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IGIMS पटना में MBBS परीक्षा में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा, द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा रद्द, 7 छात्रों और कर्मचारियों को नोटिस

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पटना IGIMS में MBBS द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई है। 7 छात्रों और परीक्षा विभाग के कर्मियों को नोटिस जारी किया गया है, जांच रिपोर्ट में कदाचार की आशंका जताई गई है।

पटना/आलम की खबर:पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला MBBS द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा में सामने आई गंभीर गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसके बाद संस्थान प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह फैसला जांच रिपोर्ट में कदाचार की आशंका सामने आने के बाद लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, यह पूरक परीक्षा दिसंबर 2025 में आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 130 छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद एक अज्ञात ईमेल के जरिए परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत सामने आई, जिसके बाद संस्थान प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए अप्रैल के पहले सप्ताह में एक जांच समिति का गठन किया।

इस जांच समिति का नेतृत्व डीन (अकादमिक) डॉ. ओम कुमार ने किया, जबकि टीम में डॉ. विभूति सिन्हा, प्रफुल्ल रंजन और रजिस्ट्रार डॉ. सर्वेश को शामिल किया गया। समिति ने विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है, हालांकि रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन शुरुआती निष्कर्षों ने परीक्षा प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच रिपोर्ट में यह संकेत मिले हैं कि परीक्षा पूरी तरह से कदाचार मुक्त नहीं थी और उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कुछ कॉपियों में हस्ताक्षरों में असमानता पाई गई, जिससे गड़बड़ी की आशंका और मजबूत हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं में आगे और पीछे के पन्नों पर हस्ताक्षर एक जैसे पाए गए, जबकि बीच के पन्नों पर अलग हस्ताक्षर दर्ज मिले। इस तरह की असंगतियों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए IGIMS प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव किए हैं। विभाग में प्रो. अंजू सिंह, डॉ. विनोद कुमार और डॉ. सरिता मिश्रा को सब डीन (परीक्षा) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वहीं, परीक्षा विभाग के सभी कर्मियों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है।

इसके साथ ही परीक्षा में शामिल सात छात्रों और संबंधित परीक्षा विभाग के कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे जवाब मांगा गया है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

IGIMS प्रशासन का यह कदम मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में परीक्षा की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यह सीधे भविष्य के डॉक्टरों की योग्यता से जुड़ा होता है।

इस घटना के बाद संस्थान में छात्रों के बीच भी चिंता का माहौल देखा जा रहा है। कई छात्र यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे परीक्षा दोबारा कब आयोजित की जाएगी और उनका शैक्षणिक कैलेंडर कैसे प्रभावित होगा।

प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद ही आगे का अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल संस्थान ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच प्रक्रिया जारी रखी है।

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