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सरहद से UPSC तक का सफर, मेजर नीतीश कुमार सिंह ने संघर्ष से रचा सफलता का इतिहास
- Reporter 12
- 14 Apr, 2026
कभी सरहद पर देश की रक्षा करने वाले मेजर नीतीश कुमार सिंह ने चोट के बाद हार नहीं मानी और UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर नई पहचान बनाई।
बेगूसराय/आलम की खबर:जीवन में कुछ कहानियां सिर्फ सफलता की नहीं होतीं, बल्कि वे संघर्ष, दर्द और आत्मविश्वास की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है मेजर Nitish Kumar Singh की, जिन्होंने देश की सरहद पर दुश्मनों से लड़ाई लड़ी और जब परिस्थितियों ने उन्हें एक नई दिशा में मोड़ दिया, तो उन्होंने हार मानने के बजाय अपने जीवन को फिर से गढ़ने का निर्णय लिया। उनकी यह यात्रा आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
बिहार के बेगूसराय जिले के शम्हो ब्लॉक के बिजुलिया गांव में जन्मे नीतीश कुमार सिंह का बचपन बेहद साधारण माहौल में बीता। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े नीतीश ने बचपन से ही अनुशासन और मेहनत को जीवन का आधार बनाया। उनके पिता ने हमेशा उन्हें यह सिखाया कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि निरंतर मेहनत ही आगे बढ़ने का रास्ता खोलती है।
इन्हीं मूल्यों के साथ उन्होंने देश सेवा का सपना देखा और National Defence Academy (NDA) में प्रवेश लिया। यह उनके जीवन का पहला बड़ा पड़ाव था, जहां से उनका सैन्य सफर शुरू हुआ। एनडीए की कठिन ट्रेनिंग और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत अधिकारी के रूप में तैयार किया।
सेना में चयन के बाद नीतीश भारतीय सेना का हिस्सा बने और देश की रक्षा में अपनी भूमिका निभाने लगे। सेना की जिंदगी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, जहां हर पल देश के लिए तैयार रहना होता है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों में भाग लिया और अपने साहस और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचान बनाई।
साल 2017 में दक्षिण कश्मीर के शोपियां में आतंकियों के खिलाफ चल रहे एक ऑपरेशन के दौरान उनके जीवन में बड़ा मोड़ आया। इस मुठभेड़ में वे गंभीर रूप से घायल हो गए, जिससे उनकी सक्रिय सैन्य सेवा प्रभावित हुई। यह उनके जीवन का सबसे कठिन समय था, जब एक सैनिक को अपनी वर्दी से दूर होना पड़ा।
लेकिन यही वह क्षण था, जिसने उनकी असली परीक्षा ली। चोट और सेवा से अलग होने के बावजूद उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपने भीतर एक नया संकल्प पैदा किया कि यदि एक रास्ता बंद हो गया है, तो देश सेवा का दूसरा रास्ता जरूर खोजा जाएगा।
इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और UPSC Civil Services Examination को अपना लक्ष्य बनाया। यह परीक्षा भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जहां सफलता पाने के लिए वर्षों की मेहनत और अनुशासन की जरूरत होती है।
उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। एक तरफ शारीरिक चोट से उबरना था, तो दूसरी तरफ लगातार पढ़ाई का दबाव भी था। लेकिन सेना में सीखा अनुशासन उनके काम आया। उन्होंने एक सख्त दिनचर्या अपनाई और हर दिन को लक्ष्य के साथ जीना शुरू किया।
धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और आखिरकार UPSC 2025 के परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया 305वीं रैंक हासिल कर ली। यह उपलब्धि केवल एक परीक्षा पास करना नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की जीत थी।
यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। मेजर नीतीश की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में हार मानने की सोचता है।
अब उनका अगला कदम लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण है, जहां वे देश के भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपनी नई यात्रा शुरू करेंगे। अब उनकी भूमिका बदल जाएगी, लेकिन देश सेवा का भाव वही रहेगा—पहले सीमाओं पर और अब सिस्टम के भीतर।
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