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किशनगंज में नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर EOU की बड़ी कार्रवाई, 1.70 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा

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किशनगंज नगर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पटना, छपरा और किशनगंज में 5 ठिकानों पर छापेमारी कर 1.70 करोड़ से अधिक संपत्ति का खुलासा किया।

किशनगंज/आलम की खबर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक बार फिर पुलिस विभाग का ही एक अधिकारी जांच के घेरे में आ गया है। किशनगंज जिले के नगर थाना में पदस्थापित थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले ने न सिर्फ जिला पुलिस बल्कि पूरे राज्य के प्रशासनिक तंत्र में हलचल पैदा कर दी है।

आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने इस मामले में मंगलवार सुबह 14 अप्रैल 2026 को एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई पूरी तरह से सुनियोजित तरीके से की गई, जिसमें टीमों को पटना, छपरा और किशनगंज में स्थित कुल पांच अलग-अलग ठिकानों पर भेजा गया। छापेमारी के दौरान पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी मौजूद रहे ताकि जांच निष्पक्ष और प्रभावी बनी रहे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक पड़ताल में यह सामने आया है कि अभिषेक कुमार रंजन की घोषित आय और वास्तविक संपत्ति में बड़ा अंतर पाया गया है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक यह अंतर लगभग 1 करोड़ 70 लाख 22 हजार रुपये का बताया जा रहा है। यह उनकी वैध आय से लगभग 115 प्रतिशत से अधिक की अतिरिक्त संपत्ति है, जिसे जांच एजेंसियां बेहद गंभीर मान रही हैं।

छापेमारी के दौरान EOU की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंक खातों का विवरण, निवेश के रिकॉर्ड, जमीन-जायदाद से संबंधित दस्तावेज और अन्य वित्तीय लेनदेन के सबूत शामिल हैं। टीम अब इन सभी दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह संपत्ति किन माध्यमों से अर्जित की गई और क्या इसमें किसी प्रकार की बेनामी संपत्ति या फर्जी निवेश का उपयोग हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक जांच सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका है। EOU यह भी जांच कर रही है कि संपत्ति निर्माण में कहीं अवैध तरीके से धन का प्रवाह तो नहीं हुआ।

इस कार्रवाई के बाद किशनगंज पुलिस विभाग में भारी बेचैनी देखी जा रही है। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी पर इस तरह की कार्रवाई ने विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआती कार्रवाई है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। यदि दस्तावेजों और सबूतों में गड़बड़ी पाई जाती है तो आगे और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय स्तर पर भी इस खबर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसे मामले इतने लंबे समय तक कैसे छिपे रहते हैं।

EOU की टीम फिलहाल सभी जब्त दस्तावेजों की जांच में जुटी है और जल्द ही इस पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

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