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मुजफ्फरपुर केस: मां और तीन बच्चों की मौत का रहस्य बरकरार, 4 महीने बाद भी नहीं मिला जवाब

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मुजफ्फरपुर में मां और तीन बच्चों की संदिग्ध मौत का मामला चार महीने बाद भी अनसुलझा है। पुलिस कार्रवाई और FSL रिपोर्ट में देरी पर सवाल उठ रहे हैं।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चार महीने पहले सामने आई मां और उसके तीन मासूम बच्चों की संदिग्ध मौत की घटना आज भी एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन समय बीतने के साथ जहां इस मामले से जुड़ी उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं, वहीं पीड़ित परिवार का आक्रोश और दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इतने लंबे समय के बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है और जांच की दिशा अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

यह हृदयविदारक मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के चंदवारा पुल के नीचे से सामने आया था, जहां एक साथ चार शव मिलने की सूचना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी और मौके पर पहुंची पुलिस ने जब स्थिति का जायजा लिया तो दृश्य बेहद विचलित कर देने वाला था, क्योंकि एक महिला और उसके तीन छोटे बच्चों के शव एक-दूसरे से बंधे हुए पाए गए थे, जिससे यह मामला शुरू से ही सामान्य नहीं बल्कि गहरे संदेह वाला प्रतीत हुआ।

मृतका की पहचान ममता कुमारी के रूप में हुई थी, जो अपने तीन बच्चों—आदित्य, अंकुश और कीर्ति—के साथ अचानक लापता हो गई थीं, जिसके बाद उनके पति कृष्णमोहन कुमार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि शुरुआती समय में पुलिस ने जिस तरह से इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, वही इस त्रासदी का सबसे बड़ा कारण बन गया, क्योंकि अगर उसी वक्त तेजी से कार्रवाई की जाती तो शायद इन चारों की जान बचाई जा सकती थी।

लापता होने के कुछ दिनों बाद जब बूढ़ी गंडक नदी के किनारे से चारों के शव बरामद किए गए, तो पूरे इलाके में मातम छा गया और यह घटना एक बड़े सवाल के रूप में सामने आई कि आखिर यह सामूहिक आत्महत्या है या फिर सुनियोजित हत्या, लेकिन पुलिस ने इस पर स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय जांच को विभिन्न कोणों से देखने की बात कहकर समय लिया और धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ता गया।

फिलहाल इस केस में सबसे बड़ा अड़ंगा विधि विज्ञान प्रयोगशाला यानी FSL की रिपोर्ट को लेकर बना हुआ है, जिसका इंतजार पुलिस पिछले कई महीनों से कर रही है और इसी आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है, हालांकि अधिकारियों का दावा है कि रिपोर्ट के लिए कई बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है, जिससे जांच की गति प्रभावित हो रही है और मामला अधर में लटका हुआ है।

इस बीच पुलिस ने एक आरोपी अमोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जिसका नाम मृतका के साथ कथित संबंधों को लेकर सामने आया था, लेकिन परिजनों का कहना है कि यह कार्रवाई महज दिखावा है और असली साजिशकर्ताओं तक पुलिस अब तक नहीं पहुंच सकी है, उनका आरोप है कि जांच की दिशा भटक गई है और केवल एक व्यक्ति को पकड़कर मामले को सुलझा हुआ दिखाने की कोशिश की जा रही है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कोई बड़ा सच छिपा हो सकता है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि चार महीने का लंबा समय बीत जाने के बावजूद जब कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आता है, तो यह साफ तौर पर जांच एजेंसियों की सुस्ती और लापरवाही को दर्शाता है, और अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है, उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मामले की सच्चाई सामने नहीं आई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे और न्याय के लिए सड़कों पर उतरेंगे।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गंभीर और संवेदनशील मामलों में जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, क्योंकि जब तक समय पर साक्ष्य जुटाकर निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा जाता, तब तक न्याय की उम्मीद अधूरी ही रह जाती है, और यही स्थिति इस मामले में भी देखने को मिल रही है, जहां हर बीतते दिन के साथ सच और दूर होता जा रहा है।

फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस के लिए यह केस एक बड़ी चुनौती बन चुका है, जिसमें न केवल तकनीकी जांच बल्कि सामाजिक और मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करनी होगी, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में यह संदेश जाए कि किसी भी गंभीर अपराध को अनदेखा नहीं किया जाएगा, अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यह रहस्य कभी पूरी तरह सामने आ पाएगा या नहीं।

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