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Bargi Dam Accident: बरगी डैम हादसे में बिहार के मजदूर बने हीरो, जान जोखिम में डालकर बचाई कई जिंदगियां

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मध्य प्रदेश के बरगी डैम क्रूज हादसे में बिहार के 10 मजदूरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचाई। राज्य सरकार ने इनकी बहादुरी पर इनाम देने की घोषणा की है।

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बीच इंसानियत और साहस की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है, जहां एक ओर हादसे ने कई परिवारों को गम में डुबो दिया, वहीं दूसरी ओर बिहार के मजदूरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में कूदकर लोगों की जान बचाने का काम किया और देखते ही देखते वे इस घटना के असली हीरो बनकर उभरे, यह घटना इस बात का उदाहरण बन गई है कि संकट की घड़ी में आम लोग भी असाधारण साहस दिखा सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, हादसे के समय बरगी डैम के आसपास पुल निर्माण का कार्य चल रहा था, जहां बिहार से आए मजदूर काम कर रहे थे, तभी अचानक एक क्रूज असंतुलित होकर पानी में डूबने लगा, यह दृश्य इतना भयावह था कि कुछ ही क्षणों में वहां अफरा-तफरी मच गई, लेकिन मौके पर मौजूद मजदूरों ने बिना समय गंवाए तुरंत कार्रवाई की और पानी में कूद पड़े, उनके पास न तो कोई लाइफ जैकेट थी और न ही कोई विशेष सुरक्षा उपकरण, फिर भी उन्होंने अपने साहस और सूझबूझ से बचाव कार्य शुरू कर दिया।

मजदूरों के एक सुपरवाइजर ने बताया कि हादसे से पहले उन्होंने क्रूज को सावधान करने की कोशिश की थी और उसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए आवाज भी लगाई थी, लेकिन चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया, जिसके कुछ ही देर बाद यह दुर्घटना हो गई, इसके बाद जो हुआ वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था, मजदूरों ने रस्सियों और उपलब्ध संसाधनों की मदद से एक-एक कर लोगों को पानी से बाहर निकालना शुरू किया और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि सरकारी बचाव दल के मौके पर पहुंचने से पहले ही इन मजदूरों ने एक दर्जन से अधिक लोगों की जान बचा ली थी, इसके साथ ही उन्होंने पानी में डूबे कुछ लोगों के शव भी बाहर निकाले, जिन्हें तुरंत एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया, इस दौरान मजदूर लगातार पानी में उतरकर जोखिम उठाते रहे और किसी की जान बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उनका यह साहसिक प्रयास स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

इस घटना में शामिल मजदूरों में पश्चिम चंपारण के बगहा क्षेत्र के कई युवक शामिल हैं, जो रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्य में काम करने गए थे, लेकिन संकट के समय उन्होंने जिस तरह से मानवता का परिचय दिया, उसने पूरे बिहार का नाम रोशन कर दिया, इनके अलावा कुछ मजदूर दरभंगा जिले से भी बताए जा रहे हैं, सभी ने मिलकर एक टीम की तरह काम किया और बिना किसी स्वार्थ के लोगों की मदद की।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने भी इन मजदूरों की बहादुरी को सराहा है, मध्य प्रदेश सरकार ने इनके साहस को देखते हुए प्रत्येक को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, साथ ही उन्हें सम्मानित करने की भी बात कही गई है, यह निर्णय इस बात का संकेत है कि समाज में ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि लोग संकट के समय आगे आकर दूसरों की मदद करें।

स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि मजदूर समय रहते आगे नहीं आते, तो हादसे में मरने वालों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी, क्योंकि शुरुआती समय में कोई संगठित बचाव दल मौके पर मौजूद नहीं था, ऐसे में इन मजदूरों ने जो भूमिका निभाई, वह बेहद महत्वपूर्ण थी और उनकी बहादुरी को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भूमिका कितनी अहम होती है, यदि उन्हें सही प्रशिक्षण और संसाधन मिल जाएं, तो वे कई जिंदगियां बचा सकते हैं, इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि बड़े जलाशयों और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

कुल मिलाकर बरगी डैम का यह हादसा जहां एक ओर दुखद रहा, वहीं दूसरी ओर बिहार के मजदूरों की बहादुरी ने उम्मीद की एक नई किरण भी दिखाई है, इन लोगों ने यह साबित कर दिया कि असली हीरो वही होते हैं जो संकट के समय बिना किसी डर के आगे बढ़कर दूसरों की जान बचाते हैं, आने वाले समय में इनकी यह कहानी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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