:
Breaking News

सुन्दरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर, सैनिक स्कूल बटहा में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का भव्य उद्घाटन, शिक्षा और संस्कार पर जोर

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

समस्तीपुर/आलम की खबर: सुन्दरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर, सैनिक स्कूल बटहा में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा के महत्व, संस्कार और छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष बिनोद कुमार ने कहा कि “शिक्षा में संस्कार का समावेश विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को निखारता है और उनकी बहुमुखी प्रतिभा के विकास में सहायक होता है।” उनके अनुसार, केवल ज्ञान अर्जित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान के साथ नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी अत्यंत आवश्यक है।
समारोह में विद्यालय के कोषाध्यक्ष अशोक कुमार सिंह ने यह कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों के साथ करना छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों को यह संदेश दिया कि बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन देने और उन्हें नैतिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
प्रधानाचार्य रामचंद्र मंडल ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें अपने भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अपनी जिज्ञासा, अनुशासन और परिश्रम से ही विद्यार्थी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर वे अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास करें।
इस अवसर पर बेगूसराय के विभागीय निरीक्षक विनोद कुमार ने भी छात्रों को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाना चाहिए और हर दिन कुछ नया सीखने का संकल्प लेना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि जीवन में नैतिक मूल्यों और व्यक्तिगत जिम्मेदारी का विकास भी है।
समारोह में विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहल को भी शामिल किया गया। पूर्व वरिष्ठ आचार्य विजय व्रत कंठ के काव्य पाठ “बटहा में पढ़नेवालों की चमक उठी तकदीर, नामांकन करवाने हेतु उमड़ पड़ी है भीड़” ने कार्यक्रम के वातावरण को जीवंत बना दिया। इस काव्य पाठ ने छात्रों और अभिभावकों दोनों को भावविभोर कर दिया और विद्यालय की शिक्षा एवं संस्कृति के महत्व को उजागर किया।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन वंदना, हवन पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ। इस दौरान पूरे कार्यक्रम का संचालन मनोज कुमार ने कुशलतापूर्वक किया। समारोह में विद्यालय के छात्रावास प्रमुख आचार्य घनश्याम मिश्र, शैक्षिक प्रमुख मनोज कुमार राय, मीडिया प्रमुख धीरज कुमार, संगीताचार्य अमरेश झा, विकास कुमार, एनसीसी प्रमुख अशोक कुमार, सुमित कुमार, मनीष ठाकुर, अनीश कुमार, राम कुमार सिंह, रामशंकर झा, राम बाबू दास, मंजीत कुमार, रविन्द्र ठाकुर, शेष नारायण सिंह, शत्रुघ्न कुमार सिंह, संजय कुमार, दुर्गा कुमार राय, राम बाबू कुमार, प्रसेनजीत घोष, अर्चना कुमारी, प्रीति कुमारी, प्रतिभा कुमारी, सुष्मिता सिंह, अंजू कुमारी, पिंकी कुमारी, रीना शर्मा, पूनम कुमारी, नैन्सी कुमारी, कोमल कुमारी और स्मिता कुमारी उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में अभिभावकों की भी बड़ी संख्या मौजूद रही। उन्होंने विद्यालय द्वारा आयोजित सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों के शैक्षणिक और नैतिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। अभिभावकों का मानना था कि विद्यालय का यह प्रयास न केवल बच्चों को शिक्षित बनाता है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक और संस्कारी व्यक्ति भी बनाता है।
विद्यालय की इस पहल ने यह भी दिखाया कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती। छात्रों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने और व्यक्तिगत क्षमता को पहचानने के लिए अवसर प्रदान करना आवश्यक है। इस समारोह में छात्रों के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक कौशल को उभारने की दिशा में कई गतिविधियों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। गायन, नृत्य, नाट्य और वाद-विवाद जैसी गतिविधियों ने बच्चों की बहुमुखी प्रतिभा को सामने लाने में मदद की। इसके साथ ही, विद्यार्थियों ने अपने शिक्षक और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षणिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास के लिए जरूरी हैं। इससे वे अनुशासन, समय प्रबंधन और सामाजिक कौशल में सुधार कर पाते हैं। साथ ही, यह विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और टीम वर्क की भावना को भी विकसित करता है।
सत्रारंभ समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुन्दरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर, सैनिक स्कूल बटहा न केवल शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह बच्चों के नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास पर भी समान ध्यान देता है। यह विद्यालय छात्रों को एक पूर्ण और संतुलित शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उन्हें भविष्य में चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाए।
अंततः यह आयोजन न केवल एक पारंपरिक सत्रारंभ समारोह था, बल्कि यह छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच सहयोग और सामंजस्य का प्रतीक भी बन गया। इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह, संस्कारों के महत्व और समाज में जिम्मेदारी का भाव पैदा करने में सहायक होते हैं।
इस पूरे कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और रचनात्मक क्षमता का विकास भी है। इस दृष्टि से सुन्दरी देवी सरस्वती विद्या मंदिर, सैनिक स्कूल बटहा अपने छात्रों को एक उज्ज्वल और सफल भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *