Breaking News
समस्तीपुर में अपर मुख्य सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी ने LPG, PNG और जनकल्याण सेवाओं का लिया विस्तृत जायजा
रोहतास में मंदिर से चांदी का गदा और कीमती सामान चोरी, ग्रामीणों में उबाल—“अब भगवान भी सुरक्षित नहीं”
आस्था, अनुशासन और प्रकृति उपासना का महापर्व: चैती छठ 22 मार्च से, चार दिनों तक गूंजेगा भक्ति का स्वर
पश्चिम चंपारण में जमीन विवाद बना खून-खराबे की वजह, पिता और भाई पर हत्या का आरोप, एक की मौत, दो गंभीर
पटना में BPSC TRE-4 नोटिफिकेशन को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों का महा आंदोलन, पैदल मार्च में जताई नाराजगी
बिहार में इफ्तार डिप्लोमेसी: नीतीश कुमार और चिराग पासवान की दावतें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय
निशांत कुमार की जदयू में धमाकेदार एंट्री: जिम्मेदारी तय होने की प्रतीक्षा, पार्टी और विपक्ष में हलचल
हाजीपुर कोर्ट में सनसनी: पेशी के दौरान कैदी ने छत से पोखर में लगाई छलांग, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा
युद्ध की आंच से रसोई तक संकट: दरभंगा में गैस सिलेंडर के लिए सुबह 4 बजे से लाइन, खाली हाथ लौट रहे लोग
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीतिक डेब्यू: राज्यसभा की राह और बिहार की राजनीति में नई पारी
भारत में अप्रैल से अनिवार्य: E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल की नई ऑक्टेन रेटिंग, आयात पर निर्भरता घटेगी
बिहार में अब जमीन दलालों की खैर नहीं: सरकार ने हर अंचल कार्यालय में लगाए CCTV, सख्त कार्रवाई का एलान
राजद-जदयू विवाद: नीरज कुमार ने सुनील कुमार सिंह पर जमकर साधा निशाना, शराब और इलेक्ट्रॉल बांड पर घेरा
दिल्ली से लेह जा रही स्पाइसजेट की उड़ान तकनीकी खराबी के कारण वापस दिल्ली लौट आई, सभी यात्री सुरक्षित
बिहार विधानसभा में विधायक निधि बढ़ाने को लेकर हंगामा: सत्ता और विपक्ष एकजुट, सदन में देर तक नारेबाजी
बजट सत्र के 15वें दिन सदन में हंगामा: अपराध पर घिरी सरकार, जीआई टैग और छात्र योजनाओं पर भी गरमाई बहस
पीरपैंती पावर प्रोजेक्ट पर अडानी की नजर: बिहार की ऊर्जा तस्वीर बदलने वाली योजना की आज करेंगे समीक्षा
बयानबाज़ी से गरमाया बिहार—तेजस्वी यादव बनाम मैथिली ठाकुर टकराव में ‘पुराना-नया बिहार’ की बहस फिर तेज
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: AIMIM ने खुद का उम्मीदवार उतारने का किया ऐलान, पांचवीं सीट के समीकरण बदले
मुजफ्फरपुर: 16 वर्षीय छात्रा की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने थाने में आत्मसमर्पण किया, इलाके में सनसनी
फुलवारी शरीफ छात्रा मौत मामला: संदिग्ध परिस्थितियों में छात्रा की मौत, हत्या या आत्महत्या की बहस तेज
पटना: तेज प्रताप यादव का बड़ा बयान, बोले- राजनीति में साजिशें आम हैं, मेरी हत्या की साजिश भी होती रही
लोकसभा स्पीकर पर घिरा विवाद: हटाने के प्रस्ताव से गरमाया बजट सत्र, जानिए क्या है संवैधानिक प्रक्रिया
सिवान में पत्रकार पर हमला: शादी से लौटते वक्त बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग कर किया गंभीर रूप से घायल
“होली पर बिहार आने वालों के लिए रेलवे ने चलाई स्पेशल ट्रेनें, यात्रियों के लिए तत्काल टिकट भी उपलब्ध
मुजफ्फरपुर में स्नातक छात्र पर बाइक सवार बदमाशों ने किया हमला, पेट में लगी गोली, पुलिस जांच में जुटी
बिहार बजट में महिला सशक्तिकरण का रोडमैप: गांव की इकाई से शहर के बाजार तक, ट्रेनिंग से सीधे रोजगार तक
मोदी सरकार में बिहार को रेलवे की नई ताकत:रेल बजट नौ गुना बढ़ा,हाईस्पीड कॉरिडोर से बदलेगी कनेक्टिविटी
बिहार में जमीन दस्तावेजों का डिजिटल युग:1908 से अब तक की रजिस्ट्री एक क्लिक पर,दफ्तरों के चक्कर खत्म
बजट 2026-27: ‘शी मार्ट’ से जीविका दीदियों को मिलेगा नया बाजार, बिहार बन सकता है महिला उद्यमिता का हब
कैथी लिपि के दस्तावेज अब नहीं बनेंगे सिरदर्द, सरकार ने तय किया रेट और उपलब्ध कराए प्रशिक्षित अनुवादक
समस्तीपुर जिले के अपर जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने गणतंत्र दिवस पर जिलेवासियों को दी हार्दिक शुभकामनाएं
निष्ठा, सेवा और स्मृतियों से सजी विदाई: आचार्य विजयव्रत कंठ को भावभीनी सम्मान-समारोह में दी गई विदाई
समृद्धि यात्रा का सातवां पड़ाव: मुजफ्फरपुर को 850 करोड़ की विकास सौगात देंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
कोतमा में 4 मंजिला इमारत ढही, दो की मौत; मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी NDRF
- Reporter 12
- 05 Apr, 2026
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा कस्बे में शनिवार शाम एक चार मंजिला इमारत गिरने से हड़कंप मच गया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग मलबे में दब गए। NDRF-SDRF और जिला प्रशासन की टीमें रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रहीं।
मधमध्य प्रदेश आलम की खबर:अनूपपुर/भोपाल: मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा कस्बे में शनिवार शाम हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। बस स्टैंड के पास स्थित एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही पलों में पूरा इलाका धूल और मलबे के गुबार से ढक गया। इस हादसे में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। रातभर चले राहत और बचाव अभियान के बाद रविवार सुबह भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग फंसे हो सकते हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह घटना शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे हुई। अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते बहुमंजिला इमारत नीचे आ गई। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले धूल का घना गुबार पूरे क्षेत्र में फैल गया। हादसे के वक्त बस स्टैंड के आसपास सामान्य चहल-पहल थी, यात्री मौजूद थे और पास ही एक भूखंड पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। यही वजह रही कि इमारत गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू किया और मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश की। बाद में पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे और बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, अब तक पांच लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है, जिनमें से कुछ को गंभीर हालत में अस्पताल भेजा गया। तीन लोगों का इलाज जारी बताया जा रहा है। बचाव टीमों का फोकस इस बात पर है कि कहीं मलबे के अंदर और लोग फंसे न रह गए हों।
यह भी पढ़ें:
दिल्ली में बुजुर्ग पेंशन पर बड़ा सर्वे, तीन बार घर पर नहीं मिले तो अटक सकती है पेंशन
जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF और SDRF की संयुक्त टीमों ने मौके पर पहुंचकर पूरे इलाके को घेर लिया और व्यवस्थित तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। भारी मलबे को हटाने के लिए मशीनों की मदद ली जा रही है, जबकि संवेदनशील हिस्सों में हाथों और छोटे उपकरणों से भी खोजबीन की जा रही है ताकि किसी दबे हुए व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। रातभर सर्चलाइट और मशीनों की मदद से अभियान चलाया गया और रविवार सुबह भी टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी रहीं।
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। बस स्टैंड के आसपास मौजूद दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत गिरते ही लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। कई लोगों ने पहले इसे विस्फोट समझा, क्योंकि गिरते समय बहुत तेज आवाज हुई थी। चूंकि हादसा भीड़भाड़ वाले इलाके के पास हुआ, इसलिए लोगों में दहशत और चिंता दोनों बढ़ गईं। स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास की आवाजाही सीमित की और इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया, ताकि बचाव अभियान में कोई बाधा न आए।
इस हादसे पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद घटना बताते हुए अधिकारियों को तुरंत राहत, बचाव और घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ स्थिति पर नजर रखे और यह सुनिश्चित करे कि मलबे में फंसे हर व्यक्ति तक जल्द से जल्द मदद पहुंच सके। सरकार की ओर से भी लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में ढही यह इमारत करीब दस साल पुरानी बताई जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर जो बातें सामने आई हैं, उनमें इमारत के आसपास चल रहा निर्माण कार्य भी संदेह के घेरे में है। आशंका जताई जा रही है कि पास में चल रहे निर्माण या खुदाई कार्य का असर इमारत की नींव या संरचनात्मक स्थिरता पर पड़ा हो सकता है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हादसे के सही कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा।
यही बिंदु अब इस पूरी घटना की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यदि आसपास का निर्माण कार्य वास्तव में हादसे की वजह बना है, तो यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही का मामला भी हो सकता है। ऐसे मामलों में यह देखा जाता है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था, क्या इंजीनियरिंग स्तर पर जोखिम का आकलन किया गया था, और क्या आसपास की इमारतों की मजबूती का परीक्षण किया गया था। अगर इन मानकों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।
स्थानीय प्रशासन अब सिर्फ राहत कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की अन्य इमारतों की सुरक्षा पर भी नजर डाल रहा है। हादसे के बाद यह सवाल तेज हो गया है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में बनी पुरानी बहुमंजिला इमारतों की नियमित जांच क्यों नहीं होती। खासकर उन स्थानों पर जहां आसपास निर्माण या खुदाई का काम चल रहा हो, वहां अतिरिक्त निगरानी और तकनीकी मूल्यांकन की जरूरत होती है। कोतमा की यह घटना इसी बड़ी लापरवाही की ओर संकेत करती दिखाई दे रही है।
ऐसे हादसे अक्सर यह याद दिलाते हैं कि शहरी और कस्बाई इलाकों में तेजी से हो रहे निर्माण के बीच सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। इमारतें सिर्फ ईंट, सीमेंट और लोहे की संरचना नहीं होतीं, बल्कि उनके भीतर कई परिवारों, कारोबारों और रोजमर्रा की जिंदगी का भरोसा जुड़ा होता है। जब कोई इमारत अचानक ढहती है, तो उसके नीचे सिर्फ मलबा नहीं दबता, बल्कि कई घरों की उम्मीदें, मेहनत और सुरक्षा की भावना भी चकनाचूर हो जाती है।
इस हादसे ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन को भवन निर्माण, पुरानी इमारतों की निगरानी और अवैध या जोखिम भरे निर्माण कार्यों पर कितनी गंभीरता से काम करना चाहिए। अगर समय रहते ऐसी इमारतों की तकनीकी जांच होती, तो संभव है कि इस तरह की त्रासदी को टाला जा सकता था। अब जांच एजेंसियों और प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि वे सिर्फ कारणों का पता ही न लगाएं, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम भी उठाएं।
फिलहाल कोतमा की पूरी निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं। हर बीतते घंटे के साथ मलबे के नीचे फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की उम्मीद और चिंता दोनों बनी हुई हैं। राहत दलों की कोशिश है कि किसी भी संभावित जीवित व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचा जाए। वहीं प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का इलाज, मृतकों की पहचान और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना है।
कुल मिलाकर, कोतमा में चार मंजिला इमारत गिरने की यह घटना सिर्फ एक स्थानीय हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा, निर्माण मानकों और प्रशासनिक सतर्कता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। दो लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के बाद यह हादसा पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी की तरह है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि रेस्क्यू ऑपरेशन कब तक पूरा होता है, कितने लोग सुरक्षित बाहर निकलते हैं और आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे असली वजह क्या थी।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *







