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बिहार सरकार ने दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन योजना शुरू की, डिजिटल एआई और IVF तकनीक से होगा क्रांतिकारी बदलाव

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पटना: बिहार सरकार ने राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशु नस्ल सुधार को गति देने के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमेन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह पहल ‘सात निश्चय-3’ के तहत लागू की जा रही है, जिसमें डिजिटल एआई गन, डिजिटल थाविंग मशीन और आईवीएफ-ईटीटी जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में बिहार में दूध उत्पादन में बड़ी क्रांति आने वाली है। सेक्स सॉर्टेड सीमेन के माध्यम से गर्भधारण दर में सुधार होगा और अधिक दूध देने वाली गायों की नस्ल विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि अब पशु कल्याण और डेयरी गतिविधियां केवल दूध संग्रहण और विपणन तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधार के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह ने कहा कि नस्ल सुधार कार्यक्रम में भ्रमणशील पशु चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये चिकित्सक टीम लीडर के रूप में कार्य करेंगे और एआई जैसी नई तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रखंड स्तर पर कार्यकर्ताओं और कृत्रिम गर्भाधान कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
इस योजना के तहत प्रखंडस्तरीय पशुचिकित्सालयों में पदस्थ 534 भ्रमणशील पशुचिकित्सा पदाधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद ये प्रखंड के सभी पशुचिकित्सकों और कार्यकर्ताओं को कृत्रिम गर्भाधान की आधुनिक तकनीक, समिति गठन और निबंधन के लिए प्रशिक्षण देंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि इस व्यापक कार्यक्रम से न केवल दूध उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पशु नस्ल सुधार के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा और डेयरी उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

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