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बिहार की सियासत में फिर हलचल, भाई वीरेंद्र के बयान से बढ़ी अटकलें
- Reporter 12
- 05 Apr, 2026
बिहार की राजनीति में फिर से संभावित उलटफेर की चर्चाओं के बीच राजद नेता भाई वीरेंद्र के बयान ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। उन्होंने नीतीश कुमार, जदयू, बीजेपी और शराबबंदी जैसे मुद्दों पर तीखा हमला बोला है।
बेगूसराय आलम की खबर:बेगूसराय: बिहार की राजनीति में जब भी स्थिरता दिखने लगती है, तभी कोई न कोई बयान ऐसा आ जाता है जो पूरे सियासी समीकरण को फिर से चर्चा के केंद्र में ला देता है। इस बार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र ने ऐसा बयान दिया है, जिसने बिहार में संभावित राजनीतिक फेरबदल की अटकलों को नई हवा दे दी है। महागठबंधन और जदयू के बीच संभावित समीकरणों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उन्होंने इशारों-इशारों में ऐसा बहुत कुछ कह दिया, जिससे सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में हलचल बढ़ गई है।
बेगूसराय दौरे पर पहुंचे भाई वीरेंद्र ने साफ कहा कि बिहार की राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि वे पहले भी कई बार अपना राजनीतिक रुख बदल चुके हैं, इसलिए अगर भविष्य में फिर कोई नया मोड़ आता है तो उसे चौंकाने वाला नहीं माना जाना चाहिए। उनके इस बयान को सीधे तौर पर महागठबंधन के साथ किसी संभावित नई राजनीतिक समझ की ओर इशारा माना जा रहा है, हालांकि उन्होंने अंतिम निर्णय को शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ने की बात भी कही।
भाई वीरेंद्र का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार की राजनीति में गठबंधन, नेतृत्व और भविष्य के सत्ता समीकरणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं पहले से चल रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आने वाले समय में क्या वर्तमान गठबंधन अपनी मौजूदा स्थिति में बना रहेगा या फिर बिहार की राजनीति एक बार फिर किसी बड़े मोड़ की ओर बढ़ रही है। राजद नेता के ताजा बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की राजनीतिक स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की। भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि बिहार की राजनीति में जदयू की पकड़ पहले जैसी नहीं रही और आने वाले समय में उसकी राजनीतिक जमीन और कमजोर हो सकती है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सत्ता समीकरण बदले, तो जदयू के भीतर भगदड़ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। उनके बयान में यह संकेत भी था कि बिहार की राजनीति में नेतृत्व और दलों की स्थिति तेजी से बदल सकती है।
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राजद नेता ने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ बराबरी का व्यवहार करने के बजाय उन्हें धीरे-धीरे कमजोर करने की राजनीति करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की रणनीति हमेशा अपने सहयोगियों की राजनीतिक जमीन पर कब्जा मजबूत करने की रही है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में बीजेपी की जड़ें जितनी मजबूत हुई हैं, उसमें नीतीश कुमार की भी बड़ी भूमिका रही है। उनके मुताबिक, यह वही राजनीतिक गलती है जिसका असर अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि खुद को समाजवादी राजनीति का प्रतिनिधि बताने वाले नेताओं को ऐसी ताकतों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, जिन पर समाज में विभाजन और नफरत की राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं। भाई वीरेंद्र ने इशारों में कहा कि अगर वैचारिक राजनीति की बात की जाए तो वर्तमान सत्ता समीकरण में कई विरोधाभास साफ दिखाई देते हैं। यही वजह है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में विचारधारा और सत्ता, दोनों को लेकर नई बहसें तेज हो सकती हैं।
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर पूछे गए सवाल पर भी भाई वीरेंद्र ने तंज भरे अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य का नेतृत्व कौन करेगा, यह आने वाला समय और राजनीतिक परिस्थितियां तय करेंगी, लेकिन यह साफ है कि बिहार की राजनीति में नेतृत्व को लेकर अभी बहुत कुछ तय होना बाकी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर वर्तमान व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उसका असर सिर्फ सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राजनीतिक ढांचे पर पड़ेगा।
राजद नेता ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को लेकर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे हैं जिनकी राजनीति केवल बयानबाजी, ध्रुवीकरण और टकराव पैदा करने पर टिकी है। बिना सीधे नाम लिए उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को सत्ता और कैबिनेट में बनाए रखना लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करता है। बाद में उन्होंने स्पष्ट रूप से गिरिराज सिंह का नाम लेते हुए कहा कि उनकी राजनीति लगातार लालू परिवार और विपक्ष के इर्द-गिर्द घूमती रहती है।
भाई वीरेंद्र ने कहा कि बीजेपी के कई नेताओं की राजनीति विपक्ष, खासकर लालू प्रसाद यादव के परिवार का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ती। उनके मुताबिक, विपक्ष पर हमले और परिवार केंद्रित बयानबाजी बीजेपी की स्थायी रणनीति का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेताओं के पास अपनी कोई ठोस राजनीतिक दिशा या विकास का विजन नहीं है, इसलिए वे लगातार उकसावे वाले बयान देकर चर्चा में बने रहना चाहते हैं।
तेजस्वी यादव के केरल में चुनाव प्रचार को लेकर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भी भाई वीरेंद्र ने बीजेपी को घेरा। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाने वाली बीजेपी खुद मुद्दों की राजनीति से दूर भागती रही है। उनके मुताबिक, बिहार की जनता अब सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि ठोस जवाबदेही और नीतिगत स्पष्टता चाहती है।
राजद नेता ने बिहार की शराबबंदी नीति को लेकर भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कागजों पर शराबबंदी लागू होने का दावा जरूर किया जाता है, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग है। उनके अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम जारी है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और आम परिवारों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी नीति का उद्देश्य समाज सुधार है, तो उसकी ईमानदार समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।
भाई वीरेंद्र ने जहरीली शराब से हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शराबबंदी की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सख्ती का असर ज्यादातर गरीबों पर दिखाई देता है, जबकि बड़े स्तर पर अवैध कारोबार करने वाले लोग प्रभाव और संरक्षण के दम पर बच निकलते हैं। उनके मुताबिक, यदि सरकार वास्तव में इस समस्या को खत्म करना चाहती है तो सिर्फ छोटे लोगों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क पर चोट करनी होगी।
उन्होंने सीमा क्षेत्रों और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि बिहार में बाहर से शराब की खेप लगातार पहुंच रही है, तो इसके लिए सिर्फ उपभोक्ता जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। उन्होंने प्रशासनिक निगरानी, सीमा नियंत्रण और राजनीतिक संरक्षण जैसे पहलुओं की समीक्षा की मांग भी की।
कुल मिलाकर, भाई वीरेंद्र का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की वर्तमान सियासत पर विपक्ष का आक्रामक संदेश माना जा रहा है। उनके शब्दों में जहां सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं की झलक दिखी, वहीं बीजेपी, जदयू, मुख्यमंत्री पद, शराबबंदी और विपक्ष की राजनीति जैसे कई बड़े मुद्दे एक साथ उभरकर सामने आए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह बयान महज राजनीतिक शोर साबित होता है या आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति सचमुच किसी नए मोड़ की ओर बढ़ती है।
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