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बिहार में नया साइबर फ्रॉड अलर्ट, जनगणना के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर लोगों के बैंक खाते खाली, पुलिस ने जारी की चेतावनी

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बिहार में साइबर अपराधियों ने जनगणना के नाम पर नया ठगी का तरीका अपनाया है। फर्जी लिंक और कॉल के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। पुलिस ने हाई अलर्ट जारी किया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में साइबर अपराध का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है, जिसने आम लोगों की सुरक्षा और बैंकिंग सिस्टम की चिंता बढ़ा दी है। अब ठग जनगणना (सेंसस) के नाम पर लोगों को फंसाकर उनके बैंक खातों को खाली कर रहे हैं। यह मामला लगातार बढ़ता जा रहा है और कई जिलों से शिकायतें सामने आ रही हैं।

साइबर ठग खुद को सरकारी जनगणना अधिकारी बताकर लोगों से फोन, एसएमएस और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क कर रहे हैं। वे लोगों को यह कहकर डराते हैं कि उनकी “स्व-गणना प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है” और यदि तुरंत फॉर्म नहीं भरा गया तो सरकारी योजनाओं का लाभ बंद हो जाएगा। इसी डर का फायदा उठाकर लोगों को एक फर्जी लिंक भेजा जाता है।

जैसे ही कोई व्यक्ति इस लिंक पर क्लिक करता है, उसका मोबाइल हैंग हो जाता है और कुछ ही समय में साइबर अपराधी उसके बैंक खाते तक पहुंच बना लेते हैं। इसके बाद खाते से पैसे गायब हो जाते हैं और पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता जब तक नुकसान हो चुका होता है।

बिहार पुलिस की साइबर इकाई ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्यभर में हाई अलर्ट जारी किया है। पटना, मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों से लगातार ऐसे मामलों की शिकायतें मिल रही हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें।

राजधानी पटना में एक व्यक्ति के बैंक खाते से 25 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, जबकि मुजफ्फरपुर में एक महिला के खाते से 10 हजार रुपये निकाल लिए गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि साइबर ठग विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं, जहां डिजिटल जानकारी और जागरूकता की कमी है।

ठग लोगों को सरकारी योजनाओं का डर दिखाकर आसानी से अपने जाल में फंसा रहे हैं। कई मामलों में लोग यह समझकर लिंक खोल देते हैं कि यह किसी सरकारी लाभ या सर्वे से जुड़ा हुआ संदेश है, लेकिन असल में यह पूरी तरह फर्जी और खतरनाक होता है।

जनगणना से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने साफ किया है कि विभाग कभी भी किसी नागरिक से ओटीपी, बैंक डिटेल या निजी जानकारी फोन या मैसेज के जरिए नहीं मांगता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्व-गणना के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in/⁠� का ही उपयोग किया जाए।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक “फिशिंग स्कैम” है, जिसमें अपराधी नकली लिंक के जरिए लोगों की निजी जानकारी चुरा लेते हैं। एक बार जानकारी हाथ लगने के बाद वे मिनटों में बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं।

पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा है कि किसी भी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें। अगर किसी को संदेह हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। थोड़ी सी लापरवाही किसी भी व्यक्ति को भारी आर्थिक नुकसान में डाल सकती है।

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