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Bihar News: विक्रमशिला सेतु हादसे पर सख्त एक्शन, इंजीनियर सस्पेंड, मरम्मत के लिए सेना की मदद

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भागलपुर में विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद बिहार सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। इंजीनियर को सस्पेंड किया गया और पुल की मरम्मत में तेजी के लिए सेना की मदद ली जाएगी।

भागलपुर/आलम की खबर:भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के ढहने के बाद बिहार सरकार ने त्वरित और सख्त कदम उठाए हैं। घटना के तुरंत बाद पथ निर्माण विभाग ने प्राथमिक जांच में लापरवाही की आशंका के आधार पर एक कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पुल की मरम्मत को तेजी से पूरा करने के लिए केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर भारतीय सेना की मदद लेने का निर्णय लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत की। इसके अलावा सेना के शीर्ष अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया, ताकि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कार्य को विशेषज्ञ तकनीकी सहायता के साथ जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। सरकार का मानना है कि सेना के इंजीनियरिंग संसाधनों के सहयोग से काम की गति और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित की जा सकती है।

देर रात हुई घटना, बड़ा हादसा टला

यह घटना रविवार देर रात की है, जब लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल का एक हिस्सा अचानक क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया। बताया जा रहा है कि करीब 30 से 35 मीटर का भाग ढह गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हालांकि प्रशासन ने समय रहते पुल पर यातायात रोक दिया था, जिसके कारण किसी बड़े जनहानि की खबर नहीं आई। यदि ट्रैफिक जारी रहता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

घटना के तुरंत बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी भी प्रकार के आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

कनेक्टिविटी पर बड़ा असर

विक्रमशिला सेतु उत्तर और पूर्व बिहार को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके क्षतिग्रस्त होने से सीमांचल क्षेत्र समेत कई जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हो गई है। प्रतिदिन इस पुल से गुजरने वाले हजारों लोगों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस घटना से लाखों लोगों के दैनिक आवागमन पर असर पड़ा है। व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि यह पुल क्षेत्रीय परिवहन का मुख्य आधार रहा है।

बार-बार मरम्मत के बावजूद हादसा

इस पुल की स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पिछले एक दशक में इसकी कई बार मरम्मत की जा चुकी है। हाल ही में मार्च 2026 में भी इसका रखरखाव कार्य कराया गया था। इसके बावजूद कुछ ही समय बाद पुल का हिस्सा ढह जाना निर्माण और मेंटेनेंस की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमित निगरानी और समय पर तकनीकी सुधार किए जाते, तो शायद इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। अब इस मामले में विस्तृत तकनीकी जांच की भी मांग उठ रही है।

जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू

पथ निर्माण विभाग ने घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया है। विभागीय स्तर पर जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सेना की मदद से तेज होगी मरम्मत

पुल की मरम्मत को लेकर सरकार ने तेजी दिखाते हुए भारतीय सेना की सहायता लेने का निर्णय लिया है। सेना के इंजीनियरिंग विंग को इस कार्य में शामिल करने से उम्मीद की जा रही है कि तकनीकी रूप से मजबूत और सुरक्षित मरम्मत कार्य जल्द पूरा किया जा सकेगा।

सेना के पास ऐसे जटिल और आपातकालीन निर्माण कार्यों का व्यापक अनुभव होता है, इसलिए सरकार इस संसाधन का उपयोग कर जल्द से जल्द कनेक्टिविटी बहाल करना चाहती है।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पुल के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएं और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और लगातार निगरानी की जा रही है।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले मार्ग की जानकारी ले लें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।

निष्कर्ष

विक्रमशिला सेतु हादसे ने राज्य में बुनियादी ढांचे की स्थिति और उसके रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और सेना की मदद से मरम्मत कार्य को तेज करने की दिशा में कदम उठाया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटना से क्या सबक लिया जाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस उपाय किए जाते हैं।

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