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बिहार में शराबबंदी पर सियासी तापमान तेज: सुनील सिंह का सदन में “लाइव डिलीवरी” का दावा, माधव आनंद ने किया पलटवार

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पटना: बिहार में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है। बजट सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तल्ख़ी उस वक्त और बढ़ गई जब सुनील सिंह ने सदन परिसर में ही शराब की “लाइव डिलीवरी” कराने का दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पैसा देकर कहीं भी अवैध शराब मंगवाई जा सकती है और यह दावा वे सदन के अंतिम दिन साबित कर दिखाएंगे।
राजद नेता का आरोप है कि 2016 में लागू पूर्ण शराबबंदी के बावजूद राज्य में अवैध आपूर्ति और तस्करी का नेटवर्क फल-फूल रहा है। उनके मुताबिक सीमावर्ती राज्यों से शराब की एंट्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है, जिससे कानून का उद्देश्य कमजोर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल शराब ही नहीं, बल्कि कई सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं और सरकार जमीनी हकीकत से आंख मूंदे बैठी है।
सुनील सिंह के बयान को लेकर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। माधव आनंद ने पलटवार करते हुए कहा कि शराबबंदी कानून राज्य की सामाजिक संरचना को मजबूत करने के लिए लाया गया था और इसे विफल बताना राजनीतिक अतिशयोक्ति है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि विधानमंडल परिसर में अवैध डिलीवरी करवा पाना संभव नहीं है और इस तरह के बयान केवल सुर्खियां बटोरने के लिए दिए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शराबबंदी बिहार की राजनीति में लंबे समय से भावनात्मक और सामाजिक मुद्दा रहा है। एक ओर सरकार इसे महिलाओं और समाज के हित में उठाया गया ऐतिहासिक कदम बताती है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाकर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस छेड़ देता है। अब सबकी निगाहें बजट सत्र के अंतिम दिन पर टिकी हैं, जब यह सियासी चुनौती हकीकत की कसौटी पर परखी जाएगी।

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