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मधेपुरा में 60 साल पुराना साहुगढ़ पुल धंसने से बड़ा हादसा, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा

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मधेपुरा के साहुगढ़ में 60 साल पुराना पुल धंस गया, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया। प्रशासन मौके पर पहुंचा, आवागमन बंद किया गया।

मधेपुरा/आलम की खबर: साहुगढ़ में 60 साल पुराना पुल धंसा, दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूटा

मधेपुरा जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा सामने आया जब जिला मुख्यालय से सटे साहुगढ़ इलाके में 60 साल पुराना जर्जर पुल अचानक धंस गया। इस घटना के बाद साहुगढ़, भेलवा, घैलाढ़ समेत दर्जनों गांवों का मधेपुरा शहर से सीधा संपर्क पूरी तरह टूट गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई।

जानकारी के अनुसार यह पुल लंबे समय से जर्जर हालत में था और इसके ऊपर भारी वाहनों के आवागमन पर पहले से ही रोक लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद शुक्रवार देर रात एक भारी वाहन के गुजरने के बाद पुल कमजोर होकर धंस गया। घटना के बाद सुबह जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी मिली, इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रशासन को तुरंत सूचना दी गई।

पुल धंसने के बाद स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यह मार्ग दर्जनों गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने का प्रमुख रास्ता था। अब लोगों को वैकल्पिक और लंबा मार्ग अपनाकर यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे रोजमर्रा का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम सक्रिय हो गई और एसडीएम संतोष कुमार तथा ट्रैफिक डीएसपी चेतनानंद झा मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने तुरंत पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया ताकि किसी भी तरह की और दुर्घटना न हो सके।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, फिलहाल अस्थायी डायवर्जन मार्ग तैयार करने का काम तेजी से किया जा रहा है ताकि लोगों को राहत मिल सके, लेकिन अभी स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है। वहीं घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि उनका कहना है कि पुल की खराब स्थिति को लेकर कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि अगर पहले ही मरम्मत या नया पुल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए होते तो आज यह स्थिति नहीं आती। इस लापरवाही का खामियाजा अब हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिनकी दैनिक आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक महत्वपूर्ण ग्रामीण संपर्क मार्ग होने के बावजूद इतने पुराने और जर्जर पुल की समय रहते मरम्मत क्यों नहीं की गई। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था और सड़क संरचना की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें और स्थिति सामान्य होने तक सहयोग बनाए रखें। साथ ही इंजीनियरिंग टीम को पुल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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