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पिता की हत्या के 11 साल बाद बेटा भी बदमाशों की गोली का शिकार

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बेगूसराय में पिता की हत्या के 11 साल बाद बदमाशों ने उसके बेटे को भी निशाना बनाया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, पुलिस जांच में जुटी, अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी।

बेगूसराय/आलम कीखबर:

बेगूसराय के परिहारा थाना क्षेत्र में एक बार फिर हिंसा ने परिवार और समाज को हिलाकर रख दिया है। जिस जगह 2015 में राजेंद्र सहनी की निर्मम हत्या हुई थी, वहीं अब 11 साल बाद उनके बेटे बिरजू कुमार साहनी (26 वर्ष) को अपराधियों ने घेर लिया और गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। घटना ने इलाके में सन्नाटा और भय का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं परिजनों और ग्रामीणों में गुस्सा और आक्रोश भी बढ़ गया है।

घटना का पूरा क्रम

सूत्रों के मुताबिक, रविवार शाम लगभग 6:30 बजे बिरजू कुमार अपने भांजे के साथ घर से खाना खाने के बाद मोईन बांध की ओर टहलने के लिए निकले थे। परिजनों ने बताया कि जैसे ही वे घर से बाहर निकले, कुछ देर बाद एक युवक उनके पास आया और सूचना दी कि 8–10 बदमाश बिरजू को जबरन अगवा कर ले गए हैं। इस खबर के साथ ही परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए।

रास्ते में उन्हें खून के धब्बे दिखाई दिए। इन निशानों का पीछा करते हुए वे मोईन बांध किनारे पहुंचे और वहां बिरजू का शव पड़ा हुआ मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू की। यह घटना इलाके में एक बार फिर भय और असुरक्षा की स्थिति पैदा कर गई है।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

बखरी के एसडीपीओ कुंदन कुमार ने मौके पर पहुंचकर बताया कि शाम में उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ लोगों के बीच झगड़ा हुआ है। जांच में पता चला कि अपराधियों ने बिरजू को मोईन के नीचे ले जाकर मारपीट की और संघर्ष के दौरान गोली चला दी। शव पर गोली लगने का निशान स्पष्ट रूप से देखा गया। पुलिस अब अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी में जुटी है।

एसडीपीओ ने यह भी कहा कि प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिले हैं कि यह हत्या किसी पुरानी रंजिश या स्थान से संबंधित विवाद का परिणाम हो सकती है। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है ताकि इलाके में भय का माहौल खत्म किया जा सके।

पिछले हत्याकांड का कनेक्शन

मृतक बिरजू कुमार के पिता, स्वर्गीय राजेंद्र सहनी की हत्या वर्ष 2015 में उसी मोईन बांध किनारे हुई थी। उस हत्या में भी अपराधी उसी स्थान को निशाना बना चुके थे। बिरजू कुमार ने पिता की हत्या के मामले में स्वयं थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस हत्या में शामिल एक बदमाश अभी भी फरार बताया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब की हत्या का लक्ष्य शायद पुराने व प्रतिशोध की वजह से बनाया गया।

परिवार और गांववालों की प्रतिक्रिया

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बिरजू की पत्नी और बच्चे इस दर्दनाक घटना से पूरी तरह टूट गए हैं। गांव के लोग भी शोक और आक्रोश में हैं। स्थानीय समाजसेवक और पंचायत प्रतिनिधियों ने घटना की निंदा की और पुलिस से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की अपील की।

बिरजू कुमार पेशे से मार्बल मिस्त्री थे और लगभग डेढ़ माह पहले ही बेंगलुरु से अपने गांव आए थे। उनकी शादी सिर्फ एक साल पहले हुई थी। परिवार अब न केवल अपने एक सदस्य की हत्या का शोक मना रहा है बल्कि यह डर भी है कि अपराधियों का यह जाल और भी लोगों तक फैल सकता है।

इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

घटना के बाद पूरे परिहारा थाना क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आसपास के इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। स्थानीय पुलिस और एसडीपीओ ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

सामाजिक और अपराधिक प्रभाव

बेगूसराय की यह घटना यह दर्शाती है कि अपराधियों के मनोबल में वृद्धि हुई है। पिता की हत्या के बाद बेटा भी हत्या का शिकार हो गया, यह बात समाज में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसे मामलों में न्याय और सुरक्षा नहीं मिले तो अपराधियों में अराजकता और प्रतिशोध की प्रवृत्ति बढ़ती है।

पुलिस की जांच की गहराई

पुलिस अब अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और उनके नेटवर्क की जांच में जुटी है। एसडीपीओ ने बताया कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल कॉल और अन्य तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हत्या के पीछे न केवल व्यक्तिगत दुश्मनी बल्कि संगठित अपराध का भी हाथ हो सकता है। यह घटना बिहार में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाती है।

निष्कर्ष

बेगूसराय की यह दर्दनाक घटना स्पष्ट करती है कि पुराने विवाद और लंबित मामलों का प्रभाव वर्तमान में भी समाज और परिवारों को प्रभावित कर रहा है। अपराधियों की निडरता और समाज में भय का माहौल कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।

परिजनों, समाज और प्रशासन की मिली-जुली कार्रवाई के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए राज्य और स्थानीय प्रशासन क्या ठोस कदम उठा पाएंगे।

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