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महिला आरक्षण पर कांग्रेस पर बरसे संजय सरावगी

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बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो काम कांग्रेस दशकों में नहीं कर सकी, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा कर देश में महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय शुरू किया।

पटना आलम की खबर।पटना: महिला आरक्षण विधेयक, जिसे अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जा रहा है, एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। इस मुद्दे पर बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। सरावगी ने कहा कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने का जो कदम वर्षों तक सिर्फ चर्चा और राजनीति तक सीमित रहा, उसे मोदी सरकार ने निर्णायक रूप देकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकार और राजनीतिक भागीदारी के नाम पर दशकों तक केवल वादे किए गए, लेकिन जमीन पर ठोस फैसला नहीं लिया गया।

संजय सरावगी ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर गंभीर इच्छाशक्ति नहीं दिखा सकी। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण का सवाल कोई नया नहीं था, लेकिन इसे लागू करने का साहस और संकल्प भाजपा नेतृत्व ने दिखाया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल मंचों से भाषण देना नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने वाली संस्थाओं में जगह देना है। सरावगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को लंबे समय तक राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन जब ठोस कदम उठाने का मौका आया, तब वह पीछे हटती रही।

‘महिलाओं को अधिकार देना लोकतंत्र की मजबूती का सवाल’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और संतुलित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। उनके मुताबिक, जब देश की आधी आबादी को राजनीतिक नेतृत्व में पर्याप्त भागीदारी मिलेगी, तभी लोकतंत्र की असली तस्वीर सामने आएगी। सरावगी ने कहा कि कांग्रेस इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को निभाने में विफल रही, जबकि भाजपा ने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखा।

उन्होंने यह भी कहा कि 2014 के बाद केंद्र की राजनीति में महिला सशक्तिकरण को लेकर सोच और नीति दोनों स्तरों पर बड़ा बदलाव आया है। सरावगी के मुताबिक, महिलाओं को केवल सामाजिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें आर्थिक, राजनीतिक और नेतृत्व क्षमता के स्तर पर भी मजबूत बनाने की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जो आने वाले समय में देश की राजनीति का स्वरूप बदल सकता है।

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‘महिला सशक्तिकरण का नया दौर शुरू’

संजय सरावगी ने दावा किया कि देश में अब महिला सशक्तिकरण का नया दौर शुरू हो चुका है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने महिलाओं को केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भागीदार के रूप में देखने की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कानून इसी सोच की मजबूत कड़ी है, जो आने वाले वर्षों में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। भाजपा नेता का कहना है कि जब नीति निर्माण में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो देश के विकास की दिशा भी और व्यापक होगी।

2029 चुनाव और महिला वोट बैंक पर भी नजर

संजय सरावगी ने इस कानून के राजनीतिक असर की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसका प्रभाव चुनावी राजनीति पर भी साफ दिखाई देगा और 2029 के आम चुनाव में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती है। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले चुनावों में खासकर उन राज्यों में बड़ा असर डाल सकता है, जहां महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाती हैं। ऐसे में यह कानून केवल संवैधानिक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुद्दा भी बन सकता है।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में महिलाओं की निर्णायक भूमिका

संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘विकसित भारत’ का सपना तब ही पूरी तरह साकार होगा, जब देश की महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में पर्याप्त स्थान मिलेगा। उनके मुताबिक, संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला भागीदारी केवल संख्या का मामला नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता और सामाजिक संतुलन का प्रतीक होगी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नीति निर्माण और शासन की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाएंगी, तब भारत की तस्वीर दुनिया के सामने और ज्यादा मजबूत, आत्मनिर्भर और संतुलित रूप में उभरेगी।

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