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लोको पायलट प्रमोद सहनी हत्याकांड में 30 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस खाली हाथ, क्षेत्र में आक्रोश का माहौल

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समस्तीपुर आलम की खबर। ताजपुर थाना क्षेत्र के गुनाई बसही गांव में गुरुवार 2 अप्रैल की रात हुई लोको पायलट प्रमोद कुमार सहनी की हत्या के 30 घंटे बाद भी पुलिस अभी तक किसी ठोस सुराग तक नहीं पहुँच पाई। इस निष्क्रियता के कारण पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, प्रमोद सहनी अपने ड्यूटी से लौट रहे थे। रात करीब 10 बजे, दर्जनिया पुल से आगे पेट्रोल पंप के समीप अज्ञात बदमाशों ने उन पर गोली चलाई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना क्षेत्र में बढ़ते अपराध और पुलिस की लापरवाही को उजागर करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि पिछले हत्याकांडों, जैसे कि दो महीने पहले अधिवक्ता व निजी शिक्षक गणेश सहनी की हत्या, में अपराधियों को समय पर गिरफ्तार किया गया होता, तो आज प्रमोद सहनी की जान बच सकती थी।
सूत्रों के अनुसार, प्रमोद सहनी गणेश सहनी के रिश्तेदार थे और उनके परिवार को प्रशासनिक सहायता दिलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इसी वजह से उन्हें धमकियां भी दी गई थीं।
इसके अलावा, पुलिस जांच में जमीन विवाद का एंगल भी सामने आया है। बताया गया है कि कुछ माह पहले प्रमोद सहनी ने गुनाई बसही गांव में 8 कट्ठा जमीन खरीदी थी, जिससे पास के जमीन मालिक और कुछ तथाकथित भू-माफिया नाराज थे। लेकिन ग्रामीण इस एंगल को कमजोर बताते हैं और इसे हत्या का मुख्य कारण नहीं मानते।
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर समय पर सक्रिय कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि निष्क्रियता ही अपराधियों को खुला मौका देती है।
पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुटी हुई है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी न होने के कारण परिजन और ग्रामीण असंतुष्ट हैं। इलाके में लोगों का कहना है कि प्रशासन की सतर्कता और अपराध नियंत्रण में बड़ी कमी है।
यह घटना-ताजपुर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक को उजागर करती है और कानून व्यवस्था में प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्न खड़े करती है।
संपादकीय टिप्पणी: प्रशासन और सुरक्षा की गंभीर चूक

प्रमोद कुमार सहनी की निर्मम हत्या ने ताजपुर और समस्तीपुर जिले में सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई को बेपर्दा कर दिया है। 30 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक कोई ठोस सुराग नहीं लगे हैं। यह सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा तंत्र की निष्क्रियता की चेतावनी भी है।
स्थानीय लोग और परिजन इस मामले में गहरी नाराजगी और भय महसूस कर रहे हैं। उनकी आशंका है कि अगर पिछले हत्याकांडों में पुलिस समय पर सक्रिय होती, तो शायद प्रमोद सहनी की जान बच सकती थी। प्रशासन की लापरवाही और अपराध नियंत्रण में विफलता ने अपराधियों को काम करने का अवसर दिया, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि अपराध सिर्फ अपराधियों की क्रूरता का परिणाम नहीं होता, बल्कि कभी-कभी यह प्रशासनिक निष्क्रियता का भी परिणाम होता है। यदि जांच और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी होती, तो इस तरह की निर्दय घटनाओं की पुनरावृत्ति टाली जा सकती थी।
स्थानीय लोगों और समाज के नेताओं की मांग है कि प्रशासन त्वरित और सख्त कार्रवाई करें, ताकि कानून और सुरक्षा में जनता का विश्वास बना रहे।

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