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पटना कार्यक्रम में महिला डॉक्टर के साथ व्यवहार पर घिरे नीतीश कुमार, देशभर में उठे सवाल

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पटना।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपने आचरण को लेकर विवाद के केंद्र में आ गए हैं। राजधानी पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपने के दौरान हुई एक घटना ने राजनीतिक से लेकर सामाजिक और धार्मिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दे दिया है।

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद एक महिला डॉक्टर, जो हिजाब में थीं, को लेकर मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने महिला के पहनावे की ओर इशारा करते हुए सवाल किया और फिर स्वयं आगे बढ़कर उनका हिजाब हटा दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान महिला डॉक्टर असहज नजर आईं, जबकि मंच पर मौजूद कुछ लोग इसे हल्के अंदाज में लेते दिखे।

विपक्ष का हमला, माफी और इस्तीफे की मांग

घटना सामने आते ही विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस समेत कई दलों ने इसे महिला सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए गंभीर मुद्दा बताया। नेताओं का कहना है कि किसी महिला के पहनावे में उसकी सहमति के बिना हस्तक्षेप करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह सत्ता के दुरुपयोग का भी उदाहरण है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी के साथ नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

जायरा वसीम की तीखी प्रतिक्रिया

इस विवाद पर अब पूर्व अभिनेत्री जायरा वसीम की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। जायरा ने लिखा कि किसी महिला की गरिमा और मर्यादा सार्वजनिक मंच पर तमाशा नहीं बननी चाहिए। एक मुस्लिम महिला के रूप में किसी दूसरी महिला के नकाब को इस तरह हटाया जाना बेहद अपमानजनक और आहत करने वाला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सत्ता किसी को भी किसी की निजता तोड़ने का अधिकार नहीं देती और मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए।

धार्मिक संगठनों में आक्रोश

मामले को लेकर धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक और देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने इस घटना को शर्मनाक और निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक महिला का नहीं, बल्कि पूरे समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा गंभीर सवाल है।

मौलाना गोरा ने कहा कि किसी भी महिला का पहनावा उसकी व्यक्तिगत पसंद और संवैधानिक अधिकार है। चाहे वह नकाब हो, बुर्का, साड़ी या कोई और वस्त्र—किसी को भी जबरन हस्तक्षेप करने का हक नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब ऐसी घटना सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति द्वारा होती है, तो इसका संदेश और भी खतरनाक हो जाता है।

प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

मौलाना कारी इसहाक गोरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार औपचारिक बयान से आगे बढ़कर संबंधित महिला और देश की महिलाओं से खुले तौर पर माफी मांगें।

बढ़ता विवाद, निगाहें सरकार के अगले कदम पर

फिलहाल यह मामला थमने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। सामाजिक संगठनों, महिला अधिकार समूहों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

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