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40 हजार की घूस लेते अफसर गिरफ्तार, 30 घंटे में दूसरी रेड से मचा हड़कंप

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पूर्णिया में विजिलेंस टीम ने राजस्व अधिकारी और उसकी महिला सहयोगी को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के बाद प्रशासन में हलचल तेज।

पूर्णिया/आलम की खबर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच पूर्णिया से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सरकारी महकमों में हलचल तेज कर दी है। पूर्णिया पूर्व अंचल में तैनात एक राजस्व अधिकारी को विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने उसकी महिला सहयोगी के साथ रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया, और इस कार्रवाई की सबसे अहम बात यह रही कि यह छापेमारी महज 30 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई के रूप में सामने आई, जिससे यह साफ संकेत मिला है कि अब निगरानी एजेंसियां भ्रष्टाचार के मामलों में बेहद सक्रिय हो चुकी हैं और किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।मामले की जानकारी के अनुसार, राजस्व अधिकारी लाल बाबू रजक पर आरोप था कि उन्होंने जमीन से जुड़े एक प्रशासनिक कार्य के बदले बड़ी रकम की मांग की थी और पीड़िता को कई दिनों तक दफ्तर के चक्कर लगाने के बाद भी राहत नहीं मिली थी, जिसके चलते वह मानसिक रूप से परेशान हो चुकी थीं। बताया जाता है कि गुलाबबाग क्षेत्र की निवासी ललिता देवी अपनी जमीन से संबंधित स्टे रिपोर्ट जारी कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं, लेकिन हर बार उन्हें किसी न किसी बहाने से टाल दिया जाता था, और अंततः उनसे काम कराने के बदले 50 हजार रुपये की मांग कर दी गई, जो उनके लिए एक बड़ी रकम थी।

इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी अधिकारी ने खुद को सुरक्षित रखने के लिए एक चाल भी चली और सीधे पैसे लेने के बजाय अपनी महिला सहयोगी रूबी कुंडी के माध्यम से रकम लेने की योजना बनाई, ताकि वह खुद सीधे रिश्वत लेते हुए पकड़े न जाएं, लेकिन उनकी यह रणनीति ज्यादा देर तक काम नहीं कर सकी क्योंकि पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए इस मामले की शिकायत विजिलेंस ब्यूरो से कर दी, जिसके बाद पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई और एक विशेष टीम का गठन किया गया।

जांच के दौरान विजिलेंस टीम ने पूरे मामले की पुष्टि करने के बाद जाल बिछाया और सही समय का इंतजार किया, जिसके तहत योजना बनाई गई कि जैसे ही रिश्वत की पहली किस्त दी जाएगी, टीम मौके पर कार्रवाई करेगी। तय योजना के अनुसार शुक्रवार को ललिता देवी ने 40 हजार रुपये की राशि आरोपी की सहयोगी को सौंपी, और इसी दौरान पहले से तैयार विजिलेंस टीम ने मौके पर दबिश देकर दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया, साथ ही मौके से पूरी रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह पूरा लेन-देन अवैध था।

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि कुल 50 हजार रुपये की डील तय हुई थी, जिसमें से 10 हजार रुपये बाद में देने की बात कही गई थी, यानी यह केवल पहली किस्त थी और यदि कार्रवाई नहीं होती तो आगे भी पैसे लिए जाते, जिससे यह मामला और गंभीर हो सकता था।

इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी दफ्तरों में खलबली मच गई है और कर्मचारियों के बीच डर का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि इतने कम समय में लगातार दो बड़ी कार्रवाइयों ने यह संदेश दे दिया है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जो भी इसमें शामिल होगा, वह कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा, साथ ही इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसमें कोई और व्यक्ति भी शामिल तो नहीं है।

इस पूरे मामले में पीड़िता ललिता देवी की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने डरने या समझौता करने के बजाय कानून का सहारा लिया और शिकायत दर्ज कराई, जिसके चलते यह कार्रवाई संभव हो सकी, और उनकी इस पहल को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा भी हो रही है कि यदि आम लोग इसी तरह जागरूक होकर आगे आएं, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत किया जा सकता है।

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