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बिहार के सरकारी अस्पतालों में नई व्यवस्था, स्ट्रेचर-व्हील चेयर अनिवार्य

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बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में स्ट्रेचर और व्हील चेयर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों में स्ट्रेचर, व्हील चेयर और पेशेंट ट्रॉली जैसी बुनियादी सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध रहें।

बिहार स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी जिलों के सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को अपने-अपने अस्पतालों में इन सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब कई अस्पतालों में इन उपकरणों की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।

गाइडलाइन के अनुसार, हर अस्पताल को अपनी बेड क्षमता और मरीजों की संख्या के आधार पर स्ट्रेचर और व्हील चेयर की संख्या तय करनी होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गंभीर रूप से बीमार, घायल या चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसी तरह की दिक्कत न हो। अस्पताल प्रशासन को यह जिम्मेदारी दी गई है कि इन उपकरणों की उपलब्धता हर समय बनी रहे।

आपातकालीन सेवाओं के संदर्भ में इस गाइडलाइन का महत्व और भी बढ़ जाता है। जब किसी मरीज को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल लाया जाता है, तो उसे तुरंत इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू या अन्य जांच केंद्रों तक पहुंचाना जरूरी होता है। ऐसे समय में स्ट्रेचर और व्हील चेयर की कमी मरीज के जीवन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन स्थिति में “गोल्डन आवर” बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह वह समय होता है, जब सही और त्वरित इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। अगर इस दौरान मरीज को समय पर उचित सुविधा नहीं मिलती, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। नई गाइडलाइन का उद्देश्य इसी महत्वपूर्ण समय को सुरक्षित बनाना है।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और पार्किंग क्षेत्र में स्ट्रेचर और व्हील चेयर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसका मकसद यह है कि जैसे ही मरीज अस्पताल पहुंचे, उसे तुरंत सहायता मिल सके। कई बार देखा गया है कि परिजन मरीज को गोद में उठाकर या असुरक्षित तरीके से अंदर ले जाते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। नई व्यवस्था इस समस्या को दूर करने में मदद करेगी।

इसके अलावा, अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे 10 प्रतिशत अतिरिक्त स्ट्रेचर और व्हील चेयर को स्टैंडबाय के रूप में रखें। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए जरूरी है, जब एक साथ कई मरीज अस्पताल पहुंचते हैं या किसी बड़े हादसे की स्थिति बनती है। इस अतिरिक्त व्यवस्था से किसी भी तरह की कमी को तुरंत पूरा किया जा सकेगा।

इस गाइडलाइन का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल उपकरणों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके रखरखाव और उपयोग पर भी जोर देता है। अस्पताल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी स्ट्रेचर और व्हील चेयर सही स्थिति में हों और उनका नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए।

बिहार सरकार का यह कदम राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। इससे न केवल मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस गाइडलाइन को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। भारत जैसे देश में, जहां सरकारी अस्पतालों पर बड़ी आबादी निर्भर करती है, वहां इस तरह के सुधार बेहद जरूरी हैं।

कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह पहल मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक अहम कदम है। इससे अस्पतालों में व्यवस्थाएं बेहतर होंगी और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर सहायता मिल सकेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस गाइडलाइन को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

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