:
Breaking News

Karnataka News: वंदे मातरम पर डीके शिवकुमार का बड़ा बयान, सरकारी कार्यक्रमों में सिर्फ पहले दो छंद गाने की बात

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | वंदे मातरम को लेकर कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार का बड़ा बयान, सरकारी कार्यक्रमों में पहले दो छंद गाने की बात, कांग्रेस के फैसले और नए कानून को लेकर विवाद।

डेस्क, नई दिल्ली, 26 अगस्त। वंदे मातरम के गायन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी राजनीतिक बहस अब कर्नाटक तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को साफ किया कि राज्य के सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में कांग्रेस के तय रुख के मुताबिक वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में शिवकुमार ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के एक कार्यक्रम में उनकी जानकारी के बिना वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी पार्टी की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और पार्टी के फैसले के साथ खड़े हैं।

शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम के पूरे संस्करण और इसके सार्वजनिक गायन को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने पिछले सप्ताह अपने 1937 के पुराने रुख को दोहराते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में शुरुआती दो छंद गाने का फैसला किया था। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए यही वह स्वरूप है, जिसे उसके ऐतिहासिक फैसले में स्वीकार किया गया था।

कर्नाटक में पूरे गीत के गायन पर क्या बोले शिवकुमार?

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दौरान पूरा वंदे मातरम गाए जाने की जानकारी उन्हें पहले नहीं थी। उनके मुताबिक भविष्य में सरकारी कार्यक्रमों में कांग्रेस के तय रुख का पालन किया जाएगा। उनका बयान सीधे तौर पर कर्नाटक सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन के तरीके को लेकर पार्टी की मौजूदा नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

शिवकुमार ने यह भी कहा कि वह अपनी पार्टी की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और जो फैसला लिया गया है, उस पर कायम रहेंगे। इस बयान के बाद कर्नाटक उन राज्यों में शामिल हो गया है जहां वंदे मातरम के पूर्ण और संक्षिप्त संस्करण को लेकर राजनीतिक बहस ने सरकारी कार्यक्रमों तक का रूप ले लिया है।

15 अगस्त के बाद शुरू हुआ विवाद

विवाद की मौजूदा कड़ी 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ी है। उस कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम के गायन को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर सवाल उठाए। भाजपा की ओर से सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेतृत्व के कुछ नेताओं ने पूरे गीत के गायन को रोकने का संकेत दिया।

कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया। पार्टी की ओर से कहा गया कि वंदे मातरम का गायन रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रोकने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांगने को लेकर था। इस विवाद के बाद वंदे मातरम का मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर भी तेजी से उठा।

CWC ने क्यों चुना सिर्फ शुरुआती दो छंद?

कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 19 अगस्त को अपने 1937 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंद गाए जाएंगे। कांग्रेस नेताओं ने इसे स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में अपनाई गई परंपरा से जोड़ते हुए अपने फैसले का बचाव किया है।

कांग्रेस का तर्क है कि वंदे मातरम के बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं से जुड़े संदर्भ आते हैं। पार्टी के अनुसार शुरुआती दो छंदों को सार्वजनिक और राष्ट्रीय आयोजनों के लिए उपयुक्त माना गया था। दूसरी ओर भाजपा इस फैसले को राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़कर कांग्रेस की आलोचना कर रही है। यही मतभेद अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।

केंद्र के आदेश में क्या कहा गया है?

वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार ने 2026 में आधिकारिक प्रोटोकॉल भी जारी किया। गृह मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज में वंदे मातरम के आधिकारिक संस्करण को विस्तार से दर्ज किया गया है। दस्तावेज में गीत के विभिन्न छंदों को शामिल किया गया है और राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान सम्मान एवं उचित शिष्टाचार बनाए रखने की बात कही गई है।

इसके अलावा जुलाई में केंद्र की ओर से राज्यों और केंद्र सरकार के विभागों को राष्ट्रीय गीत तथा राष्ट्रगान से जुड़े प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए। जब दोनों एक ही कार्यक्रम में गाए या बजाए जाते हैं, तो वंदे मातरम को पहले और उसके बाद राष्ट्रगान को रखने का प्रोटोकॉल बताया गया है।

यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है। केंद्र का आधिकारिक संस्करण और कांग्रेस का राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए अपनाया गया दो-छंद वाला रुख एक ही बात नहीं हैं। सरकारी प्रोटोकॉल में आधिकारिक संस्करण का उल्लेख है, जबकि कांग्रेस अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों के लिए 1937 के फैसले का हवाला दे रही है।

नए कानून ने विवाद को और संवेदनशील बनाया

वंदे मातरम पर बहस के बीच संसद ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पारित किया। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई और लोकसभा ने 30 जुलाई को मंजूरी दी। बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ यह Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 बन गया। आधिकारिक सरकारी जानकारी के मुताबिक कानून ने राष्ट्रीय गीत को भी उस कानूनी सुरक्षा के दायरे में ला दिया है, जो पहले राष्ट्रीय गान के लिए लागू थी।

नए प्रावधान के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या ऐसे समूह में व्यवधान पैदा करता है जो राष्ट्रीय गीत गा रहा है, तो उसे अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

हालांकि इस कानून का मतलब यह नहीं है कि वंदे मातरम के सभी छह छंद नहीं गाने को अपने आप अपराध घोषित कर दिया गया है। कानून का केंद्र बिंदु जानबूझकर गायन रोकना या गायन कर रही सभा में व्यवधान पैदा करना है। आधिकारिक कानून के पाठ में छह छंद पूरे नहीं गाने को अलग से अपराध नहीं बताया गया है।

कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी लगातार तेज हुई है। कांग्रेस अपने फैसले को ऐतिहासिक 1937 के प्रस्ताव से जोड़ रही है, जबकि भाजपा का आरोप है कि पार्टी राष्ट्रीय गीत के सम्मान के साथ समझौता कर रही है। भाजपा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।

कांग्रेस का कहना है कि वह वंदे मातरम का सम्मान करती है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में शुरुआती दो छंद गाने की ऐतिहासिक परंपरा को जारी रखना चाहती है। पार्टी ने अपने रुख को महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अन्य स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं से जुड़े 1937 के फैसले से जोड़कर पेश किया है।

अब कर्नाटक में क्या होगा?

डीके शिवकुमार के बयान से इतना स्पष्ट है कि कर्नाटक सरकार के भविष्य के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को लेकर कांग्रेस के दो-छंद वाले रुख को प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि केंद्र के आधिकारिक प्रोटोकॉल और राज्य सरकार के कार्यक्रमों में उसके अनुपालन को लेकर आने वाले दिनों में और राजनीतिक बहस हो सकती है।

विवाद सिर्फ गीत के कितने छंद गाए जाएं, इस सवाल तक सीमित नहीं है। इसके साथ राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान, धार्मिक विविधता, ऐतिहासिक परंपरा और राजनीतिक दलों की विचारधारा जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। यही कारण है कि स्वतंत्रता दिवस के एक कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद अब संसद के कानून, केंद्र के प्रोटोकॉल और राज्यों के सरकारी कार्यक्रमों तक पहुंच गया है।

फिलहाल कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने अपनी स्थिति साफ कर दी है—सरकारी कार्यक्रमों में कांग्रेस के तय रुख के मुताबिक वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। दूसरी ओर केंद्र के प्रोटोकॉल और नए कानून ने इस मुद्दे को संवैधानिक और कानूनी बहस से भी जोड़ दिया है। आने वाले सरकारी कार्यक्रमों में इन दोनों रुखों के बीच किस तरह तालमेल बैठता है, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

यह भी पढ़ें

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस का बड़ा फैसला, कार्यक्रमों में सिर्फ पहले दो छंद गाने पर बनी सहमति

स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद वंदे मातरम पर सियासत तेज, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

चर्चा: राष्ट्रगीत पर बहस का राजनीतिक विस्तार

वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा गीत है। इसलिए इसके गायन को लेकर होने वाली बहस स्वाभाविक रूप से संवेदनशील हो जाती है। लेकिन मौजूदा विवाद में ऐतिहासिक परंपरा और मौजूदा सरकारी प्रोटोकॉल दो अलग-अलग आधारों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस अपने 1937 के फैसले के आधार पर दो छंदों की परंपरा की बात कर रही है, जबकि केंद्र ने आधिकारिक संस्करण और सरकारी कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल को अलग तरीके से परिभाषित किया है। नए कानून ने गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान डालने को दंडनीय बनाकर इस बहस में कानूनी पहलू भी जोड़ दिया है।

ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दे पर बयानबाजी के साथ तथ्यों का भी स्पष्ट अंतर रखा जाए। छह छंदों का आधिकारिक संस्करण क्या है, कांग्रेस का संगठनात्मक फैसला क्या है और कानून किस व्यवहार को दंडनीय बनाता है—इन तीनों को एक ही बात मानना सही नहीं होगा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री का ताजा बयान इसी बड़े विवाद की एक नई राजनीतिक कड़ी है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *