्ता प्याज देने की कोशिश में किसान को नुकसान नहीं होना चाहिए। इसलिए खरीद मूल्य, भंडारण और बाजार हस्तक्षेप के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

फिलहाल 'कांदा एक्सप्रेस' से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है। अब देखना यह है कि इससे दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी के साथ देश के दूसरे शहरों में प्याज की कीमत कितनी नीचे आती है।

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