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नदवां में सजा अंतरराष्ट्रीय दंगल, विदेशी पहलवानों पर भारतीयों का दबदबा

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पटना के नदवां गांव में विवेका पहलवान की पहली पुण्यतिथि पर भव्य अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। देश-विदेश के पहलवानों ने दमखम दिखाया, जिसमें भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीत लिया।

पटना आलम की खबर।पटना: बिहार की सियासत और खेल जगत से जुड़ा एक अनोखा नजारा शनिवार को पटना जिले के नदवां गांव में देखने को मिला, जहां विवेका पहलवान की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन की अगुवाई जदयू विधायक अनंत सिंह ने की, जिन्होंने अपने पूर्व प्रतिद्वंद्वी रहे मशहूर पहलवान की याद में अखाड़े को खेल और सम्मान के बड़े मंच में बदल दिया। गांव का माहौल पूरे दिन और देर रात तक जोश, रोमांच और उत्साह से भरा रहा।

इस दंगल में सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से आए पहलवानों ने भी हिस्सा लिया। मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ताकत, तकनीक और फुर्ती का ऐसा प्रदर्शन किया कि विदेशी पहलवानों को कई बार कुछ ही मिनटों में हार का सामना करना पड़ा। दर्शकों के लिए यह आयोजन किसी मेले से कम नहीं था, जहां खेल, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला।

ईरानी पहलवान पर भारी पड़े महाराष्ट्र के शिवा

इस प्रतियोगिता का सबसे चर्चित और रोमांचक मुकाबला महाराष्ट्र के शिवा उर्फ कलुआ पहलवान और ईरान के हामिद के बीच देखने को मिला। दोनों पहलवानों ने शुरुआत से ही दमदार खेल दिखाया और अखाड़े में कुछ देर तक जबरदस्त संघर्ष चलता रहा। दर्शकों की नजरें इसी मुकाबले पर टिकी हुई थीं, क्योंकि मुकाबला भारत बनाम विदेश के रोमांच से भरा हुआ था।

आखिरकार भारतीय पहलवान शिवा ने अपने शानदार दांव-पेंच और ताकत के दम पर ईरानी खिलाड़ी को चित कर दिया। जैसे ही जीत का फैसला हुआ, अखाड़े के चारों ओर बैठे दर्शकों की तालियों और नारों से पूरा मैदान गूंज उठा। यह मुकाबला प्रतियोगिता का सबसे यादगार आकर्षण बन गया।

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जोंटी गुर्जर ने भी दिखाया दम, इरफान को दी शिकस्त

दूसरा बड़ा मुकाबला भारत के जोंटी गुर्जर और ईरान के इरफान के बीच हुआ। इस मुकाबले में भी भारतीय पहलवान ने अपनी फुर्ती और तकनीक से दर्शकों को खूब प्रभावित किया। जोंटी ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और अपने विरोधी को संभलने का ज्यादा मौका नहीं दिया।

कुछ ही समय में जोंटी गुर्जर ने ईरानी पहलवान को मात देकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस शानदार प्रदर्शन के बाद वह दर्शकों के बीच हीरो बनकर उभरे। विजेता पहलवानों को एक-एक लाख रुपये नकद इनाम और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया, जिससे खिलाड़ियों का उत्साह और भी बढ़ा।

हजारों की भीड़, देर रात तक गूंजता रहा अखाड़ा

इस भव्य दंगल को देखने के लिए पटना और आसपास के कई इलाकों से हजारों की संख्या में लोग नदवां गांव पहुंचे। ग्रामीण माहौल में इतने बड़े स्तर पर खेल आयोजन ने लोगों के बीच अलग ही उत्साह पैदा कर दिया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी पूरे जोश के साथ अखाड़े में मौजूद रहे और हर मुकाबले का भरपूर आनंद लेते नजर आए।

मुकाबले देर रात तक चलते रहे और इस दौरान पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल बना रहा। खास बात यह रही कि अनंत सिंह खुद भी पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहे और आयोजन की व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए रखी। सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और खिलाड़ियों की सुविधा को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

भोजपुरी गायक गुंजन सिंह ने बांधा समां

इस खेल आयोजन में भोजपुरी गायक गुंजन सिंह की मौजूदगी ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों के जरिए न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि खिलाड़ियों का उत्साह भी बढ़ाया। उनके मंच पर आते ही पूरे अखाड़े का माहौल और ज्यादा ऊर्जावान हो गया।

भोजपुरी संगीत और पारंपरिक कुश्ती के इस संगम ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी। दर्शकों को यह मेल-जोल काफी पसंद आया और लोगों ने खेल के साथ-साथ सांस्कृतिक रंग का भी खूब आनंद लिया। यही वजह रही कि यह आयोजन सिर्फ दंगल नहीं, बल्कि एक बड़े लोक उत्सव के रूप में भी सामने आया।

एक सप्ताह में तैयार हुआ खास अखाड़ा

इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए नदवां गांव में एक विशाल और खास अखाड़ा तैयार किया गया था। बताया जा रहा है कि इसे तैयार करने में करीब एक सप्ताह का समय लगा। अखाड़े को मजबूत, सुरक्षित और पहलवानों के लिए उपयुक्त बनाने के लिए विशेष प्रकार की लाल मिट्टी मंगाई गई।

खिलाड़ियों को चोट से बचाने के लिए मिट्टी में हल्दी और सरसों का तेल भी मिलाया गया, ताकि अखाड़ा मुलायम और सुरक्षित रहे। इसके अलावा आयोजन स्थल पर लाइटिंग, बैठक व्यवस्था और सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे देर रात तक मुकाबले सुचारू रूप से चलते रहे।

101 पहलवान, लाखों का खर्च और भारतीयों का जलवा

इस प्रतियोगिता में ईरान, जॉर्जिया और भारत के अलग-अलग राज्यों से आए कुल 101 पहलवानों ने हिस्सा लिया। दोपहर से शुरू हुए मुकाबले देर रात तक चलते रहे और दर्शकों को लगातार रोमांचक दंगल देखने को मिला। खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन और आयोजन की भव्यता को देखते हुए इस प्रतियोगिता पर लाखों रुपये खर्च किए गए।

पूरे आयोजन में सबसे खास बात यह रही कि भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन सबसे ज्यादा प्रभावशाली रहा। उन्होंने विदेशी खिलाड़ियों के सामने अपनी ताकत और तकनीक का दम दिखाकर यह साबित कर दिया कि पारंपरिक भारतीय कुश्ती आज भी अपनी पहचान और ताकत के साथ कायम है।

कुल मिलाकर, नदवां गांव में हुआ यह आयोजन सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सम्मान, परंपरा और खेल भावना का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया।

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