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मुजफ्फरपुर में निजी स्कूलों पर सख्ती, 7% से ज्यादा फीस बढ़ाने पर लगेगा जुर्माना और मान्यता रद्द

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मुजफ्फरपुर में निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ोतरी पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। 7% से अधिक फीस बढ़ाने पर जुर्माना और मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई होगी।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:मुजफ्फरपुर सहित तिरहुत प्रमंडल में निजी स्कूलों द्वारा की जा रही फीस बढ़ोतरी और नामांकन शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली को लेकर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है, जिसके बाद शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थानों में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है, और जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी हाल में नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस पूरे मामले पर हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाना पूरी तरह अवैध है और ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में तिरहुत प्रमंडल के सभी छह जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और अभिभावक संघ के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जहां निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और शुल्क संरचना पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी निजी स्कूल एक शैक्षणिक सत्र में 7 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं कर सकता, और यदि कोई संस्थान इस सीमा का उल्लंघन करता है तो उसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा। अक्सर यह देखा गया है कि कई निजी स्कूल “डेवलपमेंट चार्ज”, “एनुअल फीस” और अन्य नामों से अभिभावकों से अतिरिक्त राशि वसूलते हैं, जिसे अब गंभीरता से लिया जा रहा है और इस पर रोक लगाने के लिए निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत प्रशासन ने जुर्माने का भी स्पष्ट ढांचा तय किया है, जिसमें पहली बार नियम तोड़ने पर एक लाख रुपये का जुर्माना, दूसरी बार दो लाख रुपये का जुर्माना और बार-बार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की अनुशंसा शामिल है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि शिक्षा को व्यावसायिक शोषण का माध्यम बनने से रोका जा सके और अभिभावकों को राहत मिल सके।

इसके साथ ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि सभी स्कूलों के फीस स्ट्रक्चर और वित्तीय दस्तावेजों की नियमित जांच की जाए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते रोका जा सके। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को यह भी आदेश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में इस नियम की व्यापक जानकारी सभी स्कूलों तक पहुंचाएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी संस्था इसका उल्लंघन न करे।

अभिभावक संघ ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान कर सकता है, क्योंकि निजी स्कूलों की बढ़ती फीस से आम परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा था। कई अभिभावकों ने भी उम्मीद जताई है कि इस कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और मनमानी पर रोक लगेगी।

प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि शिक्षा किसी भी स्थिति में व्यापार नहीं बननी चाहिए और जो भी संस्थान नियमों की अनदेखी करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा कदम न केवल निजी स्कूलों के लिए चेतावनी है बल्कि अभिभावकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा प्रयास भी माना जा रहा है।

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