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समस्तीपुर मोहनपुर दोहरा हत्याकांड: दो दोषियों को उम्रकैद, अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

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समस्तीपुर के मोहनपुर ओपी क्षेत्र में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में एडीजे द्वितीय की अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना भी लगाया गया है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के मोहनपुर ओपी क्षेत्र में वर्ष 2021 में घटित बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में आखिरकार अदालत ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। यह मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया पूरी करते हुए अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में एक बार फिर इस पुराने और चर्चित मामले की चर्चा तेज हो गई है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय सत्यप्रकाश शुक्ला की अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया। अदालत ने पटना जिले के सलीमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत काला दियारा निवासी नंदु राय और नरसिंह राय को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया और दोनों को आजीवन कारावास की सजा दी। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पर दस-दस हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।

इसके अतिरिक्त आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत भी अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा करने में असफल रहते हैं तो उन्हें अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा।

यह पूरा मामला 17 मार्च 2021 का है, जब मोहनपुर थाना क्षेत्र के हरदासपुर गांव में खेत की फसल काटने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ था। शुरुआती विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया और देखते ही देखते यह हिंसक झड़प में बदल गया। इसी दौरान एक पक्ष द्वारा की गई गोलीबारी में विद्या राय और निवास राय की मौके पर ही मौत हो गई थी।

घटना के बाद पूरे गांव में तनाव और भय का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। इस संबंध में मृतक विद्या राय के भतीजे संजीत कुमार के बयान के आधार पर मोहनपुर ओपी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। लंबे समय तक चली जांच प्रक्रिया और न्यायालय में गवाहों की गवाही के बाद अंततः अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) शिवशंकर ठाकुर ने मजबूत पैरवी की और अदालत के समक्ष सभी साक्ष्य एवं गवाह प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी अपने स्तर पर दलीलें पेश कीं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को अधिक विश्वसनीय मानते हुए आरोपियों को दोषी करार दिया।

इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में भी इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों का मानना है कि लंबे इंतजार के बाद यह निर्णय न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन और फसल से जुड़े विवाद किस तरह गंभीर अपराधों का रूप ले लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को समय रहते सुलझाने के लिए स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर पर अधिक सक्रियता की आवश्यकता है।

अदालत के इस फैसले के बाद पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

समस्तीपुर का यह मामला अब उन चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया है, जिनमें लंबे समय बाद अदालत ने सख्त और स्पष्ट निर्णय दिया है। यह फैसला न केवल दोषियों के लिए सजा है, बल्कि समाज के लिए एक संदेश भी है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति बरी नहीं हो सकता।

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