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सीतामढ़ी में जानकी नवमी पर सम्राट चौधरी का ऐलान, 2028 तक बनेगा भव्य मां सीता मंदिर

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जानकी नवमी पर सीएम सम्राट चौधरी ने सीतामढ़ी के पुनौराधाम में पूजा कर 2028 तक मां सीता मंदिर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किया।

सीतामढ़ी/आलम की खबर:सम्राट चौधरी ने जानकी नवमी के अवसर पर सीतामढ़ी जिले के पवित्र पुनौराधाम पहुंचकर धार्मिक आस्था और विकास के एजेंडे को एक साथ आगे बढ़ाने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने माता जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और सीताकुंड में जल अर्पित कर आरती में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री के आगमन से पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अवसर के साक्षी बने।

जानकी नवमी के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी महोत्सव का उद्घाटन भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनके लिए यह गर्व का क्षण है कि वे मां सीता की पावन भूमि पर मुख्यमंत्री के रूप में आकर आशीर्वाद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस धरती से जुड़ी आस्था और इतिहास बिहार की पहचान को विशेष बनाते हैं और इसे विश्व स्तर पर स्थापित करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

मंदिर निर्माण को लेकर सख्त समयसीमा

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में मां सीता के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 31 दिसंबर 2028 तक हर हाल में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। उन्होंने बताया कि समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने जून 2029 तक का समय बताया था, लेकिन सरकार ने इसे कम करते हुए 2028 के अंत तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने का अभियान है। इस परियोजना से न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

आस्था और इतिहास का जुड़ाव

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने धार्मिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि मां सीता के जन्म के समय भी इस क्षेत्र में प्राकृतिक विपरीत परिस्थितियां थीं। उन्होंने इसे प्रतीकात्मक रूप में जोड़ते हुए कहा कि जब भूमि पूजन के समय बारिश हुई थी, तो यह भी एक सकारात्मक संकेत था।

उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि का इतिहास और आस्था आज भी लोगों को जोड़ने का काम करता है। यही कारण है कि सरकार इस क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दे रही है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

‘सीता पुरम’ और मेडिकल कॉलेज की योजना

मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सीतामढ़ी में ‘सीता पुरम’ विकसित करने का जो सपना देखा गया था, उसे उनकी सरकार आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि पहली ही कैबिनेट बैठक में इस दिशा में निर्णय लिया गया और अब इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया जारी है।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि यहां एक बड़े मेडिकल कॉलेज के निर्माण का कार्य भी शुरू हो चुका है, जिसका नाम भी मां सीता के नाम पर रखा जाएगा। इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी और स्थानीय विकास को गति मिलेगी।

पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

सीतामढ़ी दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने सचिवालय में अधिकारियों के साथ पर्यटन विकास को लेकर समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से ईको टूरिज्म और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

सरकार का फोकस है कि बिहार के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को विकसित कर उन्हें बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए। इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

राजनीतिक हलचल भी तेज

इस दौरे से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिसमें ललन सिंह भी मौजूद रहे। करीब 20 मिनट चली इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

हालांकि, इस मुलाकात के आधिकारिक एजेंडे को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

50 एकड़ में बनेगा भव्य मंदिर

पुनौराधाम में प्रस्तावित मां जानकी मंदिर करीब 50 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा, जिस पर लगभग 882 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। मंदिर के निर्माण में विशेष प्रकार के बलुआ पत्थर का उपयोग किया जाएगा, जिसे राजस्थान से लाया जाएगा।

मंदिर की ऊंचाई लगभग 156 फीट रखने की योजना है, जिससे यह भव्यता और आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद यह स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बन सकता है।

रामायण सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा

पुनौराधाम को रामायण सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य की जिम्मेदारी अयोध्या राम मंदिर के प्रसिद्ध वास्तुकार परिवार को सौंपी गई है, जिससे इसके डिजाइन और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद बिहार धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा और यहां पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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