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आज से शुरू हुई जनगणना 2027 की तैयारी, पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया
- Reporter 12
- 01 Apr, 2026
भारत की 16वीं और आजादी के बाद आठवीं जनगणना की प्रक्रिया शुरू। 2027 की जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल होगी, नागरिकों को स्व-गणना का भी विकल्प मिलेगा।
भारत में जनगणना 2027 की औपचारिक तैयारियां आज यानी 1 अप्रैल से शुरू हो गई हैं। यह देश की 16वीं जनगणना और आजादी के बाद की आठवीं जनगणना होगी। खास बात यह है कि इस बार यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। सरकार ने इसे अब तक का सबसे बड़ा और तकनीकी रूप से सबसे आधुनिक जनगणना अभियान बताया है। इस बार लोगों को पहली बार सेल्फ-एन्यूमरेशन, यानी खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा भी मिलेगी।
जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में भवन सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ा विस्तृत डाटा एकत्र किया जाएगा। इस बार कागजी फॉर्म की जगह मोबाइल ऐप और डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
पहले चरण में घर-घर का होगा ब्योरा
जनगणना के पहले चरण में देशभर में भवन सूचीकरण और आवास जनगणना कराई जाएगी। यह चरण अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तय कार्यक्रम के अनुसार अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान मकानों की स्थिति, घर में उपलब्ध सुविधाएं, पानी-बिजली, शौचालय, कमरों की संख्या, रसोई, संपत्तियां और अन्य घरेलू संसाधनों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।
यह चरण इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि इसके जरिए यह समझने में मदद मिलती है कि देश में लोगों की रहन-सहन, बुनियादी सुविधाओं और जीवन स्तर की मौजूदा स्थिति क्या है। यही आंकड़े आगे चलकर सरकारी योजनाओं, शहरी विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ से लोग खुद भर सकेंगे जानकारी
इस बार जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव स्व-गणना की सुविधा है। सरकार ने नागरिकों को यह विकल्प दिया है कि वे गणनाकर्मी के आने का इंतजार किए बिना, तय अवधि के दौरान ऑनलाइन पोर्टल या ऐप के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इससे लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, डेटा की शुद्धता बेहतर होगी और प्रक्रिया में लगने वाला समय भी कम होगा। स्व-गणना की सुविधा भवन सूचीकरण की अवधि शुरू होने से पहले कुछ दिनों तक उपलब्ध रहेगी, ताकि लोग पहले ही अपना डाटा दर्ज कर सकें।
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दूसरे चरण में होगी जनसंख्या की विस्तृत गणना
जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के हर व्यक्ति से जुड़ी जनसांख्यिकीय, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और पारिवारिक जानकारी एकत्र की जाएगी।
इस चरण में उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा स्तर, रोजगार, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर डेटा लिया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि इस चरण में जाति आधारित गणना भी शामिल की जाएगी, जैसा कि संबंधित स्तर पर निर्णय लिया गया है।
इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि जनसंख्या से जुड़ा यह डेटा अगले कई वर्षों तक नीति निर्माण, आरक्षण, सामाजिक योजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े फैसलों का आधार बनेगा।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
जनगणना 2027 को इस बार पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जाया गया है। सरकार ने इसके लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस बार कागज आधारित फॉर्म का इस्तेमाल नहीं होगा।
गणनाकर्मी अब सीधे स्मार्टफोन आधारित मोबाइल ऐप पर जानकारी दर्ज करेंगे। इससे डेटा एंट्री में देरी, मानवीय त्रुटि और कागजी प्रक्रिया की जटिलता काफी हद तक कम होगी। इसके अलावा, ऑनलाइन पोर्टल के जरिए नागरिक खुद भी अपनी जानकारी अपलोड कर सकेंगे।
सरकार के अनुसार, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हिंदी और अंग्रेजी समेत 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे, ताकि अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों को जानकारी भरने में आसानी हो।
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राज्यों के अनुसार अलग-अलग रहेगा शेड्यूल
भवन सूचीकरण और आवास जनगणना की तारीखें पूरे देश में एक साथ नहीं होंगी। सरकार ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग-अलग समय-सारणी तय की है।
कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई के बीच चलेगी। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर स्व-गणना की सुविधा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी।
वहीं, कुछ अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में भवन सूचीकरण और आवास जनगणना 1 मई से 30 मई के बीच कराई जाएगी। इन क्षेत्रों में स्व-गणना की अवधि 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक तय की गई है।
इस तरह चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी ताकि प्रशासनिक स्तर पर बेहतर निगरानी और संचालन सुनिश्चित हो सके।
कुछ राज्यों के लिए अलग होगी संदर्भ तिथि
जनगणना 2027 के लिए पूरे देश में संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात तय की गई है। इसका मतलब यह है कि जनसंख्या गणना के लिए यही समय आधार माना जाएगा।
हालांकि, देश के कुछ बर्फीले और कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों के लिए अलग संदर्भ तिथि रखी गई है। इनमें जम्मू-कश्मीर के कुछ गैर-सिंक्रोनस क्षेत्र, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 की आधी रात को संदर्भ तिथि माना जाएगा।
ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इन इलाकों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एक ही समय पर जनगणना कराना व्यवहारिक रूप से मुश्किल होता है।
क्यों अहम है यह जनगणना?
जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती भर नहीं होती, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और विकास संबंधी तस्वीर सामने लाने का सबसे बड़ा माध्यम है। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, किन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, किस वर्ग को किन योजनाओं की ज्यादा जरूरत है और भविष्य में किस तरह की नीतियां बनाई जानी चाहिए।
डिजिटल जनगणना के जरिए सरकार को उम्मीद है कि डेटा संग्रहण पहले की तुलना में तेज, सटीक और ज्यादा पारदर्शी होगा। इससे सरकारी योजनाओं की योजना बनाने और संसाधनों के सही वितरण में भी मदद मिलेगी।
भविष्य की नीतियों का बनेगा आधार
जनगणना 2027 से मिलने वाले आंकड़े आने वाले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, शहरीकरण, सामाजिक न्याय और बुनियादी ढांचे से जुड़ी नीतियों के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यम अपनाने से न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि डेटा के विश्लेषण और उपयोग में भी तेजी आएगी। यही वजह है कि इस जनगणना को सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत के डेटा-आधारित शासन मॉडल की बड़ी छलांग माना जा रहा है।
जनगणना 2027 इस मायने में भी खास है कि यह देश की बदलती सामाजिक और तकनीकी तस्वीर को एक साथ सामने लाएगी। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे इसका पहला चरण आगे बढ़ेगा, वैसे-वैसे सरकार की डिजिटल तैयारी, प्रशासनिक क्षमता और नागरिक भागीदारी की असली तस्वीर भी सामने आएगी।
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