Breaking News
दरभंगा में 128 राजस्व कर्मचारी निलंबित, सामूहिक अवकाश से सरकारी काम बाधित करने पर डीएम का बड़ा एक्शन
बक्सर में सुकन्या योजना के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 80 महिलाओं के खातों से करोड़ों का लेनदेन
Imad Mughniyeh: The Shadow Commander Behind Hezbollah’s Global Network and Modern Asymmetric Warfare
बिहार में सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण से पहले पटना में हाई अलर्ट, ट्रैफिक व्यवस्था बदली, कई रास्ते बंद
भागलपुर में शराबबंदी पर बड़ा सवाल: उत्पाद विभाग की गाड़ी से शराब बरामद, चालक नशे में हंगामा करता रहा
Bihar Airport Expansion: Survey to Be Conducted in 4 Districts, AAI Team from Delhi to Inspect Sites
बिहार के सरकारी स्कूलों में सख्त निगरानी लागू, अधिकारियों को रोज 3 स्कूलों का निरीक्षण करना अनिवार्य
पटना में RJD अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में गरजे तेजस्वी यादव, केंद्र-राज्य सरकार पर बोला हमला
शराबबंदी पर मांझी का बड़ा बयान, बोले- पाव भर शराब वालों पर सख्ती क्यों, बड़े तस्कर कैसे बच जाते हैं?
समस्तीपुर में अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने LPG, PNG और जनकल्याण सेवाओं का लिया विस्तृत जायजा
रोहतास में मंदिर से चांदी का गदा और कीमती सामान चोरी, ग्रामीणों में उबाल—“अब भगवान भी सुरक्षित नहीं”
आस्था, अनुशासन और प्रकृति उपासना का महापर्व: चैती छठ 22 मार्च से, चार दिनों तक गूंजेगा भक्ति का स्वर
पश्चिम चंपारण में जमीन विवाद बना खून-खराबे की वजह, पिता और भाई पर हत्या का आरोप, एक की मौत, दो गंभीर
पटना में BPSC TRE-4 नोटिफिकेशन को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों का महा आंदोलन, पैदल मार्च में जताई नाराजगी
बिहार में इफ्तार डिप्लोमेसी: नीतीश कुमार और चिराग पासवान की दावतें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय
निशांत कुमार की जदयू में धमाकेदार एंट्री: जिम्मेदारी तय होने की प्रतीक्षा, पार्टी और विपक्ष में हलचल
हाजीपुर कोर्ट में सनसनी: पेशी के दौरान कैदी ने छत से पोखर में लगाई छलांग, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा
युद्ध की आंच से रसोई तक संकट: दरभंगा में गैस सिलेंडर के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, खाली हाथ लौट रहे लोग
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीतिक डेब्यू: राज्यसभा की राह और बिहार की राजनीति में नई पारी
भारत में अप्रैल से अनिवार्य: E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की नई ऑक्टेन रेटिंग, आयात पर निर्भरता घटेगी
बिहार में अब जमीन दलालों की खैर नहीं: सरकार ने हर अंचल कार्यालय में लगाए CCTV, सख्त कार्रवाई का एलान
राजद-जदयू विवाद: नीरज कुमार ने सुनील कुमार सिंह पर जमकर साधा निशाना, शराब और इलेक्ट्रॉल बांड पर घेरा
दिल्ली से लेह जा रही स्पाइसजेट की उड़ान तकनीकी खराबी के कारण वापस दिल्ली लौट आई, सभी यात्री सुरक्षित
बिहार विधानसभा में विधायक निधि बढ़ाने को लेकर हंगामा: सत्ता और विपक्ष एकजुट, सदन में देर तक नारेबाजी
बजट सत्र के 15वें दिन सदन में हंगामा: अपराध पर घिरी सरकार, जीआई टैग और छात्र योजनाओं पर भी गरमाई बहस
पीरपैंती पावर प्रोजेक्ट पर अडानी की नजर: बिहार की ऊर्जा तस्वीर बदलने वाली योजना की आज करेंगे समीक्षा
बयानबाज़ी से गरमाया बिहार—तेजस्वी यादव बनाम मैथिली ठाकुर टकराव में ‘पुराना-नया बिहार’ की बहस फिर तेज
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: AIMIM ने खुद का उम्मीदवार उतारने का किया ऐलान, पांचवीं सीट के समीकरण बदले
मुजफ्फरपुर: 16 वर्षीय छात्रा की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने थाने में आत्मसमर्पण किया, इलाके में सनसनी
फुलवारी शरीफ छात्रा मौत मामला: संदिग्ध परिस्थितियों में छात्रा की मौत, हत्या या आत्महत्या की बहस तेज
पटना: तेज प्रताप यादव का बड़ा बयान, बोले- राजनीति में साजिशें आम हैं, मेरी हत्या की साजिश भी होती रही
लोकसभा स्पीकर पर घिरा विवाद: हटाने के प्रस्ताव से गरमाया बजट सत्र, जानिए क्या है संवैधानिक प्रक्रिया
सिवान में पत्रकार पर हमला: शादी से लौटते वक्त बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग कर किया गंभीर रूप से घायल
“होली पर बिहार आने वालों के लिए रेलवे ने चलाई स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों के लिए तत्काल टिकट भी उपलब्ध
मुजफ्फरपुर में स्नातक छात्र पर बाइक सवार बदमाशों ने किया हमला, पेट में लगी गोली, पुलिस जांच में जुटी
बिहार बजट में महिला सशक्तिकरण का रोडमैप: गांव की इकाई से शहर के बाजार तक, ट्रेनिंग से सीधे रोजगार तक
मोदी सरकार में बिहार को रेलवे की नई ताकत:रेल बजट नौ गुना बढ़ा,हाईस्पीड कॉरिडोर से बदलेगी कनेक्टिविटी
बिहार में जमीन दस्तावेजों का डिजिटल युग:1908 से अब तक की रजिस्ट्री एक क्लिक पर,दफ्तरों के चक्कर खत्म
बजट 2026-27: ‘शी मार्ट’ से जीविका दीदियों को मिलेगा नया बाजार, बिहार बन सकता है महिला उद्यमिता का हब
कैथी लिपि के दस्तावेज अब नहीं बनेंगे सिरदर्द, सरकार ने तय किया रेट और उपलब्ध कराए प्रशिक्षित अनुवादक
समस्तीपुर जिले के अपर जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने गणतंत्र दिवस पर जिलेवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं
निष्ठा, सेवा और स्मृतियों से सजी विदाई: आचार्य विजयव्रत कंठ को भावभीनी सम्मान-समारोह में दी गई विदाई
समृद्धि यात्रा का सातवां पड़ाव: मुजफ्फरपुर को 850 करोड़ की विकास सौगात देंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
बिहार में भ्रष्टाचार पर दो तस्वीरें: एक अफसर पर सख्ती, दूसरे आरोपी अधिकारी को फिर फील्ड पोस्टिंग
- Reporter 12
- 02 Apr, 2026
किशनगंज के डीएसपी गौतम कुमार पर EOU की बड़ी कार्रवाई के बीच 2025 के DA केस आरोपी रहे जेल अधिकारी विधु कुमार को 2026 में फिर फील्ड पोस्टिंग मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। भ्रष्टाचार पर सरकार के रुख को लेकर बहस तेज हो गई है।
पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक तरफ सख्ती की तस्वीर दिख रही है, तो दूसरी तरफ कुछ फैसले सरकार और सिस्टम की मंशा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।
ताजा मामला किशनगंज के डीएसपी गौतम कुमार से जुड़ा है, जिनके ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की छापेमारी के बाद कथित तौर पर भारी संपत्ति सामने आने की चर्चा है। वहीं दूसरी ओर, 2025 में आय से अधिक संपत्ति (DA) केस में जांच के घेरे में आए बेउर जेल के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार को बाद में फिर फील्ड पोस्टिंग मिल जाने से प्रशासनिक फैसलों पर बहस तेज हो गई है।
इन दोनों मामलों को अब लोग बिहार में “भ्रष्टाचार पर नीति और नीयत” के पैमाने पर देख रहे हैं।
गौतम कुमार केस ने मचाई हलचल
किशनगंज में तैनात रहे डीएसपी गौतम कुमार के खिलाफ हालिया कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।
EOU की छापेमारी के बाद उनके नाम, परिवार और करीबी लोगों से जुड़ी संपत्तियों की चर्चा तेज हो गई। शुरुआती स्तर पर करीब 80 करोड़ रुपये की संपत्ति का अनुमान सामने आने की बात कही जा रही है।
हालांकि, अंतिम और आधिकारिक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन यह मामला फिलहाल बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ 2026 की सबसे चर्चित कार्रवाइयों में गिना जा रहा है।
एक साल पहले विधु कुमार पर भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
ठीक इसी तरह 2025 में बेउर आदर्श केंद्रीय कारा के तत्कालीन अधीक्षक विधु कुमार के खिलाफ भी आर्थिक अपराध इकाई ने बड़ी कार्रवाई की थी।
उनके खिलाफ 3 जनवरी 2025 को DA Case No. 1/25 दर्ज किया गया था। इसके बाद पटना, बिहटा, मोतिहारी और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
उस समय जांच एजेंसी ने दावा किया था कि उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, संदिग्ध निवेश, महंगी संपत्तियों और कई वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम सुराग मिले थे।
फिर सबसे बड़ा सवाल—फील्ड पोस्टिंग कैसे?
यही वह बिंदु है, जिस पर अब सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं।
EOU की कार्रवाई और निलंबन के बाद भी विधु कुमार को बाद में निलंबन मुक्त कर दोबारा फील्ड पोस्टिंग दिए जाने को लेकर सिस्टम की मंशा पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2026 की अधिसूचना के तहत उन्हें बेगूसराय जेल अधीक्षक के रूप में पदस्थापित किया गया।
यानी जिस अधिकारी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही थी, वह फिर एक जिम्मेदार पद पर तैनात कर दिया गया।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है—
अगर भ्रष्टाचार पर सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस है, तो फिर ऐसे मामलों में दो तरह का व्यवहार क्यों दिखता है?
विधु कुमार केस में क्या-क्या आरोप थे?
जांच के दौरान विधु कुमार पर आरोप लगे थे कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।
उन पर यह भी आरोप था कि जेल प्रशासन के भीतर प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध आर्थिक लाभ लिया गया।
जांच एजेंसी के दस्तावेजों के आधार पर उस समय यह भी कहा गया था कि संपत्तियों और निवेश के कई बिंदु परिजनों, करीबी लोगों और कथित सहयोगियों से जुड़े हो सकते हैं।
जेवर, जमीन, खातों और कंपनियों तक पहुंची थी जांच
छापेमारी के दौरान कथित रूप से महंगे जेवरात, जमीन खरीद से जुड़े कागजात, बैंक दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मिलने की बात सामने आई थी।
इसके अलावा, यह आरोप भी उभरे थे कि कथित रूप से कुछ लेन-देन को वैध दिखाने के लिए अलग-अलग नामों और संस्थाओं का सहारा लिया गया।
यही वजह थी कि मामला सिर्फ आय से अधिक संपत्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वित्तीय संरचना और पैसों के प्रवाह तक जांच पहुंची थी।
दो मामलों ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया
अब जब गौतम कुमार पर कार्रवाई के बाद सरकार सख्त दिख रही है, तब लोग यह तुलना कर रहे हैं कि
क्या हर आरोपी अधिकारी के साथ एक जैसा व्यवहार हो रहा है?
या फिर कार्रवाई और पोस्टिंग के बीच कोई ऐसा अंतर है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित नीति को कमजोर करता है?
बिहार में आम जनता का सवाल साफ है—
अगर आरोप गंभीर हैं, तो फिर जांच पूरी होने तक संवेदनशील या फील्ड पोस्टिंग क्यों?
सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर
भ्रष्टाचार के मामलों में सिर्फ छापेमारी या निलंबन ही काफी नहीं माना जाता, बल्कि असली संदेश तब जाता है जब कार्रवाई निष्पक्ष, एकसमान और अंत तक दिखे।
इसीलिए गौतम कुमार और विधु कुमार जैसे मामलों की तुलना अब केवल दो अफसरों की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता के सवाल में बदलती दिख रही है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *







