:
Breaking News

जमुई में ऑडियो वायरल के बाद बड़ी कार्रवाई, महिला दारोगा और चौकीदार निलंबित

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

जमुई के खैरा थाना क्षेत्र में रिश्वत मांगने के वायरल ऑडियो मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। महिला दारोगा और चौकीदार को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

जमुई/आलम की खबर:बिहार के जमुई जिले में पुलिस विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की गई है। खैरा थाना क्षेत्र में रिश्वतखोरी के आरोपों से जुड़ा एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल जांच के आदेश दिए और जांच रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्रवाई की गई।

यह मामला खैरा थाना कांड संख्या 85/26 से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसमें आरोप है कि एक व्यक्ति से मुकदमे में नाम नहीं जोड़ने के एवज में अवैध रूप से पैसे की मांग की गई थी। आरोपों के अनुसार, हरियाडीह निवासी पीड़ित श्यामदेव गोस्वामी से ₹8,000 की मांग की गई थी और दबाव बनाए जाने पर पैसे नहीं देने की स्थिति में केस में फंसाने की धमकी भी दी गई थी।

इस पूरे प्रकरण में आरोप यह भी सामने आया कि पीड़ित से बिचौलिये के माध्यम से ₹7,500 की राशि एक डिजिटल पेमेंट माध्यम पर ट्रांसफर करवाई गई थी। बाद में यह भी दावा किया गया कि संबंधित पुलिस अधिकारी द्वारा फोन पर पैसे मिलने की पुष्टि की गई। इस बातचीत का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

वायरल ऑडियो सामने आने के बाद जमुई पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक ने इस पूरे प्रकरण की जांच सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में कराई। जांच में प्राथमिक स्तर पर आरोपों को सही पाया गया, जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने कड़ा रुख अपनाते हुए खैरा थाना से जुड़े दो कर्मियों पर कार्रवाई की। इस मामले में महिला दारोगा Jayashree और चौकीदार Ashish Tanti को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है।

पुलिस प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि जांच में आरोप और मजबूत होते हैं तो आगे और भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे और अब कार्रवाई होने के बाद उन्हें राहत महसूस हुई है। वहीं, इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और थाना स्तर पर पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे प्रकरण में एक अन्य पहलू भी सामने आया है, जिसमें अधिवक्ता और राजद नेता Golden Ambedkar ने इस मामले को उजागर करने में भूमिका निभाई। उन्होंने वायरल ऑडियो को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाया और कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र में गरीब और आम लोगों को गलत मामलों में फंसाने और दबाव बनाने की शिकायतें पहले से मिल रही थीं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। हालांकि कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच और भी गहराई से होनी चाहिए ताकि वास्तविक सच्चाई सामने आ सके।

फिलहाल इस मामले में विभागीय जांच जारी है और पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। जमुई का यह मामला एक बार फिर पुलिस सिस्टम में जवाबदेही और निगरानी को लेकर बहस को तेज कर गया है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *