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भागलपुर के देवनंदन सिंह का पार्थिव शरीर पटना पहुंचा, 20 दिन बाद परिवार को मिला शव
- Reporter 12
- 02 Apr, 2026
इराक के बसरा के पास हमले में मारे गए भागलपुर निवासी और अमेरिकी तेल टैंकर पर तैनात इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर 20 दिन बाद पटना पहुंचा। गांव में शोक का माहौल है।
20 दिन बाद घर लौटा देवनंदन सिंह का शव, परिवार में मचा कोहराम
भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड अंतर्गत रानी बामिया गांव के रहने वाले देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार को पटना एयरपोर्ट पहुंचा। विदेश में ड्यूटी के दौरान हुई उनकी मौत के बाद करीब 20 दिन बाद उनका शव भारत लाया जा सका। पटना पहुंचते ही एयरपोर्ट पर परिजनों और परिचितों के बीच गमगीन माहौल बन गया।
देवनंदन प्रसाद सिंह एक अमेरिकी तेल टैंकर पर एडिशनल चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से फ्लाइट के जरिए पटना लाया गया, जहां से उसे अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गांव रवाना किया गया।
इराक के बसरा के पास हमले में गई जान
जानकारी के अनुसार, 11 मार्च को इराक के बसरा इलाके के पास हुए हमले में देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत हो गई थी। उस समय वे एक अमेरिकी तेल टैंकर पर तैनात थे और जहाज समुद्री मार्ग से आगे की यात्रा पर था।
बताया जा रहा है कि जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात बने हुए थे। इसी बीच जहाज के आसपास हुए हमले में उनकी जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद से ही परिवार और गांव के लोग सदमे में थे।
शव आने में लगा लंबा समय
घटना के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया में कई दिन लग गए। विदेश से कागजी प्रक्रिया, औपचारिकताएं और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के कारण परिजनों को इंतजार करना पड़ा। आखिरकार करीब 20 दिनों बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर पटना पहुंच सका।
एयरपोर्ट पर शव पहुंचते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। लंबे इंतजार के बाद बेटे, भाई और अपने परिजन को ताबूत में देखकर परिवार पूरी तरह टूट गया।
पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार
पटना से पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव रानी बामिया भेज दिया गया, जहां अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। गांव में उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ जुटने की संभावना है।
स्थानीय लोगों के बीच शोक और संवेदना का माहौल है। गांव के लोग देवनंदन सिंह को मेहनती, जिम्मेदार और परिवार के सहारे के रूप में याद कर रहे हैं।
‘बैटल कजुअलिटी’ का दर्जा नहीं मिला
परिजनों और स्थानीय लोगों के बीच एक चर्चा इस बात को लेकर भी है कि देवनंदन प्रसाद सिंह को ‘बैटल कजुअलिटी’ यानी युद्धजनित शहीद का दर्जा नहीं दिया गया। इसी वजह से उन्हें पूर्ण सैन्य सम्मान या गार्ड ऑफ ऑनर जैसी औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं मिल सकी।
इस बात को लेकर कई लोगों में मायूसी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि विदेश में बेहद संवेदनशील और खतरनाक हालात में काम करते हुए जान गंवाने वाले भारतीयों के लिए सम्मान और सहायता की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत ने परिवार को भीतर तक झकझोर दिया है। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से समुद्री सेवा क्षेत्र में कार्यरत थे और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को संभाल रहे थे।
उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार पर न सिर्फ भावनात्मक, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट भी गहरा गया है। गांव के लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया है।
गांव और इलाके में शोक की लहर
देवनंदन सिंह के निधन की खबर के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है। ग्रामीणों, परिचितों और रिश्तेदारों ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेशों में काम करने वाले बिहार के कई लोग जोखिम भरे हालात में नौकरी करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद उनके परिवारों को लंबे इंतजार और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
सरकार से सहायता और सम्मान की मांग
इस घटना के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आपात स्थिति में उनके परिवारों की मदद के लिए और मजबूत तंत्र विकसित किया जाए।
साथ ही ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता, त्वरित कूटनीतिक सहयोग और सम्मानजनक अंतिम विदाई सुनिश्चित करने की मांग भी उठ रही है।
निष्कर्ष
भागलपुर के रानी बामिया गांव के बेटे देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डाल दिया है। विदेश में नौकरी के दौरान हुई इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा और उनके परिवारों की मदद के लिए और क्या किया जाना चाहिए।
उनका पार्थिव शरीर भले अब अपने गांव पहुंच गया हो, लेकिन पीछे छूट गया है एक ऐसा दर्द, जिसे परिवार और गांव शायद लंबे समय तक भूल नहीं पाएगा।
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