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जनगणना में लापरवाही पर बिहार सरकार का बड़ा एक्शन, 600 से अधिक राजस्व अधिकारियों पर जुर्माना

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बिहार में जनगणना कार्य में लापरवाही पर सरकार सख्त। 600+ राजस्व अधिकारियों पर जुर्माना, मुजफ्फरपुर के 5 अधिकारी भी शामिल।

पटना/आलम की खबर:बिहार में जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 600 से अधिक राजस्व अधिकारियों पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है। प्रत्येक अधिकारी पर एक हजार रुपये का दंड लगाया गया है, जो सीधे उनके वेतन से काटा जाएगा। इस कार्रवाई के दायरे में मुजफ्फरपुर जिले के पांच अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सख्ती के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब जनगणना का कार्य अपने महत्वपूर्ण चरण में है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई पूरे राज्य के डेटा और योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।

विभागीय आदेश से मचा हड़कंप

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जनगणना कार्य में असहयोग या लापरवाही को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। विभाग के प्रधान सचिव सह राज्य नोडल पदाधिकारी सी.के. अनिल ने इस संबंध में निर्देश जारी करते हुए बताया कि संबंधित अधिकारियों का व्यवहार कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाला पाया गया है।

आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। कई अधिकारी इस कार्रवाई को लेकर सतर्क हो गए हैं और अब जनगणना कार्य को समय पर पूरा करने की दिशा में तेजी देखने को मिल रही है।

हड़ताल और सामूहिक अवकाश बना कारण

जानकारी के अनुसार, कई स्थानों पर अधिकारियों ने सामूहिक अवकाश या हड़ताल का रास्ता अपनाया था, जिससे जनगणना का काम प्रभावित हुआ। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया।

जनगणना जैसे व्यापक और संवेदनशील कार्य में रुकावट आने से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य की योजनाओं के लिए जरूरी आंकड़ों की सटीकता पर भी असर पड़ता है। इसी कारण विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।

सेंसस एक्ट के तहत कार्रवाई

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सेंसस एक्ट के प्रावधानों के तहत की गई है। इस कानून के अनुसार, जनगणना कार्य में बाधा डालना या सहयोग नहीं करना दंडनीय अपराध है।

सरकार का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल दोषी अधिकारियों पर असर पड़ेगा, बल्कि अन्य कर्मियों के लिए भी यह एक चेतावनी का काम करेगा।

दो चरणों में चल रहा है जनगणना कार्य

बिहार में जनगणना का पहला चरण 17 अप्रैल से शुरू होकर 1 मई तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान घर-घर जाकर सूचीकरण का कार्य किया जा रहा है। दूसरे चरण में 2 मई से 31 मई तक विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी।

इन दोनों चरणों के बीच तालमेल और समयबद्ध कार्य बेहद जरूरी है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही पूरे अभियान को प्रभावित कर सकती है।

मुजफ्फरपुर के अधिकारी भी घेरे में

इस कार्रवाई की जद में मुजफ्फरपुर जिले के पांच अधिकारी भी आए हैं। हालांकि विभाग की ओर से नामों का विस्तृत खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह साफ है कि राज्य के अलग-अलग जिलों में व्यापक स्तर पर यह कार्रवाई की गई है।

स्थानीय स्तर पर भी इस फैसले का असर देखा जा रहा है। अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी का एहसास बढ़ा है और कार्य में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्ती प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम हो सकता है। अक्सर देखा जाता है कि बड़े सरकारी अभियानों में समय पर काम पूरा नहीं हो पाता, जिससे योजनाओं पर असर पड़ता है।

अगर सरकार लगातार इस तरह की जवाबदेही तय करती है, तो भविष्य में कार्यप्रणाली में सुधार संभव है।

निष्कर्ष

जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही पर बिहार सरकार की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि अब प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 600 से अधिक अधिकारियों पर जुर्माना लगाना एक बड़ा कदम है, जो पूरे तंत्र को सतर्क करने का काम करेगा।

अब यह देखना होगा कि इस सख्ती का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है और क्या इससे जनगणना कार्य समय पर और बेहतर तरीके से पूरा हो पाता है।

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