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Bihar News: ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला निर्माण पर सख्ती की तैयारी, नक्शा पास कराना होगा अनिवार्य

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बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला भवन निर्माण के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी में है। नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा और रेरा की तर्ज पर प्राधिकरण बनाया जाएगा।

पटना/आलम की खबर:बिहार के ग्रामीण इलाकों में तेजी से बदलते शहरी स्वरूप को देखते हुए सरकार अब बहुमंजिला भवन निर्माण को लेकर सख्त नियम लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत गांवों में अपार्टमेंट या बहुमंजिला मकान बनाने से पहले नक्शा पास कराना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके लिए पंचायती राज विभाग ने एक विस्तृत नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस प्रस्ताव को पहले विधि विभाग और उच्चस्तरीय समिति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसे राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा और अंततः विधानमंडल से पारित कराकर इसे कानून का रूप दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित और अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

तेजी से बढ़ते निर्माण पर नियंत्रण की जरूरत

पिछले कुछ वर्षों में शहरों के आसपास के ग्रामीण इलाकों में बहुमंजिला इमारतों और छोटे-छोटे अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स का निर्माण तेजी से बढ़ा है। बिना किसी स्पष्ट नियमन के हो रहे इस विकास ने कई तरह की समस्याएं खड़ी कर दी हैं, जैसे अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव।

सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्थानों पर बिना स्वीकृत नक्शे के बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। इससे न केवल खरीदारों के हित प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि भविष्य में दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अब एक सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है।

रेरा की तर्ज पर बनेगा प्राधिकरण

नई नियमावली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की तर्ज पर एक विशेष प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। यह प्राधिकरण ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली बहुमंजिला इमारतों की निगरानी करेगा और उनके नक्शों को मंजूरी देगा।

इस प्राधिकरण के पास यह अधिकार होगा कि वह किसी भी निर्माण परियोजना की जांच करे और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करे। इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदारों का भरोसा भी मजबूत होगा।

500 वर्गमीटर से बड़ी परियोजनाओं पर सख्ती

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 500 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली किसी भी निर्माण परियोजना को अनिवार्य रूप से पंजीकृत कराना होगा। बिना पंजीकरण के ऐसे प्रोजेक्ट्स पर रोक लगाई जाएगी। इससे बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्यों को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

इसके साथ ही बिल्डरों के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे खरीदारों से प्राप्त धनराशि का 70 प्रतिशत एक अलग बैंक खाते में रखें। इस राशि का उपयोग केवल उसी परियोजना के निर्माण में किया जा सकेगा। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि बिल्डर किसी अन्य प्रोजेक्ट में पैसे का दुरुपयोग न कर सकें और निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सके।

खरीदारों के हितों की सुरक्षा

नई व्यवस्था में घर खरीदने वाले लोगों के हितों को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। यदि बिल्डर तय समय पर परियोजना पूरी नहीं करता है या कब्जा देने में देरी होती है, तो उसे खरीदारों को ब्याज सहित मुआवजा देना होगा।

इसके अलावा, निर्माण के बाद यदि पांच वर्षों के भीतर किसी प्रकार की संरचनात्मक खामी या निर्माण दोष सामने आता है, तो बिल्डर को उसे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ठीक करना होगा। इससे खरीदारों को लंबे समय तक सुरक्षा और भरोसा मिलेगा।

पूरी जानकारी देना होगा अनिवार्य

नियमों के तहत बिल्डरों को अपनी परियोजना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी। इसमें परियोजना का लेआउट, निर्माण योजना, सरकारी स्वीकृतियां और कार्य की प्रगति से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।

साथ ही, बिल्डअप एरिया और कारपेट एरिया का स्पष्ट उल्लेख करना भी अनिवार्य होगा, ताकि खरीदारों को किसी प्रकार की गलत जानकारी न दी जा सके। यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिकायत निवारण की व्यवस्था

नई नियमावली में खरीदारों के लिए शिकायत दर्ज कराने की भी व्यवस्था की गई है। यदि किसी परियोजना में गड़बड़ी या धोखाधड़ी की आशंका होती है, तो संबंधित व्यक्ति सीधे प्राधिकरण के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा।

प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि वह शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई करे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी स्तर की नियामक व्यवस्था विकसित हो सकेगी।

ग्रामीण विकास पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्य अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होंगे। हालांकि शुरुआती दौर में बिल्डरों को कुछ अतिरिक्त प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ेगा, लेकिन लंबे समय में इससे रियल एस्टेट सेक्टर को स्थिरता मिलेगी।

इसके अलावा, इससे गांवों में भी योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा और अवैध निर्माण की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।

निष्कर्ष

बिहार सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। नक्शा पास कराना अनिवार्य करने और प्राधिकरण के गठन से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, खरीदारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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