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बिहार में पुनपुन में NFSU और CFSL लैब को मंजूरी, फोरेंसिक जांच और साइबर क्राइम सिस्टम होगा मजबूत

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बिहार सरकार ने पटना के पुनपुन में NFSU ऑफ-कैंपस और CFSL निर्माण को मंजूरी दी है। इससे फोरेंसिक जांच, साइबर क्राइम और वैज्ञानिक अनुसंधान को नई मजबूती मिलेगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने राज्य में अपराध जांच प्रणाली को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत पटना जिले के पुनपुन प्रखंड के डूमरी में राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के ऑफ-कैंपस और केंद्रीय फोरेंसिक साइंसेज लैबोरेटरी (CFSL) के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के लिए सरकार ने 50 एकड़ भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति दी है और इसके लिए 287.16 करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी गई है।

सरकार का उद्देश्य राज्य में अपराध जांच प्रक्रिया को तेज, सटीक और वैज्ञानिक आधार पर मजबूत बनाना है। अभी तक बिहार को डीएनए टेस्ट, साइबर क्राइम जांच और अन्य फोरेंसिक विश्लेषण के लिए दूसरे राज्यों की प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे जांच रिपोर्ट में देरी होती थी और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती थी। अब इस नई सुविधा के बाद राज्य में ही सभी आधुनिक फोरेंसिक जांच संभव हो सकेगी।

एक ही जगह पर मिलेंगी आधुनिक जांच सुविधाएं

इस परियोजना के तहत बनने वाली फोरेंसिक लैब में डीएनए जांच, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, साइबर क्राइम जांच, ड्रग्स और विस्फोटक परीक्षण जैसी सभी अत्याधुनिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इसके अलावा डिजिटल फोरेंसिक और अपराध स्थल विश्लेषण के लिए आधुनिक तकनीक और उपकरण भी लगाए जाएंगे।

इससे जांच प्रक्रिया न केवल तेज होगी बल्कि अधिक सटीक परिणाम भी मिल सकेंगे, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया मजबूत होगी।

शिक्षा और शोध का भी बड़ा केंद्र बनेगा NFSU

NFSU कैंपस केवल जांच केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि यह एक उच्च स्तरीय शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थान के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां स्मार्ट क्लासरूम, अत्याधुनिक रिसर्च लैब, लाइब्रेरी और छात्रावास जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इससे छात्रों को फोरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और व्यवहार विज्ञान जैसे विषयों में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सकेगा। यह संस्थान भविष्य में विशेषज्ञ फोरेंसिक वैज्ञानिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पुलिस और जांच एजेंसियों को मिलेगा प्रशिक्षण

फोरेंसिक यूनिवर्सिटी का एक प्रमुख उद्देश्य पुलिस, न्यायिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को फोरेंसिक साक्ष्य जुटाने और उनके विश्लेषण का प्रशिक्षण देना भी होगा। इससे जांच एजेंसियों की क्षमता और दक्षता में सुधार होगा और अपराध नियंत्रण व्यवस्था अधिक मजबूत बनेगी।

बिहार में फोरेंसिक नेटवर्क का विस्तार

वर्तमान में बिहार में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में चार फोरेंसिक लैब संचालित हैं। राज्य सरकार आने वाले 1 से 2 वर्षों में 9 नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है, जिसके बाद इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी।

इसके अलावा पटना और राजगीर में साइबर फोरेंसिक लैब और 50 मोबाइल फोरेंसिक वैन पहले से ही कार्यरत हैं, जो अपराध स्थलों पर पहुंचकर तत्काल जांच में मदद करती हैं।

जांच व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव

इस परियोजना के शुरू होने के बाद बिहार में अपराध जांच प्रणाली पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है। अब जांच रिपोर्ट के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म होगी और मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।

सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि राज्य को तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाएगा।

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