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Bihar Wheat Procurement: बिहार में गेहूं खरीद लक्ष्य 10 गुना बढ़ा, किसानों को MSP पर बिक्री का बड़ा मौका

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केंद्र सरकार ने बिहार में गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 1.80 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। इससे किसानों को MSP पर फसल बेचने का अधिक अवसर मिलेगा और 48 घंटे में भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार के गेहूं उत्पादक किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्य में गेहूं खरीद के लक्ष्य में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे दस गुना तक बढ़ा दिया है। इस निर्णय के बाद अब अधिक संख्या में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने का अवसर मिलेगा। लंबे समय से सीमित खरीद लक्ष्य के कारण किसान बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचने को मजबूर थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।

राज्य में पहले गेहूं खरीद का लक्ष्य केवल 18 हजार मीट्रिक टन निर्धारित था, जो किसानों की संख्या और उत्पादन के मुकाबले काफी कम माना जा रहा था। इस कारण बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीद व्यवस्था से बाहर रह जाते थे। अब लक्ष्य बढ़ाकर 1.80 लाख मीट्रिक टन किए जाने से खरीद प्रक्रिया का दायरा काफी व्यापक हो गया है और इसका सीधा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है।

खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव

नए लक्ष्य के तहत सहकारिता विभाग और भारतीय खाद्य निगम को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पैक्स और व्यापार मंडलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर खरीद की जाएगी, जबकि एफसीआई भी अपने स्तर पर खरीद को गति देगा। इस समन्वित व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकतम किसानों तक खरीद सुविधा पहुंच सके और उन्हें समय पर लाभ मिले।

राज्य में बड़ी संख्या में क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से किसानों को अपने नजदीकी स्थान पर ही फसल बेचने की सुविधा मिल रही है। इससे परिवहन की समस्या कम होगी और छोटे किसानों को भी आसानी होगी। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं होने देने के निर्देश दिए हैं।

MSP और बाजार मूल्य का अंतर

वर्तमान समय में खुले बाजार में गेहूं की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम चल रही है। ऐसे में किसान यदि निजी व्यापारियों को गेहूं बेचते हैं तो उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। MSP पर सरकारी खरीद बढ़ने से किसानों को निर्धारित दर पर भुगतान सुनिश्चित होगा, जिससे उनकी आय में स्थिरता आएगी।

यह व्यवस्था विशेष रूप से उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सीमित संसाधनों के कारण बेहतर बाजार तक नहीं पहुंच पाते। सरकारी खरीद उनके लिए एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है।

भुगतान प्रणाली पर विशेष ध्यान

सरकार ने खरीद प्रक्रिया के साथ-साथ भुगतान व्यवस्था को भी सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसानों को उनकी फसल का भुगतान 48 घंटे के भीतर किया जाए। इससे किसानों को समय पर राशि प्राप्त होगी और वे अगले कृषि कार्यों के लिए तैयार रहेंगे।

पहले भुगतान में देरी को लेकर कई शिकायतें सामने आती थीं, जिससे किसानों में असंतोष था। इस बार सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

किसानों की मांग पर लिया गया फैसला

किसानों, पैक्सों और व्यापार मंडलों की ओर से लंबे समय से खरीद लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सीमित लक्ष्य के कारण कई किसान सरकारी खरीद से वंचित रह जाते थे। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न स्तरों पर आवाज उठाई गई, जिसके बाद सरकार ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए निर्णय लिया।

यह फैसला दर्शाता है कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है और उनके हित में जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।

भविष्य में दिखेगा सकारात्मक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। अधिक खरीद होने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और वे आने वाले समय में अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित होंगे।

इसके अलावा, सरकारी खरीद बढ़ने से बाजार में संतुलन बना रहेगा और किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

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