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पुराने मोबाइल बेचने से पहले हो जाएं सावधान, बिहार में डेटा चोरी का बड़ा रैकेट बेनकाब

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बिहार STF और यूपी पुलिस की कार्रवाई में पुराने मोबाइल फोन के जरिए डेटा चोरी करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि खराब मोबाइल के मदरबोर्ड से डेटा निकालकर विदेशों तक बेचा जा रहा था।

पटना आलम की खबर।पटना: पुराने या खराब हो चुके मोबाइल फोन को कबाड़ समझकर बेच देना अब सिर्फ एक मामूली घरेलू फैसला नहीं रह गया है, बल्कि यह आपकी निजता और निजी जानकारी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। बिहार पुलिस की एसटीएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो पुराने मोबाइल फोन खरीदकर उनके भीतर मौजूद डेटा को रिकवर करने और फिर उसे आगे बेचने के आरोप में जांच के दायरे में आया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह काला कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसकी कड़ियां विदेशों तक जुड़ी हुई बताई जा रही हैं। इस खुलासे ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि लोग जिन खराब या बेकार मोबाइलों को बेझिझक कबाड़ियों को बेच देते हैं, वे आगे चलकर उनकी निजी जिंदगी का सबसे बड़ा रिसाव साबित हो सकते हैं।

मामले का खुलासा तब हुआ जब 1 अप्रैल को बिहार एसटीएफ ने उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर कटिहार में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान हथिया दियरा इलाके से इस्तार आलम नामक एक कबाड़ी को हिरासत में लिया गया। उसके खिलाफ रायबरेली जिले के लालगंज थाने में पहले से एक मामला दर्ज बताया गया है, जिसमें वह वांछित था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पुराने मोबाइल फोन खरीदने और इकट्ठा करने के काम में लंबे समय से सक्रिय था। यह भी पता चला कि वह अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि इसके पीछे एक संगठित रैकेट सक्रिय था, जो अलग-अलग राज्यों से खराब मोबाइल इकट्ठा करता था।

खराब मोबाइल नहीं, डेटा का खजाना बन रहे थे पुराने फोन

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे खेल का सबसे अहम हिस्सा पुराने मोबाइल फोन का मदरबोर्ड था। सामान्य तौर पर लोग यह मान लेते हैं कि फोन खराब हो गया तो उसमें रखा डेटा भी खत्म हो गया होगा, लेकिन तकनीकी रूप से ऐसा हमेशा नहीं होता। मोबाइल बंद हो जाने, स्क्रीन टूट जाने या डिवाइस खराब होने के बावजूद उसके भीतर स्टोर डेटा को कई मामलों में फिर से निकाला जा सकता है। यही कमजोरी इस रैकेट के लिए कमाई का जरिया बन गई थी। पुलिस को संदेह है कि कबाड़ियों के जरिए खरीदे गए पुराने मोबाइलों को तोड़कर उनके मदरबोर्ड अलग किए जाते थे, और बाद में उन्हें ऐसे नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था जहां से डेटा रिकवरी की जा सकती थी।

विदेशों तक फैली साजिश, कई राज्यों से जुटाए जाते थे फोन

पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार यह धंधा केवल बिहार या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। आरोपी ने पुलिस को बताया कि इस नेटवर्क के लोग अलग-अलग शहरों में घूम-घूमकर पुराने मोबाइल खरीदते थे और बाद में उन्हें अलग चैनल से आगे भेज दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि दिल्ली, तमिलनाडु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से भी पुराने मोबाइल फोन इस नेटवर्क तक पहुंचते थे। इसके बाद मोबाइलों के उपयोगी हिस्से अलग कर मदरबोर्ड को दूसरी कड़ियों तक बेचा जाता था। पुलिस को आशंका है कि इन हिस्सों के जरिए निकाला गया डेटा विदेशों में मौजूद डेटा सेंटरों या उससे जुड़े नेटवर्क तक पहुंच रहा था।

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निजता पर बड़ा खतरा, लाखों लोगों का डेटा हो सकता है प्रभावित

जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस रैकेट के जरिए लाखों मोबाइल फोन से जुड़ा डेटा गलत हाथों में पहुंचा हो सकता है। अगर यह संदेह सही साबित होता है, तो मामला केवल कबाड़ कारोबार या तकनीकी चोरी का नहीं, बल्कि निजता, वित्तीय सुरक्षा और साइबर अपराध का गंभीर मुद्दा बन सकता है। मोबाइल फोन में आमतौर पर फोटो, वीडियो, निजी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी, संपर्क सूची, OTP, सोशल मीडिया एक्सेस, ईमेल, चैट बैकअप और कई संवेदनशील जानकारियां मौजूद रहती हैं। ऐसे में यदि इन डिवाइसों का डेटा किसी बाहरी नेटवर्क तक पहुंचा, तो उसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

लोगों के लिए बड़ी चेतावनी, मोबाइल बेचने से पहले बरतें सावधानी

इस खुलासे के बाद यह मामला आम लोगों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है। खराब या पुराने मोबाइल फोन को कबाड़ में बेचने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि उसका डेटा पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से मिटाया गया हो। सिर्फ फोन को फैक्ट्री रीसेट कर देना हर बार पर्याप्त नहीं माना जाता, खासकर तब जब डिवाइस गंभीर रूप से खराब हो और सामान्य तरीके से ऑन ही न हो रहा हो। ऐसे मामलों में लोग अक्सर बिना सोचे-समझे फोन बेच देते हैं, जो बाद में डेटा रिस्क में बदल सकता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई हैं।

जांच जारी, और खुलासे संभव

फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने इस नेटवर्क की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह रैकेट कितने बड़े पैमाने पर काम कर रहा था, किन-किन लोगों और इलाकों तक इसकी पहुंच थी, और आखिर यह डेटा किन हाथों तक पहुंच रहा था। फिलहाल इतना तय है कि पुराने मोबाइल को ‘बेकार सामान’ समझकर नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है।

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