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कैबिनेट विस्तार पर सियासी सरगर्मी तेज, नीतीश-सम्राट मुलाकात से बढ़ी राजनीतिक हलचल

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बिहार में कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 7 सर्कुलर रोड पर मुलाकात की। करीब 30 मिनट की इस बातचीत के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति इन दिनों एक बार फिर तेज़ी से बदलते समीकरणों के बीच घूमती नजर आ रही है। नई सरकार के गठन के बाद सबसे बड़ा सवाल कैबिनेट विस्तार को लेकर बना हुआ है, जिस पर अब तक अंतिम फैसला नहीं हो सका है। इसी बीच शनिवार को एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार से उनके 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर मुलाकात की।

यह मुलाकात अचानक नहीं बल्कि उस राजनीतिक पृष्ठभूमि का हिस्सा मानी जा रही है जिसमें बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। करीब 25 से 30 मिनट तक चली इस बैठक ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है और विभिन्न तरह की अटकलों को जन्म दिया है।

कैबिनेट विस्तार में देरी बनी बड़ा राजनीतिक मुद्दा

बिहार में नई सरकार बने हुए लगभग दो सप्ताह का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन नहीं हो पाया है। फिलहाल सरकार अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रही है, जिसमें मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी का सीधा असर प्रशासनिक फैसलों और विकास योजनाओं पर देखा जा रहा है। कई विभागों में नीति निर्धारण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है, जिससे सरकारी कामकाज पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इस दौरान दो कैबिनेट बैठकें जरूर हुई हैं, जिनमें कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, लेकिन मंत्रिमंडल का पूरा विस्तार अभी भी अधर में लटका हुआ है।

नीतीश-सम्राट मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें

7 सर्कुलर रोड पर हुई यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में कैबिनेट विस्तार से जुड़े संभावित नामों और राजनीतिक संतुलन पर चर्चा हुई है। हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे एक निर्णायक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे, जिससे यह संकेत मिलता है कि बातचीत केवल औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया अब अंतिम चरण की ओर बढ़ सकती है।

विपक्ष का हमला तेज, तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि एनडीए गठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है, जिसके कारण कैबिनेट विस्तार में देरी हो रही है।

तेजस्वी यादव का कहना है कि सरकार की यह देरी सीधे तौर पर विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि आखिर सरकार अपने मंत्रिमंडल को लेकर स्पष्ट निर्णय क्यों नहीं ले पा रही है।

दिल्ली तक पहुंची बिहार की सियासत

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट विस्तार को लेकर अब बातचीत केवल पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार दिल्ली तक पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही संभावित मंत्रियों की सूची लेकर दिल्ली जा सकते हैं, जहां अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

इसी बीच जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने भी दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात की थी। इस बैठक में भी बिहार कैबिनेट और गठबंधन के भीतर संतुलन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक फैसला हो सकता है।

एनडीए में संतुलन और समीकरणों की चुनौती

बिहार में एनडीए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंत्रिमंडल में राजनीतिक और जातीय संतुलन बनाए रखने की है। विभिन्न दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गठबंधन की स्थिरता का भी परीक्षण है। हर दल अपने हिस्से और प्रभाव को लेकर सतर्क नजर आ रहा है, जिससे अंतिम सूची तैयार करने में समय लग रहा है।

जनता की नजरें फैसले पर टिकी

राज्य की जनता भी अब इस राजनीतिक खींचतान को ध्यान से देख रही है। लोगों का मानना है कि मंत्रिमंडल के बिना सरकार की गति धीमी हो जाती है और विकास कार्य प्रभावित होते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रशासनिक निर्णयों में देरी की चर्चा आम है।

लोगों की अपेक्षा है कि जल्द से जल्द पूर्ण कैबिनेट का गठन हो ताकि योजनाओं को गति मिल सके और सरकार पूरी क्षमता के साथ काम कर सके।

जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

सूत्रों के मुताबिक, अगर राजनीतिक सहमति बनती है तो अगले एक सप्ताह के भीतर बिहार में कैबिनेट विस्तार की घोषणा संभव है। इसके लिए लगातार बैठकों और संवाद का दौर जारी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे ही दिल्ली में अंतिम सहमति बनेगी, उसके तुरंत बाद बिहार सरकार अपने मंत्रियों की सूची सार्वजनिक कर देगी।

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