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समस्तीपुर में मुकेश सहनी का बड़ा बयान, हत्या पीड़ित परिवार से मिल पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
- Reporter 12
- 08 Apr, 2026
ताजपुर पहुंचे VIP चीफ मुकेश सहनी, बोले- हत्यारों की गिरफ्तारी तक न्याय की लड़ाई जारी रहेगी
समस्तीपुर/आलम की खबर:बिहार की सियासत और कानून-व्यवस्था को लेकर समस्तीपुर से एक अहम राजनीतिक तस्वीर सामने आई है, जहां विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी हत्या पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। ताजपुर थाना क्षेत्र के गुनाई बसही गांव में पहुंचकर उन्होंने दिवंगत प्रमोद कापर के परिजनों से मुलाकात की, उन्हें ढांढस बंधाया और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान उनका दौरा सिर्फ शोक-संवेदना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल खड़े किए।
गांव में पहुंचने के बाद मुकेश सहनी ने पीड़ित परिवार के साथ कुछ समय बिताया और घटना को लेकर पूरी जानकारी ली। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि न्याय और कानून के भरोसे की लड़ाई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक प्रमोद कापर की हत्या के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक उनकी पार्टी और वे स्वयं इस मामले को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
हत्या पीड़ित परिवार को दिया न्याय का भरोसा
गुनाई बसही गांव में पहुंचे मुकेश सहनी ने सबसे पहले मृतक प्रमोद कापर के परिजनों से मुलाकात की और घटना को लेकर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने सदस्य को इस तरह खो देना सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में वे उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
सहनी ने कहा कि यह जरूरी है कि पुलिस मामले की जांच निष्पक्ष और तेज गति से करे, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है, क्योंकि जनता का भरोसा तभी कायम रह सकता है जब अपराध के बाद त्वरित और ठोस कार्रवाई दिखाई दे।
मीडिया से बातचीत में पुलिस पर साधा निशाना
पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुकेश सहनी ने समस्तीपुर और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हत्या जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार, अपराधियों का मनोबल तभी बढ़ता है जब कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सख्ती कमजोर पड़ती है।
उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि इलाके में बढ़ते अपराधों के पीछे पुलिस प्रशासन की शिथिलता एक बड़ी वजह है। उनका आरोप था कि पुलिस का भय कम होने से असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़े हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने कानून-व्यवस्था के मुद्दे को सीधे राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़ दिया।
‘पुलिस का डर खत्म हो गया’
मुकेश सहनी ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब अपराधियों के बीच पुलिस का डर पहले जैसा नहीं रह गया है। उनका कहना था कि जब अपराधियों को यह भरोसा हो जाए कि कार्रवाई कमजोर होगी या देर से होगी, तो अपराध की घटनाएं बढ़ना स्वाभाविक हो जाता है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में यह संदेश दिया कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं संभली, तो जनता का भरोसा और कमजोर हो सकता है।
उनके इस बयान को स्थानीय स्तर पर गंभीर राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि यह केवल एक हत्या की घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष और क्षेत्रीय दलों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों का विस्तार भी है।
शराब बिक्री को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
मुकेश सहनी ने पुलिस प्रशासन पर और भी तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में कई पुलिसकर्मी अपनी मूल जिम्मेदारी निभाने के बजाय दूसरे कामों में ज्यादा सक्रिय दिखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने से हटकर गलत गतिविधियों पर नियंत्रण के बजाय उन्हें बढ़ावा देने जैसी स्थिति तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की ऊर्जा अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने में लगे, तो ऐसे मामलों में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। हालांकि यह बयान बेहद गंभीर प्रकृति का है, इसलिए आने वाले समय में इस पर प्रशासनिक या राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है। लेकिन इतना तय है कि मुकेश सहनी ने इस दौरे को पूरी तरह एक राजनीतिक संदेश में बदल दिया।
‘दोषी बचें नहीं, निर्दोष फंसें नहीं’
पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि प्रमोद कापर हत्याकांड की जांच पूरी गंभीरता और निष्पक्षता से की जाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि वास्तविक दोषियों की पहचान हो और उन्हें कानून के तहत सख्त सजा मिले। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जांच के नाम पर किसी निर्दोष को फंसाना भी न्याय के खिलाफ होगा।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ऐसे संवेदनशील मामलों में अक्सर राजनीतिक दबाव, जनाक्रोश और प्रशासनिक जल्दबाजी के बीच जांच की दिशा प्रभावित होने की आशंका रहती है। सहनी ने खुद को पीड़ित परिवार के साथ खड़ा दिखाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि वे सिर्फ गिरफ्तारी की मांग नहीं कर रहे, बल्कि निष्पक्ष न्याय की मांग कर रहे हैं।
सड़क पर उतरने की चेतावनी
मुकेश सहनी ने अपने बयान में साफ संकेत दिया कि यदि पुलिस प्रशासन ने मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई, तो उनकी पार्टी आंदोलन का रास्ता भी अपना सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे प्रशासन को चेतावनी और अवसर दे रहे हैं, लेकिन यदि दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच में ढिलाई बरती गई, तो सड़क पर उतरकर विरोध किया जाएगा।
यह चेतावनी राजनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह मामला स्थानीय कानून-व्यवस्था के मुद्दे से निकलकर क्षेत्रीय राजनीतिक आंदोलन का रूप भी ले सकता है। खासकर तब, जब हत्या जैसे मामलों में जनता की भावनाएं बेहद संवेदनशील होती हैं और विपक्षी या क्षेत्रीय दल ऐसे मुद्दों को जनसरोकार से जोड़कर आगे बढ़ाते हैं।
कानून-व्यवस्था पर फिर गर्माई बिहार की राजनीति
समस्तीपुर में मुकेश सहनी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब बिहार में अपराध, हत्या, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर लगातार बहस तेज है। विपक्ष और छोटे दल सरकार पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती का जो दावा किया जाता है, जमीन पर उसकी तस्वीर कई बार अलग दिखाई देती है। ऐसे में हत्या पीड़ित परिवार से मिलकर सहनी ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक रूप से देखें तो यह दौरा VIP के लिए भी स्थानीय स्तर पर अपनी सक्रियता और जनसरोकार दिखाने का एक मौका बन गया है। पीड़ित परिवार के प्रति सहानुभूति, पुलिस पर दबाव और आंदोलन की चेतावनी—इन तीनों के जरिए मुकेश सहनी ने एक साथ संवेदना, संघर्ष और राजनीतिक संदेश—तीनों को साधने की कोशिश की है।
अब निगाह पुलिस कार्रवाई पर
फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि पुलिस आगे क्या कदम उठाती है। पीड़ित परिवार, स्थानीय लोग और अब राजनीतिक दल—तीनों की नजर इस बात पर है कि प्रमोद कापर हत्याकांड में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पुलिस समय रहते दोषियों तक पहुंच पाती है या नहीं।
मुकेश सहनी के दौरे के बाद यह मामला और ज्यादा हाई-प्रोफाइल हो गया है। ऐसे में अब पुलिस और प्रशासन पर दबाव भी बढ़ेगा कि वे इस केस में तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई करें। क्योंकि इस मामले का असर अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समस्तीपुर में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।
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