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मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की दूसरी किस्त जल्द, चयनित दीदियों को मिलेंगे 20 हजार रुपये

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बिहार सरकार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की दूसरी किस्त जारी करने की तैयारी में है। अप्रैल के अंतिम पखवारे तक पात्र जीविका दीदियों के खाते में 20-20 हजार रुपये भेजे जा सकते हैं। चयन और सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

पटना आलम की खबर।पटना: बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है। योजना के तहत दूसरी किस्त जारी करने की तैयारी अब तेज कर दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के अंतिम पखवारे तक पात्र और चयनित जीविका दीदियों के बैंक खातों में 20-20 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की जा सकती है। इसके लिए चयन, सत्यापन और मैपिंग की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार की कोशिश है कि पहली किस्त पाने के बाद जिन्होंने वास्तव में रोजगार या स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया है, उन्हें अगली किस्त का लाभ प्राथमिकता के आधार पर दिया जाए।

जानकारी के अनुसार, जीविका की ओर से विकसित विशेष ऐप के जरिए दूसरी किस्त के लिए लाभुकों की पहचान और चयन का काम शुरू कर दिया गया है। इस ऐप में उन महिलाओं को वरीयता देने का प्रावधान रखा गया है, जिन्होंने पहली किस्त मिलने के बाद रोजगार शुरू करने की दिशा में वास्तविक पहल की है। अब तक करीब 19 लाख जीविका दीदियों ने दूसरी किस्त के लिए आवेदन किया है, जिनमें से लगभग 2 लाख महिलाओं को ऐसी श्रेणी में चिह्नित किया गया है, जो इस चरण की पात्रता पूरी करती हैं। इन महिलाओं को दूसरी किस्त के तहत 20 हजार रुपये दिए जाएंगे, जिसके बाद उन्हें स्वयं की ओर से भी कुछ राशि जोड़कर अपना काम आगे बढ़ाना होगा।

पहली किस्त के उपयोग की हो रही मैपिंग

सरकार इस बार केवल आवेदन के आधार पर पैसा जारी नहीं करना चाहती, बल्कि यह भी देखना चाहती है कि पहली किस्त में मिली 10 हजार रुपये की राशि का उपयोग महिलाओं ने किस तरह किया। इसी उद्देश्य से अब मैपिंग और फील्ड वेरिफिकेशन का काम किया जा रहा है। जीविका के ऐप में यह दर्ज किया जा रहा है कि किन महिलाओं ने पहली किस्त मिलने के बाद कोई स्वरोजगार, छोटा व्यवसाय या आय सृजन का कार्य शुरू किया है। यही मैपिंग दूसरी किस्त जारी करने का आधार बनेगी।

सरकार की मंशा यह सुनिश्चित करने की है कि योजना का लाभ केवल राशि वितरण तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तव में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में असरदार साबित हो। इसलिए इस बार दूसरी किस्त उन्हीं महिलाओं को प्राथमिकता के साथ दिए जाने की तैयारी है, जिन्होंने योजना को कमाई और रोजगार के अवसर में बदलने की दिशा में कदम उठाया है।

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अब तक करोड़ों महिलाओं तक पहुंची योजना की पहली मदद

ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की पहली किस्त उपलब्ध कराई जा चुकी है। इस तरह राज्यभर में महिलाओं के खातों में अब तक 18,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पात्र महिलाओं को योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अब भी कई महिलाओं को राशि मिलना बाकी है।

बताया जा रहा है कि 11 लाख से अधिक शहरी महिलाओं को अब तक इस योजना की पहली राशि नहीं मिल पाई है। इसके पीछे मुख्य वजह सत्यापन प्रक्रिया का लंबित होना बताया जा रहा है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से शहरी लाभुकों का सत्यापन पूरा होने के बाद वहां भी लाभ वितरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

पांच चरणों में दो लाख रुपये देने की योजना

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया गया है। सरकार ने इसके तहत पात्र महिलाओं को कुल 2 लाख रुपये तक की सहायता देने का लक्ष्य रखा है, जो पांच किस्तों में दी जानी है। पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं। अब दूसरी किस्त में 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके बाद तीसरी किस्त 40 हजार, चौथी किस्त 80 हजार और पांचवीं किस्त 60 हजार रुपये की होगी।

इस योजना की एक खास शर्त यह भी है कि हर चरण में केवल सरकारी सहायता ही नहीं, बल्कि लाभुक महिलाओं को स्वयं भी कुछ राशि निवेश करनी होगी। यानी यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि साझेदारी आधारित स्वरोजगार मॉडल पर तैयार की गई है। हर चरण में सत्यापन और प्रगति की जांच की व्यवस्था भी तय की गई है, ताकि राशि का उपयोग वास्तव में रोजगार बढ़ाने में हो।

कौन महिलाएं हैं योजना के लिए पात्र

योजना के तहत लाभ देने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट पात्रता शर्तें तय की हैं। योजना में परिवार का अर्थ पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चों से लिया गया है। वहीं ऐसी अविवाहित वयस्क महिला, जिनके माता-पिता जीवित नहीं हैं, उन्हें भी एकल परिवार मानकर लाभ देने का प्रावधान रखा गया है।

इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी इस योजना का लाभ ले सकती हैं, लेकिन एक परिवार से केवल एक महिला को ही पात्र माना जाएगा। जो महिलाएं अभी स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी हैं, उन्हें जोड़ने से पहले कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जैसे—

आवेदिका की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच हो,

आवेदिका या उसके पति आयकरदाता न हों,

आवेदिका या उसका पति सरकारी नौकरी (नियमित या संविदा) में न हो।

महिलाओं की आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार में महिलाओं को रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बनती जा रही है। पहली किस्त के बाद अब दूसरी किस्त की तैयारी इस बात का संकेत है कि सरकार योजना को केवल घोषणा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे जमीनी रोजगार मॉडल में बदलने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। अगर तय समय पर दूसरी किस्त जारी होती है, तो लाखों महिलाओं के लिए यह उनके छोटे कारोबार, दुकान, सिलाई, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, घरेलू उद्योग या अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद साबित हो सकती है।

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