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बिहार की होली में रंग और मस्ती, राजनीति भी मिली जश्न के रंगों से

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बिहार समेत देश के कई हिस्सों में होली का त्योहार इस बार अपने पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। राजधानी पटना से लेकर दूर-दराज के जिलों तक हर जगह रंग, गुलाल और अबीर-गुलाल की छटा बिखरी हुई है। लोग आपस में गले मिलकर “बुरा न मानो, होली है” कहते हुए एक-दूसरे को रंगों में सराबोर कर रहे हैं। मिठाई, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक गीतों के बीच त्योहार का माहौल पूरी तरह जीवंत नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को दिल से होली की शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि होली न केवल खुशी और मस्ती का पर्व है, बल्कि यह नफरत की दीवारों को गिराकर मोहब्बत, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देता है। उनका कहना था कि यह पर्व सभी वर्गों और समुदायों के बीच एकता और समरसता को बढ़ावा देता है और हमें मिलकर प्रदेश और राष्ट्र के विकास में योगदान देना चाहिए।
इसी बीच दानापुर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मान सम्मेलन और होली मिलन समारोह ने भी राजनीतिक हलकों में होली की अलग ही रंगत दिखा दी। सूबे के कृषिमंत्री और बीजेपी नेता रामकृपाल यादव ने इस समारोह में अपनी ऊर्जा और उमंग से सभी को मोहित कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर जब भोजपुरी गानों की गूंज उठी, तो मंत्री खुद गमछा लहराते हुए मंच पर ठुमके लगाने लगे। उनकी मस्ती और नृत्य देखकर उपस्थित कार्यकर्ता भी तालियों और जयघोष के साथ उत्साह में शामिल हो गए।
कार्यक्रम में यह साफ दिखाई दिया कि नेता और कार्यकर्ता औपचारिकताओं को पीछे छोड़कर सिर्फ त्योहार के जश्न में रंगे हुए हैं। मंच पर गले मिलना, गुलाल और अबीर लगाना, और लोगों के ठहाके यह दर्शा रहे थे कि त्योहार का असली मज़ा इंसानियत और भाईचारे से जुड़ने में है। राजनीतिक बयानबाज़ी और सियासी तकरार के बावजूद, यह होली समारोह कुछ पल के लिए राजनीति की कठोरता को पीछे छोड़कर लोगों को जोड़ने में सफल रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि फागुन का यह रंग सिर्फ खुशी का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि उत्सव की ऊर्जा सामाजिक और राजनीतिक दूरी को भी पिघला सकती है। जब ढोल बजता है और गमछा लहराता है, तो मंच की दूरी और राजनीतिक मतभेद कुछ समय के लिए फीके पड़ जाते हैं। होली का यही जादू है — रंग जो दिलों को जोड़ दे और लोगों के बीच सौहार्द और प्रेम कायम करे।
इस होली समारोह ने यह भी संदेश दिया कि बिहार की राजनीति के बीच भी त्योहार की खुशी और मस्ती का महत्व है। चाहे मुख्यमंत्री का संदेश हो या कार्यकर्ता और नेताओं की झूमती नृत्य प्रस्तुति, यह पूरे माहौल को उत्साह और उमंग से भरने में सफल रहा। इस बार की होली ने साबित किया कि रंग और गुलाल सिर्फ त्योहार के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मेल-जोल का माध्यम भी बन सकते हैं।

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