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बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा संकट: 51 हजार से अधिक छात्रों को नहीं मिला शिक्षा ऋण, बढ़ी चिंता

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बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 51 हजार से अधिक छात्रों को अब तक शिक्षा ऋण नहीं मिल सका है। प्रक्रिया में देरी और राशि की कमी से छात्रों की पढ़ाई पर संकट गहराया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना इस समय गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। योजना का उद्देश्य छात्रों को आसान शिक्षा ऋण उपलब्ध कराना था, लेकिन मौजूदा स्थिति में हजारों छात्र अब भी आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं। समय पर ऋण न मिलने के कारण कई छात्रों की पढ़ाई और करियर दोनों पर संकट गहराने लगा है।

राज्य के शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025-26 सत्र के लिए लगभग 95,220 छात्रों को शिक्षा ऋण देने का लक्ष्य तय किया था। लेकिन आवेदन प्रक्रिया में तेजी आने के कारण 97,000 से अधिक मामलों को स्वीकृति तो मिल गई, परंतु इनमें से केवल लगभग 46,000 छात्रों को ही अब तक ऋण राशि प्राप्त हो सकी है। बाकी 51,000 से अधिक छात्र-छात्राएं अभी भी अपने फंड का इंतजार कर रहे हैं।

पटना में सबसे ज्यादा लंबित मामले

राजधानी पटना इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां लगभग 3,536 छात्रों का शिक्षा ऋण अभी तक जारी नहीं किया गया है। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने समय पर सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन महीनों बाद भी उन्हें कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली।

इस देरी के कारण कई छात्रों को कॉलेज फीस जमा करने में कठिनाई हो रही है। कुछ मामलों में संस्थानों ने चेतावनी भी दी है कि यदि समय पर फीस नहीं दी गई तो नामांकन रद्द किया जा सकता है।

प्रक्रिया में देरी और तकनीकी अड़चनें

अधिकारियों के अनुसार, इस देरी के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण राशि आवंटन में देरी और जांच प्रक्रिया की धीमी गति बताई जा रही है। कई मामलों में दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया समय से अधिक ले रही है।

इस प्रक्रिया में पहले जिला पंजीकरण एवं परामर्श केंद्र (DRCC) स्तर पर दस्तावेजों की जांच होती है, उसके बाद थर्ड पार्टी (TP) एजेंसियों द्वारा संस्थानों में जाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्यापन किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में औसतन 60 दिन से अधिक का समय लग रहा है।

इसके अलावा बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम में प्रबंध निदेशक (MD) के पद के लंबे समय तक खाली रहने को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है, जिससे निर्णय लेने और फंड रिलीज प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

छात्रों पर बढ़ता दबाव

इस योजना में देरी का सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है। कई गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह योजना ही उच्च शिक्षा का मुख्य सहारा थी। समय पर ऋण न मिलने के कारण छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है और मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।

कुछ छात्र ऐसे भी हैं जिन्होंने निजी या सरकारी कॉलेजों में दाखिला तो ले लिया है, लेकिन फीस न भर पाने के कारण उनकी उपस्थिति और परीक्षा में शामिल होने पर संकट खड़ा हो गया है।

ब्याज दर में पहले मिली थी राहत

गौरतलब है कि यह योजना पहले से ही बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना रही है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देना है। पहले इस योजना के तहत सामान्य छात्रों को 4% ब्याज दर पर ऋण मिलता था, जबकि छात्राओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग छात्रों को मात्र 1% ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाता था।

बाद में सरकार ने इस योजना को और सरल बनाने का प्रयास किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इसका लाभ उठा सकें। लेकिन मौजूदा समय में प्रक्रिया की जटिलता और प्रशासनिक देरी ने इसके उद्देश्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर इस योजना की प्रक्रिया को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर राज्य की उच्च शिक्षा दर पर पड़ेगा। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया को मजबूत करने और फंड रिलीज सिस्टम को तेज करने की जरूरत है, ताकि छात्रों को समय पर सहायता मिल सके।

आगे की उम्मीद

सरकारी स्तर पर इस समस्या को लेकर समीक्षा की जा रही है और उम्मीद है कि आने वाले समय में लंबित मामलों का निपटारा तेज गति से किया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि फंड आवंटन की प्रक्रिया को जल्द दुरुस्त कर लिया जाएगा, ताकि छात्रों को राहत मिल सके।

निष्कर्ष

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना राज्य के लाखों छात्रों के लिए एक उम्मीद की किरण थी, लेकिन मौजूदा देरी ने इसे चुनौतीपूर्ण स्थिति में पहुंचा दिया है। यदि प्रशासनिक सुधार और फंड मैनेजमेंट को जल्द मजबूत नहीं किया गया, तो इसका असर आने वाले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

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