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बेगूसराय में पुलिस-अपराधी मुठभेड़, STF की कार्रवाई से चार दबोचे गए

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बेगूसराय के मंसूरचक थाना क्षेत्र में एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान अपराधियों से मुठभेड़ हुई। चार बदमाश गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि एक घायल अपराधी के फरार होने की सूचना है।

बेगूसराय आलम की खबर।बिहार के बेगूसराय जिले में शनिवार को पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। मंसूरचक थाना क्षेत्र के नारायण चौक, जो समस्तीपुर और बेगूसराय की सीमा के करीब स्थित है, वहां एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस को इनपुट मिला था कि कुछ कुख्यात अपराधी एक स्थानीय होटल में ठहरे हुए हैं और किसी बड़ी वारदात के बाद यहां शरण लिए हुए हैं। सूचना मिलते ही टीम ने इलाके को घेर लिया, लेकिन पुलिस की मौजूदगी का अंदेशा होते ही अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस को भी मोर्चा संभालना पड़ा और कुछ देर तक पूरा इलाका गोलियों की आवाज से दहल उठा।

इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने तेज कार्रवाई करते हुए अब तक चार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान एक बदमाश को गोली लगने की भी सूचना है, लेकिन वह घायल हालत में अंधेरे और अफरातफरी का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। इसी वजह से फिलहाल पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और इलाके की पूरी तरह कांबिंग है। घटना के बाद से नारायण चौक और उसके आसपास के इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है, ताकि कोई भी संदिग्ध भाग न सके।

पुलिस और एसटीएफ की टीम को शक है कि मुठभेड़ में शामिल अपराधी कोई सामान्य गिरोह नहीं, बल्कि बड़ी आपराधिक वारदातों में सक्रिय संगठित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से ऑपरेशन को बेहद संवेदनशील मानते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। झाड़ियों, खाली पड़े स्थानों, आसपास के मकानों और होटल परिसर की गहन तलाशी ली जा रही है। इलाके में सुरक्षा इतनी कड़ी कर दी गई है कि आम लोगों को भी घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी गई है।

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इस पूरे हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन की कमान बेगूसराय सदर डीएसपी आनंद पांडेय ने संभाल रखी है। उनके नेतृत्व में मंसूरचक, बछवाड़ा और तियाय थाना की पुलिस के साथ एसटीएफ के जवान लगातार इलाके में जमे हुए हैं। पुलिस को यह भी आशंका है कि अपराधियों के पास अत्याधुनिक हथियार हो सकते हैं, इसलिए ऑपरेशन को सामान्य गिरफ्तारी की तरह नहीं, बल्कि हाई-रिस्क टैक्टिकल एक्शन के रूप में अंजाम दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस किसी भी कीमत पर फरार बदमाशों को निकलने का मौका नहीं देना चाहती और इसी वजह से सीमावर्ती क्षेत्र में लगातार दबिश दी जा रही है।

इस मुठभेड़ को लेकर सबसे बड़ा संदेह यह जताया जा रहा है कि इसके तार दरभंगा में शुक्रवार को हुई करीब दो करोड़ रुपये की बड़ी लूट से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि होटल में छिपे अपराधी उसी गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं, जिसने हाल ही में हुई उस बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस कनेक्शन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसियां इस एंगल पर गंभीरता से काम कर रही हैं। अगर यह कड़ी सही साबित होती है, तो बेगूसराय की यह मुठभेड़ हाल के दिनों की सबसे बड़ी आपराधिक कार्रवाई में से एक मानी जा सकती है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि बिहार में पिछले कुछ समय से वांछित और सक्रिय अपराधियों की सूची बनाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है और यह मुठभेड़ भी उसी बड़े अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। राज्य में हालिया आपराधिक घटनाओं के बाद पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस और विशेष टीमों को ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में बेगूसराय की यह कार्रवाई इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि अब पुलिस छिपे हुए अपराधियों तक पहुंचकर उन्हें घेरने की नीति पर तेज़ी से काम कर रही है।

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फिलहाल, पुलिस का फोकस दो हिस्सों में बंटा हुआ है। पहला, घायल और फरार अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना, और दूसरा, गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ कर पूरे गिरोह का नेटवर्क खंगालना। माना जा रहा है कि पकड़े गए अपराधियों से पूछताछ के बाद न केवल इस मुठभेड़ की पृष्ठभूमि साफ होगी, बल्कि यह भी सामने आ सकता है कि वे बिहार के किन-किन जिलों में सक्रिय थे और किन वारदातों से उनका सीधा संबंध रहा है। इसी वजह से पुलिस फिलहाल बहुत सीमित जानकारी साझा कर रही है और पूरे ऑपरेशन को संवेदनशील मानते हुए आधिकारिक ब्रीफिंग का इंतजार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऑपरेशन पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही गिरफ्तार अपराधियों की पहचान, बरामद हथियार, इस्तेमाल किए गए वाहन, होटल में ठहरने की अवधि और संभावित आपराधिक इतिहास जैसी अहम जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी। यह भी माना जा रहा है कि यदि मौके से हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन, नकदी या अन्य संदिग्ध सामान बरामद होता है, तो इस केस की दिशा और भी बड़ी हो सकती है। पुलिस तकनीकी जांच और स्थानीय इनपुट दोनों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

इस मुठभेड़ के बाद नारायण चौक और उसके आसपास के क्षेत्र में दहशत और चर्चा दोनों का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच यह बात तेजी से फैली कि जिस होटल को सामान्य ठहराव की जगह समझा जा रहा था, वहां इतने बड़े स्तर के अपराधी छिपे हो सकते हैं। यही कारण है कि पुलिस ने एहतियातन आसपास के लोगों को अलर्ट रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने को कहा है। सीमावर्ती इलाका होने की वजह से पुलिस इस बात को लेकर भी सतर्क है कि कहीं अपराधी जिले की सीमा का फायदा उठाकर भागने की कोशिश न करें।

बेगूसराय में हुई यह मुठभेड़ सिर्फ एक स्थानीय पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि बिहार में चल रहे क्राइम कंट्रोल और टारगेटेड ऑपरेशन मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है। अगर पुलिस इस ऑपरेशन के जरिए फरार अपराधियों को भी पकड़ने में सफल रहती है और दरभंगा लूट समेत अन्य मामलों से कनेक्शन साबित हो जाता है, तो यह कार्रवाई बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी के रूप में दर्ज हो सकती है। फिलहाल, पूरे मामले पर सबकी नजर बनी हुई है और इलाके में पुलिस की मौजूदगी यह बता रही है कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि असली खुलासा आगे हो सकता है।

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