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प्रियंका–प्रशांत की कथित मुलाकात से बिहार की सियासत में नई सरगर्मी

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पटना/नई दिल्ली।बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा तथा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बीच कथित तौर पर हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। चर्चा है कि यह बातचीत पिछले सप्ताह दिल्ली में सोनिया गांधी के सरकारी आवास 10, जनपथ पर हुई।

यह मुलाकात ऐसे वक्त में सामने आई है, जब हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जन सुराज—दोनों को ही उम्मीदों के विपरीत करारी हार झेलनी पड़ी। माना जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि में भविष्य की राजनीति और सत्तारूढ़ भाजपा–जदयू गठबंधन के खिलाफ संभावित रणनीति पर अनौपचारिक चर्चा हुई।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से तस्वीर साफ नहीं है। प्रियंका गांधी ने सवाल पूछे जाने पर इसे निजी विषय बताकर कोई टिप्पणी नहीं की, जबकि प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेतृत्व से किसी भी तरह की मुलाकात की खबरों से साफ इनकार किया है। इसके बावजूद सियासी चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

चुनावी नतीजों ने बढ़ाई बेचैनी
बिहार चुनाव में जन सुराज ने 238 सीटों पर किस्मत आजमाई, लेकिन खाता भी नहीं खोल सका। वहीं कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए महज छह सीटों पर जीत दर्ज की। यह प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में भी कमजोर माना जा रहा है, जिसने दोनों पक्षों को आत्ममंथन के लिए मजबूर किया है।

पुराने रिश्तों की नई चर्चा
प्रशांत किशोर और कांग्रेस के बीच संबंधों का इतिहास रहा है। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उनकी रणनीति को कांग्रेस की बड़ी जीत से जोड़ा गया। लेकिन उसी साल उत्तर प्रदेश चुनाव में हार के बाद उनके कामकाज को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठे। बाद में संगठनात्मक ढांचे और निर्णय प्रक्रिया पर सार्वजनिक रूप से की गई आलोचना के चलते दोनों के रास्ते अलग हो गए।
2022 में प्रशांत किशोर ने कांग्रेस से दूरी बनाते हुए ‘जन सुराज’ की शुरुआत की थी।

आगे की राजनीति पर नजर
अब प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की कथित मुलाकात को आने वाले बड़े चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष नई राह तलाश रहा है। अगर कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच संवाद दोबारा शुरू हुआ है, तो इसके संकेत आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में दूरगामी असर डाल सकते हैं।

फिलहाल यह मुलाकात आधिकारिक पुष्टि के बिना रहस्य बनी हुई है, लेकिन बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी सरगर्मी जरूर बढ़ा गई है।

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