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बिहार में रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन: 10 हजार लेते सहायक अभियंता रंगे हाथ गिरफ्तार

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बिहार में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने शिक्षा परियोजना के सहायक अभियंता भूषण प्रसाद को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। मामला डगरूआ प्रखंड से जुड़ा है।

पूर्णिया/आलम की खबर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां विशेष निगरानी इकाई ने शिक्षा विभाग से जुड़े एक सहायक अभियंता को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने न केवल विभागीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, बल्कि यह भी साफ संकेत दे दिया है कि राज्य में “जीरो टॉलरेंस” की नीति को अब जमीन पर सख्ती से लागू किया जा रहा है। गिरफ्तार अभियंता की पहचान भूषण प्रसाद के रूप में हुई है, जो बिहार शिक्षा परियोजना में कार्यरत थे और डगरूआ प्रखंड से जुड़े एक निर्माण कार्य के भुगतान में कथित तौर पर रिश्वत की मांग कर रहे थे।

पूरा मामला तब सामने आया जब एक ठेकेदार नंदन कुमार झा ने लिखित रूप से शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने डगरूआ प्रखंड के मीनापुर गांव में एक विद्यालय भवन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया था, लेकिन इसके बावजूद उनका भुगतान लंबे समय से अटका हुआ था और विभागीय प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार जब उन्होंने संबंधित अभियंता से संपर्क कर अपने बिल के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश की, तो उनसे खुले तौर पर कमीशन की मांग की गई और कहा गया कि बिना पैसे दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ेगी, जिससे वे लगातार मानसिक दबाव में आ गए।

आरोप के मुताबिक सहायक अभियंता द्वारा एमबी यानी मेजरमेंट बुक के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए लगभग छह प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा था और यह भी कहा गया कि जब तक तय रकम नहीं दी जाएगी, तब तक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी उनसे कई बार अलग-अलग बहाने से पैसे लिए जा चुके थे, लेकिन इसके बावजूद भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही थी और हर बार नई मांग सामने आ जाती थी, जिससे वे पूरी तरह परेशान हो गए और आखिरकार उन्होंने इस मामले को उजागर करने का फैसला किया।

शिकायत मिलते ही विशेष निगरानी इकाई ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल एक ट्रैप टीम का गठन किया गया। पूरी योजना बेहद गोपनीय तरीके से तैयार की गई, ताकि आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जा सके और उसके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा सकें। तय रणनीति के अनुसार शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि वह अभियंता को मांगी गई राशि सौंपे और उसी दौरान टीम मौके पर कार्रवाई करेगी। जैसे ही तय स्थान पर शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये अभियंता को दिए, पहले से घात लगाए SVU की टीम ने तत्काल दबिश देकर भूषण प्रसाद को पकड़ लिया और मौके से रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई।

कार्रवाई के दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें और किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन से बचा जा सके। गिरफ्तारी के बाद अभियंता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है और अब यह जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं, क्योंकि अक्सर इस तरह के मामलों में एक पूरा नेटवर्क सक्रिय होता है जो निर्माण कार्यों के भुगतान में अवैध वसूली करता है।

इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहां एक ओर लोग इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम मान रहे हैं और इसे सराह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में इस तरह की रिश्वतखोरी कब तक जारी रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर विकास कार्यों से जुड़े भुगतान में देरी और कमीशन की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे आम लोगों और ठेकेदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह सख्त है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अवैध वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निगरानी तंत्र सक्रिय है और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों के बीच जवाबदेही तय होगी, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि भुगतान प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाया जाए, ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो सके। यदि सिस्टम में सुधार नहीं किया गया, तो इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी।

कुल मिलाकर, डगरूआ प्रखंड से सामने आया यह मामला बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का एक अहम उदाहरण है, जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब रिश्वतखोरी करने वाले अधिकारियों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा। SVU की इस कार्रवाई ने एक मजबूत संदेश दिया है कि चाहे कोई भी पद पर क्यों न हो, अगर वह भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है और कानून अपना काम करेगा।

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